नेतन्याहू का ऐलान: ईरानी सरकार गिराएंगे, हमास को करेंगे खत्म — 'दुश्मन हम पर हमला करने से बच रहे हैं'
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को यरुशलम में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समारोह के दौरान स्पष्ट किया कि इजरायल ईरान की सरकार को गिराएगा, हमास को पूरी तरह खत्म करेगा और हिजबुल्लाह के विरुद्ध अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के सदस्यों को सम्मानित करने के लिए आयोजित इस समारोह में नेतन्याहू की टिप्पणियाँ इजरायल की ओर से अब तक के सबसे कड़े सार्वजनिक वक्तव्यों में से एक मानी जा रही हैं।
नेतन्याहू के बयान का सार
नेतन्याहू ने समारोह में कहा, 'हम हमास को खत्म कर देंगे और सबसे पहले हम ईरान में शासन को हराएंगे। हम उनकी सरकार गिरा देंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले में शामिल फिलिस्तीनियों की तलाश अब भी इजरायल का एक प्रमुख लक्ष्य है। इस सिलसिले में उन्होंने सख्त चेतावनी दी — 'कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।'
ईरान को खुली चेतावनी
नेतन्याहू ने ईरान को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'ईरान हम पर हमला करने से बच रहा है और वह जानता है क्यों। वह गलती भी कर सकता है और फिर भी हम पर हमला करने की भूल कर सकता है — उसे ऐसा झटका लगेगा जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता।' उन्होंने इजरायल को मध्य पूर्व की सबसे मजबूत महाशक्ति करार देते हुए कहा, 'हमें आजमाने की कोशिश मत करो।'
रोश हशनाह बैठक में दिए पुराने बयान से संदर्भ
गौरतलब है कि 6 सितंबर को सरकार की बैठक में रोश हशनाह के अवसर पर भी नेतन्याहू ने कहा था कि 'ईरान में शासन का अंत निकट है और वह अपनी जान बचाने के लिए लड़ रहा है।' उन्होंने तब भी कहा था कि एक और मिशन पूरा करना बाकी है। इस क्रम में देखें तो 17 सितंबर का वक्तव्य उसी रणनीतिक दिशा को और पुख्ता करता है।
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, नेतन्याहू ने रोश हशनाह टोस्ट के दौरान कहा, 'हमने बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं। इजरायल आज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और हमारे दुश्मन पहले से ज्यादा कमजोर। अमेरिका के साथ मिलकर हमने अपने वजूद पर मंडराते खतरे को टाला है। हमने परमाणु बम और बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे को पीछे धकेला है और ईरानी धुरी पर करारा प्रहार किया है।'
युद्ध के तीन साल और अधूरे लक्ष्य
नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि युद्ध शुरू हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा में स्थायी युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए दबाव बढ़ाता जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इजरायल के व्यापक क्षेत्रीय लक्ष्य — विशेष रूप से ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात — मध्य पूर्व में अस्थिरता को और गहरा कर सकते हैं।
क्या होगा आगे
नेतन्याहू के इन बयानों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। हिजबुल्लाह के विरुद्ध अभियान, हमास उन्मूलन की घोषित नीति और ईरानी शासन को चुनौती देने के संकेत — तीनों एक साथ सक्रिय मोर्चों की तरह हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इजरायल की यह बहु-मोर्चा रणनीति अगले महीनों में अमेरिका-इजरायल समन्वय की परीक्षा भी लेगी।