ईडी की तीन राज्यों में छापेमारी: ₹142 करोड़ के ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम में एक साथ चार स्थानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क के ज़रिए ₹142 करोड़ से अधिक की अवैध धनराशि का लेनदेन किया गया। यह कार्रवाई नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की अगरतला जोनल यूनिट द्वारा दर्ज मामले के आधार पर की गई है।
मूल मामला और ड्रग बरामदगी
21 अगस्त 2025 को मिजोरम में राष्ट्रीय राजमार्ग-6ए पर एक वाहन काफिले को रोका गया था। तलाशी के दौरान 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी, तथा इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
जांच में सामने आया कि यह एक संगठित अंतर्राज्यीय और सीमा पार तस्करी नेटवर्क था। मादक पदार्थ म्यांमार स्थित सप्लायरों से मंगाए जाते थे और मिजोरम के चंफाई जिले के जोखावथर सेक्टर के रास्ते भारत में प्रवेश कराए जाते थे, जिसके बाद इन्हें त्रिपुरा में मौजूद नेटवर्क तक पहुँचाया जाता था।
मुख्य आरोपी और संदिग्ध संस्थाएँ
छापेमारी में जिन प्रमुख लोगों को निशाना बनाया गया, उनमें त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के सोनामुरा निवासी अनवर हुसैन उर्फ सुमन मियां उर्फ 'करोड़पति सुमन' और जाशिम मियां शामिल हैं। दोनों को बरामद खेप का अंतिम प्राप्तकर्ता माना जा रहा है।
इसके अलावा मिजोरम के जोखावथर निवासी हमिंगथानसांगी के परिसरों की भी तलाशी ली गई। जांच के अनुसार, उनके बैंक खाते में ₹33 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित एम/एस रिजू एंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर चैताली दास के परिसरों पर भी छापेमारी हुई — एजेंसी को संदेह है कि इस फर्म का उपयोग अवैध धन को वैध दिखाने के लिए किया गया।
म्यांमार स्थित मुख्य सप्लायर चिंतुआंग और जबरुल हक को NCB पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
हवाला और फर्जी कंपनियों से धन शोधन
ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित धन को कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों, नकद लेनदेन और हवाला नेटवर्क के माध्यम से घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों की पहचान छिपाई जाती थी। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत ईडी के आइजोल सब-जोनल कार्यालय द्वारा संचालित की गई।
सीमा निगरानी का चौंकाने वाला खुलासा
छापेमारी के दौरान सुमन मियां और जाशिम मियां के घरों के आसपास जंगलों में पेड़ों पर लगाए गए 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे मिले, जो भारत-बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय सीमा की निगरानी कर रहे थे। यह तथ्य इस नेटवर्क की परिष्कृत और सुनियोजित प्रकृति को उजागर करता है। तलाशी अभियान में डॉग स्क्वायड की भी सहायता ली गई।
आगे की जांच
गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पूर्वोत्तर भारत में म्यांमार से आने वाले मादक पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ईडी की यह जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ तथा संपत्तियों की कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।