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ईडी की बड़ी कार्रवाई: सूरत में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹1.15 करोड़ की 15 संपत्तियाँ जब्त

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ईडी की बड़ी कार्रवाई: सूरत में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹1.15 करोड़ की 15 संपत्तियाँ जब्त

सारांश

ईडी ने एक पूर्व सरकारी कर्मचारी के खिलाफ PMLA के तहत गुजरात और पुणे में ₹1.15 करोड़ की 15 संपत्तियाँ जब्त कीं। साथ ही आंध्र प्रदेश में सीबीआई अदालत ने एक पूर्व पोस्टमास्टर को ₹47.95 लाख के गबन में 5 साल की सजा सुनाई — एक ही दिन केंद्रीय एजेंसियों की दोहरी कार्रवाई।

मुख्य बातें

ईडी ने 22 सितंबर 2026 को PMLA, 2002 की धारा 5(1) के तहत 15 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं।
जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य ₹1,14,98,600 है, जो गुजरात के महुआ, तलाजा, ओढव, साबरमती और पुणे के हडपसर में स्थित हैं।
आरोपी वालिया शिबाभाई जुंजाभाई उर्फ भूपतभाई , GLDC भरूच के पूर्व फील्ड असिस्टेंट, ने ज्ञात आय से अधिक ₹1,15,18,350 की संपत्ति अर्जित की।
मूल मामला एसीबी पुलिस स्टेशन, भावनगर की एफआईआर और चार्जशीट पर आधारित है।
सीबीआई अदालत, विशाखापत्तनम ने पूर्व सब पोस्टमास्टर दमालापति वेणु गोपाल नायडू को ₹47,95,000 के गबन में 5 वर्ष की जेल और ₹7,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूरत सब-जोनल ऑफिस ने सोमवार, 22 सितंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गुजरात और महाराष्ट्र में फैली 15 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹1.15 करोड़ है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है। आरोपी की पहचान गुजरात लैंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GLDC), भरूच के पूर्व फील्ड असिस्टेंट वालिया शिबाभाई जुंजाभाई उर्फ भूपतभाई के रूप में हुई है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी की जाँच एसीबी पुलिस स्टेशन, भावनगर द्वारा दर्ज एफआईआर और विशेष (एसीबी) कोर्ट, भावनगर में दायर चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। यह मूल मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत दर्ज था। जाँच में यह उजागर हुआ कि आरोपी ने सरकारी कर्मचारी के रूप में अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक — कथित तौर पर ₹1,15,18,350 की — संपत्ति अर्जित की थी।

जब्त संपत्तियों का विवरण

ईडी ने जिन 15 अचल संपत्तियों को जब्त किया, वे गुजरात और महाराष्ट्र के कई स्थानों पर फैली हैं — महुआ और तलाजा (भावनगर जिला), ओढव और साबरमती (अहमदाबाद), तथा हडपसर, पुणे (महाराष्ट्र)। जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य ₹1,14,98,600 आँका गया है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई PMLA के तहत एक अस्थायी कुर्की है और आगे की जाँच अभी भी जारी है।

आंध्र प्रदेश में सीबीआई की अलग कार्रवाई

इसी बीच, विशाखापत्तनम की केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) अदालत ने धोखाधड़ी के एक अलग मामले में दमालापति वेणु गोपाल नायडू को दोषी ठहराया और उन्हें पाँच वर्ष के कारावास तथा ₹7,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। नायडू आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम डिवीजन के अमादलावलसा एचपीओ के अंतर्गत कोत्तुरु सब पोस्ट ऑफिस में पूर्व सब पोस्ट मास्टर (लोअर सिलेक्शन ग्रेड) थे।

सीबीआई के अनुसार, 21 फरवरी 2019 से 24 अगस्त 2019 के दौरान आरोपी नायडू ने बेईमानी और धोखाधड़ी से अपने अधिकार क्षेत्र के सरकारी कोष से ₹47,95,000 निकालकर उनका गबन किया। सीबीआई ने इस मामले को 6 मार्च 2020 को दर्ज किया था।

आम जनता और प्रशासन पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ सरकारी कर्मचारियों द्वारा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सक्रियता बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि PMLA के तहत संपत्ति कुर्की भ्रष्टाचार के मामलों में एक प्रभावी निवारक उपाय है, क्योंकि इससे अपराध से अर्जित संपत्ति को वापस सरकारी खजाने में लाने की प्रक्रिया तेज होती है।

आगे की जाँच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि सूरत के मामले में जाँच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अस्थायी कुर्की के बाद मामला PMLA के तहत न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा, जहाँ कुर्की की पुष्टि या खारिज की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका महत्व संदेश में है — PMLA का इस्तेमाल अब निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों तक भी हो रहा है, न केवल हाई-प्रोफाइल मामलों में। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के मूल मामले में ACB और विशेष अदालत पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है — ईडी की कार्रवाई उसी आधार पर वित्तीय जाँच की एक परत जोड़ती है। असली सवाल यह है कि अस्थायी कुर्की के बाद न्यायिक पुष्टि और अंतिम वसूली में कितना समय लगता है, क्योंकि इस प्रकार के मामलों में कानूनी प्रक्रिया वर्षों तक खिंच सकती है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने सूरत मनी लॉन्ड्रिंग मामले में क्या कार्रवाई की?
ईडी के सूरत सब-जोनल ऑफिस ने PMLA, 2002 की धारा 5(1) के तहत 15 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं, जिनका कुल मूल्य ₹1,14,98,600 है। ये संपत्तियाँ गुजरात के महुआ, तलाजा, ओढव, साबरमती और महाराष्ट्र के पुणे के हडपसर में स्थित हैं।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है और उस पर क्या आरोप हैं?
मुख्य आरोपी वालिया शिबाभाई जुंजाभाई उर्फ भूपतभाई हैं, जो GLDC भरूच के पूर्व फील्ड असिस्टेंट थे। उन पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 के तहत अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक — ₹1,15,18,350 की — संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
ईडी की जाँच का आधार क्या था?
ईडी की जाँच एसीबी पुलिस स्टेशन, भावनगर द्वारा दर्ज एफआईआर और विशेष (एसीबी) कोर्ट, भावनगर में दायर चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। इस आधार पर ईडी ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच प्रारंभ की।
आंध्र प्रदेश में सीबीआई अदालत ने किसे दोषी ठहराया और क्या सजा दी?
विशाखापत्तनम की सीबीआई अदालत ने पूर्व सब पोस्टमास्टर दमालापति वेणु गोपाल नायडू को दोषी ठहराया और 5 वर्ष के कारावास तथा ₹7,000 जुर्माने की सजा सुनाई। नायडू पर 21 फरवरी 2019 से 24 अगस्त 2019 के बीच सरकारी कोष से ₹47,95,000 के गबन का आरोप था।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि सूरत मामले में जाँच अभी जारी है। अस्थायी कुर्की के बाद PMLA के तहत न्यायिक प्रक्रिया में मामला आगे बढ़ेगा, जहाँ सक्षम अदालत कुर्की की पुष्टि या खारिज करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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