10 अगस्त 2026
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ईडी की बड़ी कार्रवाई: महेश टिम्बर मनी लॉन्ड्रिंग केस में तीन राज्यों के 11 ठिकानों पर छापे, ₹155 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: महेश टिम्बर मनी लॉन्ड्रिंग केस में तीन राज्यों के 11 ठिकानों पर छापे, ₹155 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप

सारांश

ईडी ने महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन राज्यों में एक साथ 11 ठिकानों पर छापे मारे। नकली लकड़ी आयात और फर्जी एफएलसी के ज़रिए ₹155.21 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। जब्त दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ जांच आगे बढ़ रही है।

मुख्य बातें

ईडी की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने 17 जून 2025 को करनाल, दिल्ली और गोवा में 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसने नकली एफएलसी के ज़रिए ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को ₹155.21 करोड़ का नुकसान पहुँचाया।
जांच में सामने आया कि बिना वास्तविक लकड़ी आयात के ₹195.02 करोड़ की राशि कथित तौर पर धोखाधड़ी से स्थानांतरित की गई।
अशोक कुमार मित्तल, रमन सिंघल, सौरभ ढींगरा, भरत भूषण मित्तल और दीपक सिंगला की भूमिका जांच में प्रमुखता से उभरी है।
सौरभ ढींगरा के परिसर से बिक्री विलेख समझौते और आपत्तिजनक दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।
सिंगापुर स्थित शिपिंग कंपनियों के ज़रिए नकली आयात का भ्रम पैदा कर बैंकों को ठगने का कथित षड्यंत्र रचा गया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने 17 जून 2025 को महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत करनाल, दिल्ली और गोवा में एक साथ 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में अशोक मित्तल, सौरभ ढींगरा, भरत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य आरोपियों से जुड़े परिसरों को खंगाला गया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशकों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। मामले के केंद्र में यह आरोप है कि 'फिनाकल' प्रणाली में संबंधित प्रविष्टियाँ किए बिना अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों के ज़रिए विदेशी साख पत्रों (एफएलसी) की मूल्य राशि को धोखाधड़ी से बढ़ाया गया, जिससे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और कंसोर्टियम बैंकों को कथित तौर पर लगभग ₹155.21 करोड़ का नुकसान पहुँचा।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई कथित धोखाधड़ी

जांच में सामने आया है कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड ने भारत और सिंगापुर में स्थित सहयोगी कंपनियों और व्यक्तियों के साथ मिलकर हेरफेर किए गए एफएलसी के माध्यम से लगभग ₹195.02 करोड़ की राशि को कथित तौर पर धोखाधड़ी से स्थानांतरित किया। सीमा शुल्क अधिकारियों की जांच में यह भी स्थापित हुआ कि बैंकों को सौंपे गए बड़ी संख्या में 'बिल ऑफ एंट्री' और 'बिल ऑफ लैडिंग' दस्तावेज नकली और मनगढ़ंत थे।

गौरतलब है कि इस पूरे षड्यंत्र में अमेजन एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, महेश टिम्बर सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड, ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बीवीएम शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड और पर्ल मैरीटाइम प्राइवेट लिमिटेड जैसी शिपिंग कंपनियों का कथित तौर पर उपयोग किया गया। इनका इस्तेमाल सिंगापुर से भारत में लकड़ी के नकली आयात का भ्रम उत्पन्न करने के लिए किया गया, ताकि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को धोखा देकर सिंगापुर में एफएलसी की बढ़ी हुई राशि को खोला और स्थानांतरित किया जा सके।

आरोपियों की भूमिका

जांच के दौरान दीपक सिंगला, अशोक कुमार मित्तल और रमन सिंघल की भूमिका प्रमुखता से उभरी है। अशोक कुमार मित्तल और रमन सिंघल ने महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड और महेश रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक व मुख्य प्रबंधकीय पदों पर कार्य किया था। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अवधि में इन कंपनियों ने बिना किसी वास्तविक आयात के ही लकड़ी की कथित खरीद-बिक्री से जुड़े फर्जी लेन-देन किए। इसके अलावा, सौरभ ढींगरा, भरत भूषण मित्तल और अन्य की सहायता से अपराध से अर्जित धन की रूटिंग और लेयरिंग का भी पता चला है।

छापेमारी में क्या मिला

तलाशी अभियान के दौरान सौरभ ढींगरा के परिसर से बिक्री विलेख समझौते बरामद किए गए। इसके साथ ही पीएमएलए की संबंधित धाराओं के तहत आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

आगे की जांच

ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के साथ धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की कमाई का पूरी तरह पता लगाने के लिए ईडी की जांच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बैंकिंग धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बैंकिंग प्रणाली में स्विफ्ट-आधारित हेरफेर की उस गहरी खामी को उजागर करता है जिसका फायदा पहले भी नीरव मोदी जैसे मामलों में उठाया जा चुका है। ₹155 करोड़ की यह धोखाधड़ी सिंगापुर-भारत व्यापार मार्ग का दुरुपयोग कर अंजाम दी गई — जो दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार वित्त में निगरानी तंत्र अभी भी पर्याप्त नहीं है। असली सवाल यह है कि 'बिल ऑफ लैडिंग' और 'बिल ऑफ एंट्री' जैसे बुनियादी दस्तावेजों की जाँच में बैंकों की चूक कैसे हुई, और इसके लिए जवाबदेही कब तय होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
यह मामला महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े व्यक्तियों पर नकली लकड़ी आयात दस्तावेजों और अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों के ज़रिए विदेशी साख पत्रों (एफएलसी) की मूल्य राशि बढ़ाकर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को ₹155.21 करोड़ का नुकसान पहुँचाने का है। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की।
ईडी ने 17 जून को किन-किन जगहों पर छापेमारी की?
ईडी ने 17 जून 2025 को करनाल, दिल्ली और गोवा में कुल 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। ये परिसर अशोक मित्तल, सौरभ ढींगरा, भरत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य आरोपियों से जुड़े थे।
इस धोखाधड़ी में सिंगापुर की कंपनियों की क्या भूमिका थी?
जांच के अनुसार, अमेजन एक्सपोर्ट्स पीटीई लिमिटेड और महेश टिम्बर सिंगापुर पीटीई लिमिटेड सहित कई शिपिंग कंपनियों का उपयोग सिंगापुर से भारत में लकड़ी के नकली आयात का भ्रम पैदा करने के लिए किया गया। इन कंपनियों ने बिना किसी वास्तविक आयात के फर्जी लेन-देन किए, जिससे बैंकों को धोखा देकर एफएलसी की बढ़ी हुई राशि स्थानांतरित की जा सके।
छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
तलाशी के दौरान सौरभ ढींगरा के परिसर से बिक्री विलेख समझौते बरामद हुए। इसके अलावा पीएमएलए की संबंधित धाराओं के तहत आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि अपराध से अर्जित कमाई का पूरी तरह पता लगाने के लिए जांच जारी है। जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विश्लेषण के बाद गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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