ईडी का पूर्व विधायक दीप नारायण यादव पर शिकंजा: झांसी-लखनऊ में 11 ठिकानों पर छापे, ₹23 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 9 जुलाई 2025 को बड़ी कार्रवाई करते हुए झांसी, लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई। यादव झांसी के गरौठा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक हैं।
जांच की पृष्ठभूमि
ईडी ने इस मामले में जांच उत्तर प्रदेश सरकार के विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि दीप नारायण यादव ने जांच की अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक, कथित तौर पर ₹23.02 करोड़ की बेहिसाब संपत्ति अर्जित की। ईडी के इलाहाबाद सब-जोनल ऑफिस ने इस तलाशी अभियान को अंजाम दिया।
गौरतलब है कि जांच में यह भी सामने आया है कि यादव के खिलाफ झांसी और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के पुलिस थानों में 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें डकैती, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, गैर-इरादतन हत्या की कोशिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे संगीन आरोप शामिल हैं — इनमें से कई पीएमएलए के तहत 'अनुसूचित अपराध' की श्रेणी में आते हैं।
अपराध से कमाई को वैध दिखाने का जाल
एफआईआर और चार्जशीट के अनुसार, यादव ने आपराधिक गतिविधियों और अपने राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करके अवैध कमाई की। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि उन्होंने इस कमाई को छिपाने और उसे वैध संपत्ति के रूप में प्रदर्शित करने के लिए कंपनियों का एक जटिल नेटवर्क बनाया, जिसमें फर्जी कंपनियाँ भी शामिल थीं।
अधिकारियों के अनुसार, यादव ने अपने परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नियंत्रण वाली व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से इस अवैध धन को वैध रूप देने की कोशिश की। अपराध से अर्जित धन का उपयोग करके सहयोगियों और दूरस्थ परिवार के सदस्यों के नाम पर चल और अचल संपत्तियाँ खरीदी गईं और उन्हें वैध दिखाया गया।
तलाशी में मिले अहम दस्तावेज़
ईडी को तलाशी के दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड मिले। इनमें कंपनियों के बीच लेन-देन के रिकॉर्ड, तीसरे पक्ष के साथ संदिग्ध समझौते, विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं और परिवार के सदस्यों के नाम पर महंगी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
जांच में ऐसी कंपनियाँ भी सामने आई हैं जो केवल कागजों पर मौजूद थीं और वास्तव में कोई कारोबार नहीं कर रही थीं। संदिग्ध बेनामी अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और अपराध से अर्जित धन को कई परतों में घुमाकर छिपाने के रिकॉर्ड भी बरामद कर जब्त किए गए हैं।
आगे क्या होगा
ईडी द्वारा जब्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच जारी है। पीएमएलए के तहत जांच में आगे संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला उत्तर प्रदेश में राजनीतिक-आपराधिक गठजोड़ और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।