एनसीबी ने भारत-म्यांमार सीमा पर ड्रग सिंडिकेट तोड़ा, म्यांमार का सरगना मणिपुर से गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 22 जुलाई 2026 को भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए उसके मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान म्यांमार के चिन राज्य के हैचिन निवासी नेंगजातुआन उर्फ तुआनपी के रूप में हुई है, जिसे मणिपुर के चुराचंदपुर से दबोचा गया।
मुख्य घटनाक्रम
एनसीबी के अनुसार, यह गिरफ्तारी महीनों की खुफिया जानकारी जुटाने, तकनीकी निगरानी और समन्वित अंतरराज्यीय अभियानों के बाद संभव हो सकी। जांच में सामने आया है कि नेंगजातुआन चिन राज्य से संचालित एक सुसंगठित तस्करी नेटवर्क का प्रमुख था, जो मेथम्फेटामाइन और हेरोइन को मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा के रास्ते भारत और बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में पहुँचाता था।
यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं, सीमा पार कूरियरों, परिवहन समन्वयकों, स्थानीय दलालों और वित्तीय संचालकों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से काम करता था।
जब्ती और मामलों का विवरण
एनसीबी के तीन मामलों में आरोपी मुख्य संदिग्ध है, जिनमें कुल 28.22 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन टैबलेट और 1.278 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी — जिनकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹25 करोड़ से अधिक बताई गई है। इसके अलावा, चुराचंदपुर पुलिस, सिंगंगट पुलिस और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के सात अन्य एनडीपीएस मामलों में भी वह वांछित है।
अब तक इस सिंडिकेट से जुड़ी मेथम्फेटामाइन, हेरोइन और अपराध से अर्जित धनराशि सहित कुल ₹53 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
नेटवर्क की संरचना और विस्तार
जांच से उजागर हुआ है कि यह सिंडिकेट केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था — इसमें वित्तीय संचालन की एक समानांतर व्यवस्था भी थी। एनसीबी के अनुसार, अपराध से प्राप्त अतिरिक्त धन, संपत्तियों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए वित्तीय जांच अभी भी जारी है। गौरतलब है कि पिछले कई महीनों में एनसीबी ने खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों के जरिए मणिपुर और असम में कई प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
एनसीबी की रणनीति
यह कार्रवाई एनसीबी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें केवल व्यक्तिगत खेपों को जब्त करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के नेतृत्व को सीधे निशाना बनाया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व भारत की सीमाएँ, विशेष रूप से म्यांमार से लगती सीमारेखा, 'गोल्डन ट्रायंगल' से आने वाले नशीले पदार्थों के प्रवाह के लिए एक संवेदनशील मार्ग बनी हुई हैं।
एनसीबी ने स्पष्ट किया है कि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय जारी रखेगी। जांच में आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।