17 सितंबर 2026
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गुजरात: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में ₹3.76 करोड़ की हेराफेरी, साइबर नेटवर्क के तीन सदस्य गिरफ्तार

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गुजरात: डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में ₹3.76 करोड़ की हेराफेरी, साइबर नेटवर्क के तीन सदस्य गिरफ्तार

सारांश

गुजरात पुलिस के CCOE ने एक ऐसे साइबर नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जिसने ऑनलाइन लोन के बहाने पीड़ितों के मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर ₹3.76 करोड़ की हेराफेरी की। तीन आरोपी गिरफ्तार, खाते 13 राज्यों में फैली 29 शिकायतों से जुड़े — यह डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का एक नया और चिंताजनक तरीका है।

मुख्य बातें

गुजरात CCOE ने 17 सितंबर 2026 को साइबर नेटवर्क के तीन सदस्यों को राजस्थान और चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर ₹3.76 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड में धन हेराफेरी का आरोप; तीनों को कथित तौर पर ₹83.11 लाख कमीशन मिला।
बैंक खाते 13 राज्यों में दर्ज 29 साइबर शिकायतों से जुड़े; इनमें लगभग ₹13.11 लाख के लेनदेन।
नेटवर्क ने 'नियो फाइनेंस' के नाम पर ऋण का झाँसा देकर पीड़ितों के फोन पर Pushbullet ऐप के ज़रिये नियंत्रण लिया।
राजस्थान के आरोपियों ने पार्टनरशिप फर्म खाते में ₹70 लाख जमा किए; चंडीगढ़ के आरोपी ने USDT क्रिप्टो के ज़रिये धन स्थानांतरित किया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन जब्त किए; नेटवर्क के फरार सदस्यों की तलाश जारी।

गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCOE) ने 17 सितंबर 2026 को एक बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन पर ₹3.76 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड में धन-शोधन में सहयोग देने का आरोप है। जाँच में इन आरोपियों के बैंक खाते 13 राज्यों में दर्ज 29 साइबर शिकायतों से जुड़े पाए गए। गिरफ्तारियाँ राजस्थान और चंडीगढ़ से की गई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

गांधीनगर स्थित सीआईडी साइबर क्राइम सेल पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर तकनीकी निगरानी और फील्ड जाँच करने के बाद यह गिरफ्तारियाँ अमल में लाई गईं। आरोपियों की पहचान राजस्थान के अजमेर जिले के निवासी गोपाल राम, उसी जिले के नेकदीन कथत और हरियाणा के जींद के निवासी दीपक के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से चार मोबाइल फोन भी जब्त किए।

पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों को कुल मिलाकर कथित तौर पर ₹83.11 लाख प्राप्त हुए थे, जो उन्होंने कमीशन के बदले साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन को आगे स्थानांतरित करने में उपयोग किया।

धोखाधड़ी का नया तरीका

जाँच में एक नई कार्यप्रणाली सामने आई है जिसका उपयोग नेटवर्क के फरार सदस्यों ने ₹3.76 करोड़ को छुपाने के लिए किया। आरोपी सबसे पहले उन लोगों को निशाना बनाते थे जो ऑनलाइन ऋण लेना चाहते थे। इन लोगों से कथित तौर पर कहा जाता था कि वे 'नियो फाइनेंस' नामक एक वित्त कंपनी से ऋण ले सकते हैं।

पीड़ितों को Play Store से 'Pushbullet' एप्लिकेशन डाउनलोड करने और एक विशेष आईडी व पासवर्ड से इसे सक्रिय करने को कहा जाता था। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर पीड़ितों के मोबाइल फोन का नियंत्रण प्राप्त कर लेते थे और 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड से प्राप्त धन को अपने बैंक खातों में मँगवाते थे। गौरतलब है कि इस तरह पीड़ितों के फोन का उपयोग खुद उन्हीं के विरुद्ध किया गया।

चंडीगढ़ से पकड़े गए आरोपी ने कथित तौर पर अपने मोबाइल पर USDT (क्रिप्टोकरेंसी) लेनदेन किए और ये धनराशि नेटवर्क के अन्य सदस्यों को भेजी। बदले में नेटवर्क उसे नकद भेजता था जो कई बैंक खातों के माध्यम से पहुँचता था।

