हवाई किराये में 300% उछाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, DGCA से जवाब-तलब; अगली सुनवाई 13 जुलाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 15 मई 2025 को निजी एयरलाइंस द्वारा त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई किराये में अचानक भारी बढ़ोतरी और अतिरिक्त शुल्कों पर अंकुश लगाने के लिए नियामक दिशानिर्देश बनाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के जवाब पर याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की।
न्यायमूर्ति का सवाल: एक रूट पर ₹8,000 से ₹18,000 तक का किराया क्यों?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने सुनवाई के दौरान एयरलाइंस के बीच किराये की भारी असमानता पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ही रूट पर एक एयरलाइन इकॉनमी क्लास का टिकट ₹8,000 में देती है, जबकि दूसरी उसी रूट के लिए ₹18,000 तक वसूलती है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मूल्य असमानता को लेकर कोई तर्कसंगत व्यवस्था होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि मौजूदा परिस्थितियों में हवाई किराये में 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका सीधा बोझ आम यात्रियों पर पड़ रहा है। यह भी आरोप लगाया गया कि नियम मौजूद होने के बावजूद DGCA अपने अधिकारों का प्रभावी उपयोग नहीं कर रहा, जो नियमों के अनुपालन में गंभीर चूक को दर्शाता है।
केंद्र सरकार का पक्ष: नए नियम बनाने की प्रक्रिया जारी
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत की चिंताओं से सहमति जताते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान वैधानिक नियमों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने बताया कि 2024 के भारतीय वायुयान अधिनियम के लागू होने के बाद उसी के तहत नए नियम तैयार किए जा रहे हैं। फिलहाल परामर्श प्रक्रिया जारी है और सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है, इसलिए नियम बनने में कुछ समय और लगेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तब तक पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
अंतरिम राहत से इनकार, लेकिन नियामक ढाँचे पर दबाव
अदालत ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, केंद्र सरकार से नए नियम बनाने की समयसीमा पर स्पष्टीकरण माँगा गया। यह ऐसे समय में आया है जब गर्मियों की छुट्टियों और आगामी त्योहारी सीज़न के चलते हवाई किराये में उछाल की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
गौरतलब है कि हवाई किराये की अनियमितता कोई नई समस्या नहीं है — पिछले कई वर्षों से उपभोक्ता संगठन और सांसद इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, लेकिन नियामक स्तर पर ठोस कार्रवाई अब तक सीमित रही है।
अदालत की हल्की-फुल्की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने हल्के अंदाज़ में यह भी कहा कि वकीलों की फीस भी कई बार 400 प्रतिशत तक बढ़ जाती है — इस पर क्या किया जाए। इस टिप्पणी ने अदालत कक्ष में हास्य का माहौल बनाया, लेकिन किराये की असमानता पर मूल सवाल बरकरार रहा।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी, जिसमें याचिकाकर्ता का प्रत्युत्तर और केंद्र सरकार की नियम-निर्माण प्रक्रिया की प्रगति पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 के भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत बनने वाले नए नियम यदि किराये की ऊपरी सीमा या पारदर्शिता की अनिवार्यता तय करते हैं, तो यह भारतीय विमानन क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव होगा।