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ईडी की बड़ी कार्रवाई: एसबीआई के पूर्व एजीएम अनिल कुमार जैन की ₹3.01 करोड़ की संपत्ति अटैच

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: एसबीआई के पूर्व एजीएम अनिल कुमार जैन की ₹3.01 करोड़ की संपत्ति अटैच

सारांश

ईडी ने भोपाल में एसबीआई के पूर्व एजीएम अनिल कुमार जैन की ₹3.01 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट अटैच की है। जांच में आय से 481% अधिक संपत्ति, ₹2.35 करोड़ की संदिग्ध नकद जमा और एक कथित शेल कंपनी के ज़रिए धन शोधन का आरोप सामने आया है।

मुख्य बातें

ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत एसबीआई के पूर्व एजीएम अनिल कुमार जैन की ₹3.01 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट अस्थायी रूप से अटैच की।
1 अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 के बीच अर्जित संपत्ति कथित तौर पर ज्ञात वैध आय से 481% अधिक पाई गई।
जांच में ₹2.35 करोड़ की संदिग्ध नकद जमा और अतिरिक्त ₹66 लाख की बेहिसाब फिक्स्ड डिपॉजिट का खुलासा।
कथित शेल कंपनी ' एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड ' और डमी डायरेक्टर अखिलेश चौधरी के ज़रिए धन को वैध दिखाने का आरोप।
मामले की शुरुआत सीबीआई एसीबी, भोपाल की प्राथमिकी से हुई; भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत मामला दर्ज।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े एक गंभीर मामले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के लोकल हेड ऑफिस, भोपाल के पूर्व सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) अनिल कुमार जैन की कथित तौर पर अपराध से अर्जित ₹3.01 करोड़ मूल्य की चल संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), भोपाल द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर की थी। सीबीआई ने अनिल कुमार जैन के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) और धारा 13(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने अपनी ज्ञात वैध आय के स्रोतों की तुलना में असंगत रूप से अधिक संपत्ति अर्जित की।

मुख्य वित्तीय अनियमितताएँ

ईडी की जांच में सामने आया कि 1 अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 के बीच अनिल कुमार जैन ने लगभग ₹3.01 करोड़ की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी ज्ञात वैध आय से कथित तौर पर 481 प्रतिशत अधिक थी। जांचकर्ताओं के अनुसार यह असामान्य अंतर आय के अज्ञात और संदिग्ध स्रोतों की ओर इशारा करता है।

जांच के दौरान यह भी पाया गया कि अनिल कुमार जैन ने अचल संपत्ति की बिक्री का हवाला देते हुए अपने और अपने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में लगभग ₹2.35 करोड़ नकद जमा कराए। एजेंसी के अनुसार इन नकद जमाओं के समर्थन में कोई विश्वसनीय दस्तावेज़ या वैध वित्तीय स्रोत प्रस्तुत नहीं किया जा सका। यह राशि बाद में विभिन्न फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश की गई, जिससे कथित रूप से अपराध से अर्जित धन को संरक्षित और वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

इसके अतिरिक्त, लगभग ₹66 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट भी बेहिसाब संपत्ति के रूप में चिह्नित की गई, जिसका कोई संतोषजनक वित्तीय आधार प्रस्तुत नहीं हो सका।

शेल कंपनी और हवाला नेटवर्क का आरोप

जांच में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया कि अनिल कुमार जैन ने कथित तौर पर हवाला ऑपरेटरों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सहायता से अवैध आय को वैध रूप देने की योजना बनाई। उन्होंने 'एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी को अचल संपत्ति बेचने का दावा किया था। ईडी के अनुसार यह कंपनी एक कथित शेल कंपनी थी, जिसका कोई वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं था और जिसका उपयोग केवल वित्तीय लेन-देन को वैध स्वरूप देने के लिए किया गया।

एजेंसी का आरोप है कि इस कंपनी के एक कथित डमी डायरेक्टर अखिलेश चौधरी ने कथित तौर पर नकद भुगतान किया, जिसे संपत्ति बिक्री की आय के रूप में प्रदर्शित किया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन लेन-देन के पीछे वास्तविक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि अवैध धन को वैध रूप देने की सुनियोजित कोशिश थी।

ईडी की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया

उपलब्ध साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के आधार पर ईडी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत ₹3.01 करोड़ मूल्य की फिक्स्ड डिपॉजिट को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। एजेंसी का कहना है कि यह कदम संपत्तियों को छिपाने, स्थानांतरित करने या अन्यथा ठिकाने लगाने से रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। गौरतलब है कि यह अटैचमेंट अस्थायी है और मामले की आगे की सुनवाई पीएमएलए के तहत सक्षम न्यायाधिकरण के समक्ष होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि आंतरिक बैंकिंग ऑडिट तंत्र इतने वर्षों तक इसे क्यों नहीं पकड़ पाया। ईडी की यह कार्रवाई अभी अस्थायी अटैचमेंट तक सीमित है; दोष सिद्धि और वसूली की राह लंबी है। सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि ऐसे मामलों में संस्थागत जवाबदेही भी तय हो, केवल व्यक्तिगत नहीं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने अनिल कुमार जैन की संपत्ति क्यों अटैच की?
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत अनिल कुमार जैन की ₹3.01 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट इसलिए अटैच की क्योंकि जांच में यह संपत्ति कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय पाई गई। जांच के अनुसार यह संपत्ति उनकी ज्ञात वैध आय से 481% अधिक थी और इसे वित्तीय माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया था।
इस मामले में सीबीआई की क्या भूमिका है?
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), भोपाल ने अनिल कुमार जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। ईडी ने इसी प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड का इस मामले से क्या संबंध है?
ईडी के अनुसार अनिल कुमार जैन ने इस कंपनी को अचल संपत्ति बेचने का दावा करके नकद राशि प्राप्त की और उसे वैध आय के रूप में दिखाया। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह एक कथित शेल कंपनी थी जिसका कोई वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं था और इसका उपयोग केवल धन शोधन के लिए किया गया।
अटैच की गई संपत्ति में क्या-क्या शामिल है?
अटैच की गई ₹3.01 करोड़ की संपत्ति में मुख्य रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। इनमें ₹2.35 करोड़ की संदिग्ध नकद जमा से बनाई गई एफडी और लगभग ₹66 लाख की अतिरिक्त बेहिसाब फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं।
क्या यह अटैचमेंट स्थायी है और आगे क्या होगा?
फिलहाल यह अटैचमेंट अस्थायी है, जो पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत की गई है। मामले की आगे की सुनवाई पीएमएलए के तहत सक्षम न्यायाधिकरण के समक्ष होगी, जहाँ स्थायी जब्ती या संपत्ति की वापसी पर निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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