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सुप्रीम कोर्ट का एयरलाइंस पर कड़ा रुख: त्योहारी सीजन में मनमाने किराए पर बोला — नियम न मानें तो उड़ान बंद करो

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सुप्रीम कोर्ट का एयरलाइंस पर कड़ा रुख: त्योहारी सीजन में मनमाने किराए पर बोला — नियम न मानें तो उड़ान बंद करो

सारांश

त्योहारों में हवाई किराए की मनमानी पर सर्वोच्च न्यायालय ने एयरलाइंस को कड़ी चेतावनी दी — नियम न मानें तो उड़ान बंद। सरकार ने तीन हफ्ते में नियम लाने का वादा किया; अगली सुनवाई 7 सितंबर को।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अगस्त को त्योहारी सीजन में हवाई किराए की मनमानी पर एयरलाइंस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा — नियम न मानें तो उड़ान रोक दो।
एएसजी अनिल कौशिक ने बताया कि किराया नियम तीन सप्ताह में अंतिम रूप पाएंगे और न्यायालय के सामने रखे जाएंगे।
मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित।
लक्ष्मीनारायणन ने स्वतंत्र नियामक संस्था के गठन की माँग की है।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा था कि किराए पर कैपिंग संभव नहीं — याचिकाकर्ता ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 17 अगस्त को त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी के मामले में एयरलाइंस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनकी उड़ानें रोकी जाएं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह भी कहा कि यात्रियों के हित में बनाई गई व्यवस्थाओं के पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर निजी एयरलाइंस पर हवाई किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि निजी एयरलाइंस न केवल अनुचित तरीके से किराया निर्धारित करती हैं, बल्कि यात्रियों पर कई अतिरिक्त शुल्क भी थोपती हैं। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में स्पष्ट नियम बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था के गठन की माँग की है।

सरकार की स्थिति

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने पीठ को बताया कि हवाई किराए और शुल्क से संबंधित नियम बनाने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को पूरा होने में तीन सप्ताह का समय लगेगा और अंतिम रूप दिए गए नियमों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। न्यायालय ने यह दलील स्वीकार कर ली और अगली सुनवाई 7 सितंबर के लिए निर्धारित कर दी।

याचिकाकर्ता की आपत्ति

याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष यह भी उठाया कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में स्वयं कहा है कि सरकार हवाई किराए पर कोई कैपिंग नहीं लगा सकती और इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

न्यायालय का पहले का रुख

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में भी सर्वोच्च न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस की मनमानी यात्रियों का शोषण है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देश में त्योहारी सीजन के दौरान हवाई किराए कई गुना बढ़ जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, जब सरकार अंतिम रूप दिए गए किराया नियमों को न्यायालय के सामने रखेगी। यदि तब तक नियम तैयार नहीं हुए या न्यायालय उन्हें अपर्याप्त पाता है, तो एयरलाइंस पर और कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे केवल कागजी खानापूर्ति होंगे या यात्रियों को वास्तविक राहत देंगे। भारत में हवाई यात्रा का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, लेकिन किराया नियमन की अनुपस्थिति में मध्यवर्गीय यात्री हर त्योहार पर एयरलाइंस की मनमर्जी का शिकार बनता है। न्यायालय की सक्रियता स्वागत योग्य है, पर बिना स्वतंत्र नियामक के, यह दबाव टिकाऊ नहीं होगा।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस को क्या चेतावनी दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अगस्त को स्पष्ट कहा कि यदि एयरलाइंस यात्री-हित के नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनकी उड़ानें रोकी जाएं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह भी कहा कि नियमन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
हवाई किराए पर नए नियम कब तक आएंगे?
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने न्यायालय को बताया कि हवाई किराए और शुल्क से जुड़े नियम तीन सप्ताह में अंतिम रूप पाएंगे। इन्हें 7 सितंबर की अगली सुनवाई में न्यायालय के सामने रखा जाएगा।
यह याचिका किसने और क्यों दाखिल की?
सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने यह याचिका दाखिल की है। उनका आरोप है कि निजी एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराया तय करती हैं और अतिरिक्त शुल्क लगाती हैं। उन्होंने एक स्वतंत्र नियामक संस्था के गठन की माँग की है।
केंद्र सरकार का हवाई किराए पर क्या रुख है?
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा था कि सरकार हवाई किराए पर कोई कैपिंग नहीं लगा सकती। हालांकि, अब सरकार ने न्यायालय को आश्वासन दिया है कि किराया नियमन के नियम तीन सप्ताह में तैयार होंगे।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का पहले क्या रुख रहा है?
पिछली सुनवाई में भी सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि एयरलाइंस की किराया-मनमानी यात्रियों का शोषण है और सरकार को राहत के लिए कदम उठाने चाहिए। यह न्यायालय की इस मुद्दे पर लगातार सख्त होती स्थिति को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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