सुपारी तस्करी सिंडिकेट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 4 राज्यों में 20 छापे, ₹1,500 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग उजागर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने 3 जुलाई 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत असम, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में एक साथ 20 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई भारत-म्यांमार सीमा के रास्ते सुपारी की अवैध तस्करी और उससे अर्जित ₹1,500 करोड़ से अधिक की राशि को लॉन्डर करने में लिप्त एक बड़े, संगठित सिंडिकेट के विरुद्ध चल रही जांच का हिस्सा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जांच असम के विभिन्न पुलिस थानों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिनमें सुपारी की अवैध तस्करी और सीमा शुल्क चोरी के आरोप हैं। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने इससे पहले गुवाहाटी उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद 655.32 मीट्रिक टन सुपारी और उसे ढोने वाले वाहनों को जब्त किया था।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-म्यांमार सीमा पर तस्करी की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और सुरक्षा एजेंसियाँ सीमापार अपराध नेटवर्क पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रही हैं।
सिंडिकेट का नेटवर्क और प्रमुख आरोपी
ईडी की जांच के अनुसार, यह सिंडिकेट मिजोरम के चम्फाई जिले में स्थित आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए संचालित होता था। प्रमुख आरोपियों में ह्मिंगथानजामी (मालिक, बेकी कुहवा डॉर), लालरिंचहानी (मालिक, एल आर स्टोर) और लालेंकावली (मालिक, के एल स्टोर) शामिल हैं।
असम में सिंडिकेट के सहयोगियों में अबूब अहमद मजूमदार (कथित तौर पर पूरे सिंडिकेट के मुख्य मददगारों में से एक) और प्रदीप कुमार पॉल (मालिक, शारदा ट्रेडर्स) शामिल हैं। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में कंसाइनी और फाइनेंसर के रूप में फलाकाटा की जय माताजी एंटरप्राइजेज, नबद्वीप की नबद्वीप अरेकानट प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड, वाराणसी की शुभ ट्रेडिंग कंपनी और चिमेरा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड भी संलिप्त पाई गई हैं। कोलकाता के शशि कुमार चौधरी (मालिक, एंटरप्राइजेज) और लॉजिस्टिक्स सहयोगी कंपनी बीकानेर असम रोडलाइन्स इंडिया लिमिटेड (गुवाहाटी) भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताए गए हैं।
तस्करी का तरीका और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
जांच के अनुसार, सिंडिकेट चम्फाई-जोखाव्थर रूट से म्यांमार की विदेशी सुपारी की तस्करी करता था। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक उत्पादन आंकड़ों से पुष्टि हुई कि चम्फाई जिले में संबंधित वर्षों में सुपारी का घरेलू उत्पादन शून्य था, जिससे स्पष्ट हो गया कि सारा माल तस्करी का था।
माल को वैध दिखाने के लिए सिंडिकेट नकली जीएसटी इनवॉइस, फर्जी आपूर्तिकर्ता/क्रेता फर्म और झूठे परिवहन दस्तावेजों का उपयोग करता था। पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के खरीदार सिलचर और असम के हवाला ऑपरेटरों को भुगतान करते थे, जो मिजोरम रूरल बैंक के ट्रांजिट खातों के माध्यम से धनराशि चम्फाई के तस्करों तक पहुँचाते थे। अंततः उन खातों से बड़ी मात्रा में नकद निकालकर हवाला के जरिए म्यांमार के आपूर्तिकर्ताओं को वापस भेजा जाता था, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग का चक्र पूरा होता था।
बैंक खातों, जीएसटी रिटर्न और अंतरराष्ट्रीय व्यापार डेटा की जांच से सामने आया कि इस सिंडिकेट ने ₹1,500 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई की, जिसे करंट अकाउंट, इंटरमीडिएट अकाउंट और फ्रंट/शेल कंपनियों के जटिल जाल के जरिए घुमाया गया।
छापेमारी में बरामदगी
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत कई महत्वपूर्ण चीजें जब्त कीं। इनमें सुपारी व्यापार के मैनुअल रिकॉर्ड (डायरी), आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियों के दस्तावेज, व्यावसायिक अभिलेख, मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और ₹1.30 करोड़ की बेहिसाब नकदी शामिल हैं। इसके अलावा, तस्करों से जुड़े 33 बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश भी दिया गया।
रियल एस्टेट में लगाई गई अवैध कमाई
जांच में यह भी सामने आया कि अपराधियों ने अवैध कमाई को रियल एस्टेट में निवेश किया। तस्करों और उनके सहयोगियों ने चम्फाई, सिलचर, गुवाहाटी, नबद्वीप, फलाकाटा, कोलकाता और वाराणसी के पॉश इलाकों में स्वतंत्र विला और ऊँची इमारतें खरीदी और बनवाई। ईडी की यह जांच आगे भी जारी रहने की संभावना है और अधिक गिरफ्तारियाँ या संपत्तियों की कुर्की हो सकती है।