24 जुलाई 2026
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ईडी की छापेमारी: मिजोरम-म्यांमार व त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा पर ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़, ₹142 करोड़ की अवैध संपत्ति चिह्नित

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ईडी की छापेमारी: मिजोरम-म्यांमार व त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा पर ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़, ₹142 करोड़ की अवैध संपत्ति चिह्नित

सारांश

ईडी की यह कार्रवाई महज एक छापेमारी नहीं — यह पूर्वोत्तर की दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर फैले ड्रग-मनी नेटवर्क का पर्दाफाश है। म्यांमार से मेथामफेटामाइन, बांग्लादेश सीमा तक रिसीवर्स और ₹142 करोड़ की अवैध संपत्ति — यह सिंडिकेट की गहराई बताता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 जून 2026 को मिजोरम , त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में 4 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
मामला एनसीबी अगरतला द्वारा 21 अगस्त 2025 को की गई 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़ा है।
तस्करी मार्ग: म्यांमार → मिजोरम (चम्फाई/जोकॉथर) → त्रिपुरा ; छापेमारी स्थल सीमा से 200–500 मीटर दूर।
अब तक ₹142 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति चिह्नित; धन को बैंक खातों और शेल कंपनियों से घुमाया गया।
इससे पहले मिजोरम में सुपारी तस्करी मामले में ₹970 करोड़ के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' से जुड़ी कार्रवाई हो चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में चार स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में एक संगठित सीमा-पार ड्रग तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिससे जुड़ी ₹142 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति अब तक चिह्नित की जा चुकी है।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की अगरतला जोनल यूनिट से जुड़ा है। 21 अगस्त 2025 को एनसीबी ने 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन की बड़ी बरामदगी की थी, जो इस पूरे नेटवर्क के उजागर होने का आधार बनी। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में म्यांमार से मादक पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

तस्करी नेटवर्क का संचालन

जांच में सामने आया कि म्यांमार से मेथामफेटामाइन मिजोरम के चम्फाई/जोकॉथर सेक्टर के रास्ते भारत में लाई जाती थी। इसके बाद इसे त्रिपुरा में रिसीवर्स तक पहुँचाया जाता था। उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा में जिन स्थानों पर छापेमारी हुई, वे बांग्लादेश सीमा से मात्र 200 मीटर दूर हैं, जबकि मिजोरम के छापेमारी स्थल म्यांमार सीमा से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित हैं।

अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों और शेल कंपनियों के माध्यम से वैध दिखाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी के अनुसार इस नेटवर्क की वित्तीय जड़ें गहरी हैं और इनकी विस्तृत जाँच जारी है।

पूर्व में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

गौरतलब है कि इससे पहले ईडी ने मिजोरम में म्यांमार से जुड़ी सुपारी तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चम्फाई जिले के 9 ठिकानों पर छापेमारी की थी। वह कार्रवाई ₹970 करोड़ से अधिक के कथित 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' से जुड़े मामले में हुई थी। उस जाँच में सामने आया था कि म्यांमार से अवैध सुपारी तिउ नदी के रास्ते भारत में लाई जाती थी और मिजोरम के सीमावर्ती इलाकों के स्थानीय नेटवर्क से होते हुए असम तक भेजी जाती थी।

उस मामले में असम के सिलचर स्थित व्यापारी और फाइनेंसर भी शामिल पाए गए थे, जो बैंकिंग चैनलों के जरिए फंडिंग करते थे। जाँच में 2021 से 2024 के बीच बड़े पैमाने पर फर्जी ई-वे बिल और कर धोखाधड़ी के साक्ष्य भी मिले थे।

छापेमारी में क्या मिला

ताज़ा कार्रवाई के दौरान जांच अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, संपत्ति के कागजात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह एक संगठित सीमा-पार ड्रग सिंडिकेट है और इसके वित्तीय लेन-देन व नेटवर्क की गहन जाँच की जा रही है।

आगे की कार्रवाई

जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक चिह्नित ₹142 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर की सीमाओं पर ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामले बहु-एजेंसी समन्वय की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि शेल कंपनियाँ और फर्जी ई-वे बिल इतने सालों तक नज़रअंदाज़ कैसे रहे। म्यांमार सीमा से 500 मीटर और बांग्लादेश सीमा से 200 मीटर पर सक्रिय ठिकाने यह बताते हैं कि सीमा सुरक्षा और वित्तीय निगरानी के बीच की खाई को पाटना अभी बाकी है। जब तक बहु-एजेंसी समन्वय और सीमावर्ती वित्तीय खुफिया तंत्र को मजबूत नहीं किया जाता, ऐसे नेटवर्क नए रूप में उभरते रहेंगे।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने यह छापेमारी किस मामले में की?
यह छापेमारी एनसीबी की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा 21 अगस्त 2025 को की गई 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 40 ग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत कार्रवाई की।
इस नेटवर्क से कितनी अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ?
जांच एजेंसी के अनुसार अब तक ₹142 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति चिह्नित की जा चुकी है। इस धन को कई बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया था।
ड्रग तस्करी का रूट क्या था?
म्यांमार से मेथामफेटामाइन मिजोरम के चम्फाई/जोकॉथर सेक्टर के रास्ते भारत में लाई जाती थी और फिर त्रिपुरा में रिसीवर्स तक पहुँचाई जाती थी। छापेमारी के स्थान म्यांमार सीमा से लगभग 500 मीटर और बांग्लादेश सीमा से लगभग 200 मीटर की दूरी पर थे।
क्या पहले भी इस क्षेत्र में ऐसी कार्रवाई हो चुकी है?
हाँ, इससे पहले ईडी ने मिजोरम के चम्फाई जिले में 9 ठिकानों पर म्यांमार से जुड़ी सुपारी तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में छापेमारी की थी, जो ₹970 करोड़ से अधिक के कथित 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' से जुड़ी थी। उस जाँच में 2021 से 2024 के बीच फर्जी ई-वे बिल और कर धोखाधड़ी के सबूत भी मिले थे।
आगे की कार्रवाई में क्या होगा?
ईडी के अनुसार इस सीमा-पार ड्रग सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क की गहन जाँच जारी है। छापेमारी में जब्त दस्तावेज़, संपत्ति के कागजात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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