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अलीराजपुर के पूर्व आबकारी अधिकारी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, ₹18.20 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में इंदौर कोर्ट पहुंचा मामला

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अलीराजपुर के पूर्व आबकारी अधिकारी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, ₹18.20 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में इंदौर कोर्ट पहुंचा मामला

सारांश

अलीराजपुर के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया पर ईडी ने ₹18.20 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला इंदौर स्पेशल कोर्ट में पहुंचाया। नकद, सोना-चांदी और अचल संपत्तियाँ पहले ही जब्त, अब न्यायिक प्रक्रिया शुरू।

मुख्य बातें

ईडी के भोपाल जोनल ऑफिस ने पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के खिलाफ इंदौर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की।
कोर्ट ने आरोपी भदौरिया को नोटिस जारी किया; मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन।
जांच का आधार लोकायुक्त, इंदौर की एफआईआर — भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत।
ईडी ने ₹18.20 करोड़ मूल्य की चल-अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पहले ही जारी किया था।
जब्त संपत्तियों में नकद, सोना-चांदी और अचल संपत्तियाँ शामिल; आगे की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने अलीराजपुर के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। कोर्ट ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपी भदौरिया को नोटिस जारी कर दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत ₹18.20 करोड़ है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (एसपीई), लोकायुक्त, इंदौर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत दर्ज की गई थी। मूल आरोप यह था कि मध्य प्रदेश सरकार के आबकारी विभाग में सेवारत रहते हुए भदौरिया ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।

ईडी की जांच में क्या सामने आया

ईडी की जांच के अनुसार, धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने जानबूझकर अपराध से प्राप्त धनराशि को हासिल किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया। जांच में यह भी पाया गया कि उन्होंने इस अवैध धन को अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर महंगी चल तथा अचल संपत्तियों में निवेश किया। ये संपत्तियाँ उनकी ज्ञात वैध आय से कहीं अधिक थीं, जिन्हें पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 'अपराध से अर्जित संपत्ति' माना गया।

जब्त की गई संपत्तियाँ

ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत ₹18.20 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पहले ही जारी कर दिया था। जब्त की गई संपत्तियों में नकद, सोना-चांदी, अचल संपत्तियाँ और अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई अन्य परिसंपत्तियाँ शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाइयों की श्रृंखला जारी है।

आगे की कार्रवाई

ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच और विधिवत कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। इंदौर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में दायर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। गौरतलब है कि पीएमएलए के तहत दायर शिकायतें आपराधिक मुकदमे के समान होती हैं और दोष सिद्ध होने पर कठोर सज़ा का प्रावधान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ नियामक शक्ति और नकद-आधारित लेनदेन का संयोग भ्रष्टाचार के लिए उर्वर ज़मीन बनाता है। ईडी की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ₹18.20 करोड़ की संपत्ति इतने वर्षों तक बिना किसी विभागीय जाँच के कैसे अर्जित होती रही। लोकायुक्त की एफआईआर के बाद ईडी को सक्रिय होना पड़ा — यह दर्शाता है कि आंतरिक सतर्कता तंत्र कितना कमज़ोर है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के खिलाफ ईडी का मामला क्या है?
ईडी ने अलीराजपुर के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया पर पीएमएलए, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर इंदौर स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवा के दौरान ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित कर उसे वैध दिखाने की कोशिश की।
ईडी ने इस मामले में कितनी संपत्ति जब्त की है?
ईडी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत ₹18.20 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था। इनमें नकद, सोना-चांदी और अन्य अचल संपत्तियाँ शामिल हैं।
इस मामले की जांच कैसे शुरू हुई?
जांच का आधार स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (एसपीई), लोकायुक्त, इंदौर द्वारा दर्ज एफआईआर थी। यह एफआईआर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत दर्ज की गई थी।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
इंदौर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने आरोपी भदौरिया को नोटिस जारी किया है और मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। ईडी के अनुसार आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई अभी भी जारी है।
पीएमएलए के तहत दोष सिद्ध होने पर क्या सज़ा हो सकती है?
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत दोष सिद्ध होने पर न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष (कुछ मामलों में दस वर्ष तक) की कठोर कारावास की सज़ा का प्रावधान है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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