सुप्रीम कोर्ट का एयरलाइंस पर कड़ा रुख: त्योहारी सीजन में मनमाने किराए पर बोला — नियम न मानें तो उड़ान बंद करो
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 17 अगस्त को त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी के मामले में एयरलाइंस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनकी उड़ानें रोकी जाएं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह भी कहा कि यात्रियों के हित में बनाई गई व्यवस्थाओं के पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर निजी एयरलाइंस पर हवाई किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि निजी एयरलाइंस न केवल अनुचित तरीके से किराया निर्धारित करती हैं, बल्कि यात्रियों पर कई अतिरिक्त शुल्क भी थोपती हैं। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में स्पष्ट नियम बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था के गठन की माँग की है।
सरकार की स्थिति
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने पीठ को बताया कि हवाई किराए और शुल्क से संबंधित नियम बनाने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को पूरा होने में तीन सप्ताह का समय लगेगा और अंतिम रूप दिए गए नियमों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। न्यायालय ने यह दलील स्वीकार कर ली और अगली सुनवाई 7 सितंबर के लिए निर्धारित कर दी।
याचिकाकर्ता की आपत्ति
याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष यह भी उठाया कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में स्वयं कहा है कि सरकार हवाई किराए पर कोई कैपिंग नहीं लगा सकती और इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
न्यायालय का पहले का रुख
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में भी सर्वोच्च न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस की मनमानी यात्रियों का शोषण है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देश में त्योहारी सीजन के दौरान हवाई किराए कई गुना बढ़ जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, जब सरकार अंतिम रूप दिए गए किराया नियमों को न्यायालय के सामने रखेगी। यदि तब तक नियम तैयार नहीं हुए या न्यायालय उन्हें अपर्याप्त पाता है, तो एयरलाइंस पर और कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।