अलीराजपुर के पूर्व आबकारी अधिकारी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, ₹18.20 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में इंदौर कोर्ट पहुंचा मामला
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने अलीराजपुर के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। कोर्ट ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए आरोपी भदौरिया को नोटिस जारी कर दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित कुल संपत्ति की अनुमानित कीमत ₹18.20 करोड़ है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (एसपीई), लोकायुक्त, इंदौर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत दर्ज की गई थी। मूल आरोप यह था कि मध्य प्रदेश सरकार के आबकारी विभाग में सेवारत रहते हुए भदौरिया ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।
ईडी की जांच में क्या सामने आया
ईडी की जांच के अनुसार, धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने जानबूझकर अपराध से प्राप्त धनराशि को हासिल किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया। जांच में यह भी पाया गया कि उन्होंने इस अवैध धन को अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर महंगी चल तथा अचल संपत्तियों में निवेश किया। ये संपत्तियाँ उनकी ज्ञात वैध आय से कहीं अधिक थीं, जिन्हें पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 'अपराध से अर्जित संपत्ति' माना गया।
जब्त की गई संपत्तियाँ
ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत ₹18.20 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर पहले ही जारी कर दिया था। जब्त की गई संपत्तियों में नकद, सोना-चांदी, अचल संपत्तियाँ और अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई अन्य परिसंपत्तियाँ शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाइयों की श्रृंखला जारी है।
आगे की कार्रवाई
ईडी के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच और विधिवत कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। इंदौर की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में दायर प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। गौरतलब है कि पीएमएलए के तहत दायर शिकायतें आपराधिक मुकदमे के समान होती हैं और दोष सिद्ध होने पर कठोर सज़ा का प्रावधान है।