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म्यांमार सुपारी तस्करी: ईडी ने चम्फाई में 9 ठिकानों पर छापा, ₹970 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

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म्यांमार सुपारी तस्करी: ईडी ने चम्फाई में 9 ठिकानों पर छापा, ₹970 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

सारांश

ईडी ने मिजोरम के चम्फाई में नौ ठिकानों पर एक साथ छापा मारा — म्यांमार से तियाउ नदी मार्ग से आने वाली सूखी सुपारी की तस्करी और ₹970 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन के मामले में। फर्जी जीएसटी ई-वे बिल और जाली बागान प्रमाणपत्रों के जरिए माल को वैध दिखाने की कथित साजिश का खुलासा।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5 जून 2026 को मिजोरम के चम्फाई जिले में नौ स्थानों पर छापेमारी की।
म्यांमार से तियाउ नदी और जोखावथर-चम्फाई मार्ग से बिना सीमा शुल्क अनुमति के सूखी सुपारी लाई जाती थी।
2013 से 2025 के बीच ₹970 करोड़ से अधिक के संदिग्ध बैंक लेन-देन का पता चला।
2021 से 2024 के बीच ₹337 करोड़ से अधिक के फर्जी जीएसटी ई-वे बिल तैयार किए गए।
नेटवर्क को असम के सिलचर में रहने वाले व्यापारियों का कथित समर्थन प्राप्त था।
जांच गुवाहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश पर अगस्त 2024 में दर्ज सीबीआई की प्राथमिकी पर आधारित है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5 जून 2026 को मिजोरम के चम्फाई जिले में नौ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जो म्यांमार से कथित रूप से की जा रही सूखी सुपारी की तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है। एजेंसी के अनुसार, 2013 से 2025 के बीच इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों में ₹970 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।

छापेमारी का घटनाक्रम

ईडी के आइजोल उप-क्षेत्रीय कार्यालय की टीमों ने चम्फाई में उन व्यापारियों और अन्य संदिग्धों के घरों तथा कारोबारी प्रतिष्ठानों की तलाशी ली, जिन पर तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह है। तलाशी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, कारोबारी रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी का कहना है कि जब्त सामग्री की विस्तृत जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तस्करी का तरीका

जांच में सामने आया है कि म्यांमार से सूखी सुपारी को कथित तौर पर बिना वैध सीमा शुल्क अनुमति के जोखावथर और चम्फाई मार्ग से भारत लाया जाता था। ईडी के अनुसार, तस्करी का माल तियाउ नदी के रास्ते भारतीय सीमा तक पहुँचाया जाता था, जहाँ स्थानीय लोग उसे प्राप्त करते थे। इसके बाद माल को चम्फाई में संग्रहित कर असम सीमा के पास वैरेंगटे भेजा जाता था। स्थानीय लोगों को परिवहन व्यवस्था के लिए प्रति किलोग्राम ₹2 से ₹15 तक का कमीशन दिए जाने का आरोप है।

फर्जी दस्तावेजों का जाल

एजेंसी का आरोप है कि तस्करी के माल को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी बागान प्रमाणपत्र और जाली सीमा शुल्क दस्तावेजों का उपयोग किया जाता था। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि 2021 से 2024 के बीच माल के परिवहन के लिए ₹337 करोड़ से अधिक मूल्य के फर्जी जीएसटी ई-वे बिल तैयार किए गए। इसके अलावा, जब्त माल को छुड़ाने के लिए कई बार ऐसे आयात दस्तावेज प्रस्तुत किए गए जिनका मामले से कोई संबंध नहीं था।

असम कनेक्शन और जांच का आधार

एजेंसी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को असम के सिलचर में रहने वाले कुछ व्यापारियों और वित्तीय सहयोगियों का समर्थन प्राप्त था। गौरतलब है कि यह जांच अगस्त 2024 में दर्ज केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है, जो गुवाहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश पर दर्ज की गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में म्यांमार सीमा से अवैध व्यापार पर केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी तेज हो गई है।

आगे क्या होगा

ईडी का कहना है कि जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच के बाद मामले में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। ₹970 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि होने पर संपत्ति कुर्की की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

फर्जी जीएसटी दस्तावेजों की सुलभता और सीमापार वित्तीय प्रवाह की निगरानी में मौजूद खामियों का आईना है। गौरतलब है कि यह मामला अदालत के हस्तक्षेप के बाद जांच में आया, न कि स्वतःस्फूर्त प्रवर्तन से — जो एजेंसियों की सक्रियता पर सवाल उठाता है। असम-मिजोरम सीमा पर इस तरह के नेटवर्क की जड़ें गहरी हैं और अकेले छापेमारी से संरचनागत कमज़ोरियाँ नहीं भरतीं; ज़रूरत है सीमा-प्रबंधन और जीएसटी सत्यापन तंत्र में ठोस सुधार की।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने चम्फाई में छापेमारी क्यों की?
ईडी ने म्यांमार से सूखी सुपारी की कथित तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चम्फाई के नौ ठिकानों पर छापा मारा। यह कार्रवाई गुवाहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश पर अगस्त 2024 में दर्ज सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है।
इस तस्करी नेटवर्क में कितने पैसे का लेन-देन हुआ?
एजेंसी के अनुसार, 2013 से 2025 के बीच संबंधित बैंक खातों में ₹970 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। इसके अलावा 2021 से 2024 के बीच ₹337 करोड़ से अधिक के फर्जी जीएसटी ई-वे बिल भी तैयार किए गए।
सुपारी की तस्करी किस मार्ग से होती थी?
कथित तौर पर सूखी सुपारी को म्यांमार से तियाउ नदी के रास्ते भारतीय सीमा तक लाया जाता था और जोखावथर व चम्फाई मार्ग से बिना वैध सीमा शुल्क अनुमति के भारत में प्रवेश कराया जाता था। इसके बाद माल को चम्फाई में संग्रहित कर असम के वैरेंगटे भेजा जाता था।
इस मामले में असम का क्या कनेक्शन है?
ईडी के अनुसार, तस्करी नेटवर्क को असम के सिलचर में रहने वाले कुछ व्यापारियों और वित्तीय सहयोगियों का कथित समर्थन प्राप्त था। माल को वैध दिखाने के लिए फर्जी बागान प्रमाणपत्र और जाली सीमा शुल्क दस्तावेजों का उपयोग किया जाता था।
अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
ईडी ने जब्त मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच का संकेत दिया है। जांच पूरी होने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध गिरफ्तारी या संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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