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गुजरात पुलिस की ई-जीरो एफआईआर: 1930 पर कॉल करें, घर बैठे दर्ज हो साइबर फ्रॉड की शिकायत

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गुजरात पुलिस की ई-जीरो एफआईआर: 1930 पर कॉल करें, घर बैठे दर्ज हो साइबर फ्रॉड की शिकायत

सारांश

गुजरात पुलिस ने साइबर फ्रॉड पीड़ितों के लिए 1930 हेल्पलाइन पर ई-जीरो एफआईआर की सुविधा शुरू की है — थाने के चक्कर नहीं, घर से शिकायत और तुरंत जाँच। एक मामले में पीड़ित को ₹2.30 करोड़ में से ₹1.63 करोड़ वापस मिले। गोल्डन ऑवर में कार्रवाई से रिकवरी की संभावना कई गुना बढ़ती है।

मुख्य बातें

गुजरात पुलिस ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के ज़रिए साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड ई-जीरो एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में यह पहल लागू की गई है।
₹10 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के सभी मामलों में सीधे ऑनलाइन ई-एफआईआर दर्ज होगी।
एक पीड़ित के खाते से गए ₹2 करोड़ 30 लाख में से ₹1 करोड़ 63 लाख की रिकवरी की गई।
आईजीपी (साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) बिपिन अहिरे के अनुसार एफआईआर के बाद पुलिस तुरंत बैंक से समन्वय कर कार्रवाई शुरू करती है।
साइबर विशेषज्ञ एसपी संजय केशवाला ने नागरिकों को फ्रॉड होते ही बिना देरी किए 1930 डायल करने की सलाह दी।

गुजरात पुलिस की साइबर सेल ने राज्य में बढ़ते साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से 'साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड ई-जीरो एफआईआर' दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल पीड़ितों को थाने के चक्कर लगाए बिना घर से ही एफआईआर दर्ज कराने की सुविधा देती है।

क्या है ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था

इस नई प्रणाली के तहत ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलते ही ई-जीरो एफआईआर स्वतः रजिस्टर होती है और तत्काल संबंधित थाने अथवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दी जाती है। इसके बाद पुलिस की टीम पीड़ित से सीधे संपर्क करती है और संबंधित बैंक के साथ समन्वय कर जाँच शुरू कर देती है।

गौरतलब है कि ₹10 लाख से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की सभी शिकायतों के लिए सीधे ऑनलाइन ई-एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था की गई है। साइबर विशेषज्ञ एवं एसपी संजय केशवाला ने कहा, 'जब भी आपको लगे कि आपके साथ कोई फाइनेंशियल फ्रॉड हुआ है या साइबर फ्रॉड हुआ है तो तुरंत बिना चूके 1930 नंबर जरूर डायल करें।'

गोल्डन ऑवर की अहमियत

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में गोल्डन ऑवर — यानी फ्रॉड के शुरुआती घंटे — सबसे अहम होते हैं। इसी समय में यदि शिकायत दर्ज हो और बैंक को सतर्क किया जाए, तो लूटी गई रकम की रिकवरी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ई-जीरो एफआईआर की तत्काल प्रक्रिया इसी सिद्धांत पर आधारित है।

गांधीनगर के आईजीपी (साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) बिपिन अहिरे ने बताया, 'जीरो एफआईआर रजिस्टर होने के बाद लोकल पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के पास एफआईआर पहुँच जाती है, जहाँ पुलिस की टीम पीड़ित को कॉल करती है और आगे की कार्रवाई के लिए सारी जानकारी लेती है, फिर जाँच टीम तुरंत बैंक से समन्वय करके जल्द से जल्द कार्रवाई करती है।'

पीड़ितों को मिला इंसाफ: एक मामला

इस व्यवस्था की सफलता का एक उदाहरण सामने आया है जिसमें एक साइबर फ्रॉड पीड़ित के बैंक खाते से ₹2 करोड़ 30 लाख अन्य खातों में ट्रांसफर हो गए थे। पीड़ित ने 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और गुजरात पुलिस की साइबर सेल की मदद से उन्हें ₹1 करोड़ 63 लाख की रकम वापस मिली। यह मामला इस पहल की व्यावहारिक प्रभावशीलता को रेखांकित करता है।

पीड़ितों और समाज पर असर

इस व्यवस्था से पीड़ितों को दोहरी राहत मिली है — न केवल थाने के चक्कर लगाने से मुक्ति, बल्कि त्वरित कार्रवाई से रकम वापस मिलने की संभावना भी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तकनीक के माध्यम से तेज़ जाँच-पड़ताल होने से नागरिकों की रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल युग में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और पारंपरिक एफआईआर प्रक्रिया की धीमी गति अपराधियों को बेखौफ रहने का मौका देती थी। ई-जीरो एफआईआर प्रणाली इस खामी को दूर करने की दिशा में गुजरात पुलिस का ठोस कदम है। आगे चलकर यदि अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो देशभर में साइबर फ्रॉड के विरुद्ध एक समन्वित डिजिटल सुरक्षा कवच बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि रिकवरी दर कितने प्रतिशत मामलों में हासिल होती है — एक उदाहरण पर्याप्त नहीं है। देश में साइबर फ्रॉड की शिकायतें हर साल लाखों में हैं, जबकि रिकवरी दर राष्ट्रीय स्तर पर बेहद कम रही है। यह पहल तभी सफल मानी जाएगी जब बैंकों के साथ वास्तविक समय समन्वय और फ्रीज़िंग तंत्र मज़बूत हो — केवल एफआईआर दर्ज होने से रकम वापस नहीं आती। अन्य राज्यों के लिए यह मॉडल अनुकरणीय है, बशर्ते पारदर्शी रिकवरी आँकड़े सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात पुलिस की साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड ई-जीरो एफआईआर क्या है?
यह एक ऑनलाइन शिकायत प्रणाली है जिसके तहत साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ित 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करके घर बैठे एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलते ही ई-जीरो एफआईआर स्वतः रजिस्टर होकर संबंधित थाने में ट्रांसफर हो जाती है और पुलिस तुरंत जाँच शुरू करती है।
साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर कब कॉल करना चाहिए?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फ्रॉड होते ही बिना देरी किए तुरंत 1930 डायल करना चाहिए, क्योंकि शुरुआती घंटे — 'गोल्डन ऑवर' — में की गई कार्रवाई से लूटी गई रकम वापस मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है। जितनी देर होगी, अपराधी रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं।
ई-जीरो एफआईआर किन मामलों में दर्ज होती है?
गुजरात में ₹10 लाख से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की सभी शिकायतों के लिए सीधे ऑनलाइन ई-एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था है। इससे कम राशि के मामलों में भी 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस क्या करती है?
एफआईआर दर्ज होते ही वह संबंधित लोकल पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर होती है। पुलिस की टीम पीड़ित को कॉल करके पूरी जानकारी लेती है और तुरंत संबंधित बैंक से समन्वय कर धनराशि फ्रीज़ कराने की कोशिश करती है।
क्या ई-जीरो एफआईआर से वास्तव में रकम वापस मिलती है?
हाँ, एक मामले में पीड़ित के बैंक खाते से ट्रांसफर हुए ₹2 करोड़ 30 लाख में से ₹1 करोड़ 63 लाख की रिकवरी गुजरात पुलिस की साइबर सेल की मदद से हुई। हालाँकि रिकवरी की सफलता काफी हद तक शिकायत की तत्परता और बैंक के साथ समन्वय पर निर्भर करती है।
राष्ट्र प्रेस
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