13 राज्यों में फैला जाल

राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर की गई जाँच के अनुसार इन खातों से जुड़ी 29 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं — कर्नाटक में सात, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में तीन-तीन, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और झारखंड में दो-दो, तथा गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में एक-एक। इन शिकायतों में कुल मिलाकर लगभग ₹13.11 लाख के लेनदेन का उल्लेख है।

राजस्थान से गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर एक पार्टनरशिप फर्म के नाम पर बैंक खाता खोला और उसमें डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से अर्जित लगभग ₹70 लाख जमा किए, जिन्हें बाद में अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

साइबर सेल की सलाह

CCOE ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे ऑनलाइन ऋण लेने से पहले कंपनियों की विश्वसनीयता की जाँच करें और अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को न सौंपें। साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर कम समय में अत्यधिक रिटर्न का वादा करने वाले निवेश विज्ञापनों से सावधान रहने की सलाह दी गई है।

क्या होगा आगे

जाँच जारी है और नेटवर्क के फरार सदस्यों की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार इन खातों का उपयोग डिजिटल अरेस्ट के अलावा निवेश धोखाधड़ी, UPI फ्रॉड और ट्रेडिंग घोटालों में भी किया गया था, जो इस नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है। यह मामला देशभर में डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के बढ़ते चलन की एक और कड़ी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समन्वित राष्ट्रीय नेटवर्क है। क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के ज़रिये धन-शोधन और लोन चाहने वालों के खातों का उपकरण की तरह उपयोग यह बताता है कि साइबर अपराधी कानून प्रवर्तन से आगे चलने के लिए तेज़ी से अपनी कार्यप्रणाली बदल रहे हैं। नेटवर्क के मुख्य संचालक अभी भी फरार हैं, जो सवाल उठाता है कि क्या केवल 'खच्चर खाताधारकों' की गिरफ्तारी असली सरगनाओं तक पहुँचने के लिए पर्याप्त होगी।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड क्या है और गुजरात मामले में इसका तरीका क्या था?
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में जालसाज़ पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर ऑनलाइन पैसे ऐंठते हैं। गुजरात मामले में आरोपियों ने 'नियो फाइनेंस' कंपनी के नाम पर ऋण का लालच देकर पीड़ितों से 'Pushbullet' ऐप डाउनलोड करवाया, उनके फोन का नियंत्रण लिया और ₹3.76 करोड़ अपने खातों में मँगवाए।
गिरफ्तार तीन आरोपी कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
गिरफ्तार आरोपी राजस्थान के अजमेर जिले के गोपाल राम व नेकदीन कथत और हरियाणा के जींद के दीपक हैं। इन पर साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन को कमीशन के बदले अपने बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित करने में सहायता करने का आरोप है।
इस नेटवर्क के बैंक खाते कितने राज्यों में फैले थे?
राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर जाँच से पता चला कि इन खातों से जुड़ी 29 से अधिक शिकायतें 13 राज्यों — गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और ओडिशा — में दर्ज हैं।
क्रिप्टोकरेंसी का इस धोखाधड़ी में क्या भूमिका थी?
चंडीगढ़ से गिरफ्तार आरोपी ने कथित तौर पर USDT (एक स्थिर क्रिप्टोकरेंसी) के ज़रिये लेनदेन किए और यह राशि नेटवर्क के अन्य सदस्यों को भेजी। बदले में उसे नकद कई बैंक खातों के माध्यम से प्राप्त होता था, जिससे धन का पता लगाना कठिन हो जाता था।
ऑनलाइन लोन घोटालों से खुद को कैसे बचाएँ?
गुजरात CCOE ने सलाह दी है कि ऑनलाइन ऋण लेने से पहले कंपनी की प्रामाणिकता की पुष्टि करें, अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम किसी को न दें, और सोशल मीडिया पर असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का वादा करने वाले निवेश विज्ञापनों से सावधान रहें।
राष्ट्र प्रेस
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