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ईडी ने कॉनकास्ट स्टील मामले में ₹31.30 करोड़ की 20 संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल जब्ती ₹777 करोड़ पार

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ईडी ने कॉनकास्ट स्टील मामले में ₹31.30 करोड़ की 20 संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल जब्ती ₹777 करोड़ पार

सारांश

ईडी ने कॉनकास्ट स्टील एंड पावर मामले में ₹31.30 करोड़ की 20 और संपत्तियाँ जब्त कर कुल जब्ती ₹777.1 करोड़ पहुँचाई। साथ ही 63 नए आरोपियों के विरुद्ध दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की गई — यह मामला ₹6,210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2 जुलाई 2026 को ₹31.30 करोड़ मूल्य की 20 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कीं।
जब्त संपत्तियाँ पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में स्थित हैं।
इस मामले में अब तक कुल जब्त संपत्तियों का बाज़ार मूल्य ₹777.1 करोड़ हो गया है।
ईडी ने कोलकाता की विशेष PMLA अदालत में 63 नए आरोपियों के विरुद्ध दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की।
मूल एफआईआर में CSPL पर बैंकों से धोखाधड़ी से ऋण लेकर ₹6,210.72 करोड़ का नुकसान पहुँचाने का आरोप है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने 2 जुलाई 2026 को कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड (CSPL) और अन्य के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ताज़ा कार्रवाई करते हुए ₹31.30 करोड़ के बाज़ार मूल्य वाली 20 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त कर लीं। इस मामले में अब तक कुल जब्त संपत्तियों का बाज़ार मूल्य ₹777.1 करोड़ तक पहुँच गया है।

जब्त संपत्तियों का विवरण

जब्त की गई 20 अचल संपत्तियों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में स्थित आवासीय संपत्तियाँ, व्यावसायिक इकाइयाँ, फ्लैट और भूखंड शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, ये संपत्तियाँ संजय कुमार सुरेका के स्वामित्व और नियंत्रण में थीं तथा अपराध की आय को छिपाने के उद्देश्य से उनके स्वयं के नाम पर अथवा उनके रिश्तेदारों, कर्मचारियों, सहयोगियों और फर्जी कंपनियों के नाम पर रखी गई थीं।

दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर

संपत्ति जब्ती के साथ-साथ ईडी ने कोलकाता की विशेष अदालत (PMLA) में CSPL और अन्य के विरुद्ध चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के संबंध में दूसरी पूरक अभियोग शिकायत भी दायर की है। इस शिकायत में 63 नए आरोपियों को नामज़द किया गया है, जिनमें व्यक्ति, कंपनियाँ, एलएलपी, साझेदारी फर्म और प्रोप्राइटरी फर्म शामिल हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार, ये सभी अपराध की आय की लॉन्ड्रिंग में जानबूझकर शामिल पाए गए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि: ₹6,210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी

ईडी की यह जाँच सीबीआई, बीएसएफबी, कोलकाता द्वारा संजय कुमार सुरेका और अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर पर आधारित है। एफआईआर में आरोप है कि मेसर्स कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड ने अपने प्रवर्तकों और निदेशकों के साथ मिलकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए स्टॉक विवरण, हेरफेर किए गए वित्तीय विवरण और मनगढ़ंत रिकॉर्ड प्रस्तुत करके बैंकों के एक संघ से धोखाधड़ी से ऋण प्राप्त किया। इसके बाद ऋण राशि का गबन किया गया, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कथित तौर पर लगभग ₹6,210.72 करोड़ (ब्याज को छोड़कर) का नुकसान हुआ।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब ईडी देशभर में बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में आक्रामक रूप से PMLA के तहत कार्रवाई कर रही है। गौरतलब है कि CSPL मामले में जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य अब ₹777.1 करोड़ पार कर चुका है, जो इस मामले की व्यापकता को दर्शाता है। 63 नए आरोपियों का जुड़ना संकेत देता है कि जाँच का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।

आगे की कार्रवाई

विशेष PMLA अदालत में दायर दूसरी पूरक अभियोग शिकायत पर अब न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले में आरोपित संस्थाओं और व्यक्तियों की संख्या में यह वृद्धि न्यायालय में सुनवाई को और जटिल बना सकती है। ईडी की जाँच जारी रहने के संकेत हैं और आने वाले समय में और कार्रवाइयाँ संभव मानी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यापक वित्तीय जाल है जिसमें फर्जी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियाँ छिपाई गईं। असली सवाल यह है कि ₹6,210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी इतने वर्षों तक बैंकिंग निगरानी तंत्र की नज़र से कैसे बची रही। जब तक बैंकिंग प्रणाली में ऋण वितरण की आंतरिक जाँच प्रक्रिया मज़बूत नहीं होती, ऐसे मामलों में ईडी की कार्रवाई केवल 'बाद की सफाई' बनकर रह जाती है — रोकथाम नहीं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने PMLA, 2002 के तहत ₹31.30 करोड़ मूल्य की 20 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं और कोलकाता की विशेष PMLA अदालत में 63 नए आरोपियों के विरुद्ध दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की है। इस मामले में अब तक कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य ₹777.1 करोड़ है।
संजय कुमार सुरेका कौन हैं और उनकी क्या भूमिका है?
संजय कुमार सुरेका कॉनकास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड से जुड़े प्रमुख आरोपी हैं। ईडी के अनुसार, जब्त संपत्तियाँ उनके स्वामित्व और नियंत्रण में थीं तथा अपराध की आय को छिपाने के लिए उनके रिश्तेदारों, कर्मचारियों और फर्जी कंपनियों के नाम पर रखी गई थीं।
कॉनकास्ट स्टील मामले में बैंकों को कितना नुकसान हुआ?
एफआईआर के अनुसार, CSPL ने हेरफेर किए गए वित्तीय विवरण और फर्जी रिकॉर्ड के ज़रिए बैंकों के एक संघ से धोखाधड़ी से ऋण प्राप्त किया, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को कथित तौर पर ₹6,210.72 करोड़ (ब्याज को छोड़कर) का नुकसान हुआ।
दूसरी पूरक अभियोग शिकायत में कितने और किस तरह के आरोपी शामिल हैं?
दूसरी पूरक अभियोग शिकायत में 63 अतिरिक्त आरोपियों को नामज़द किया गया है। इनमें व्यक्ति, कंपनियाँ, एलएलपी, साझेदारी फर्म और प्रोप्राइटरी फर्म शामिल हैं, जो अपराध की आय की लॉन्ड्रिंग में जानबूझकर शामिल पाए गए हैं।
जब्त की गई संपत्तियाँ किन राज्यों में हैं?
जब्त की गई 20 अचल संपत्तियाँ पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में स्थित हैं। इनमें आवासीय संपत्तियाँ, व्यावसायिक इकाइयाँ, फ्लैट और भूखंड शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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