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सुरेश गोपी ने सतीसन सरकार की तारीफ की, कहा — 10 साल में पहली बार मिला ऐसा सहयोग

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सुरेश गोपी ने सतीसन सरकार की तारीफ की, कहा — 10 साल में पहली बार मिला ऐसा सहयोग

सारांश

भाजपा कांग्रेस की पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने सतीसन सरकार की खुलकर तारीफ की — यह बयान केरल की राजनीति में असाधारण है। साथ ही रिपोर्टर टीवी छापेमारी के समर्थन ने मीडिया स्वतंत्रता बहस को नई दिशा दी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने 17 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में वी.डी.
सतीसन सरकार की तारीफ की।
गोपी ने कहा कि राज्य से पिछले 10 वर्षों में पहली बार इतना बेहतर सहयोग मिल रहा है।
उन्होंने रिपोर्टर टीवी और मैनेजिंग एडिटर एंटो ऑगस्टीन के खिलाफ पुलिस की छापेमारी का समर्थन किया।
मीडिया स्वतंत्रता पर सवाल उठने पर गोपी ने तीखे अंदाज़ में पलटवार करते हुए कहा — 'आप कौन हैं?' केरल सरकार का कहना है कि छापेमारी कथित वित्तीय धोखाधड़ी की जाँच का हिस्सा है, न कि मीडिया पर दबाव।

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन के नेतृत्व वाली केरल सरकार की सराहना करते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में केंद्र को राज्य से अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है। उनका यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि केरल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही हैं।

केंद्र राज्य तालमेल पर गोपी का बयान

गोपी ने कहा कि राज्य सरकार अब इस प्रकार सहयोग कर रही है, जैसा पिछले 10 वर्षों में नहीं देखा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया, "आज, हम किसी भी चीज़ के लिए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन और अन्य लोगों से संपर्क कर सकते हैं।" यह संकेत देता है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खाई के बावजूद, विकास के मोर्चे पर व्यावहारिक सहयोग की नई राह खुली है।

गोपी ने यह भी जोड़ा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से केरल में केंद्र सरकार की और अधिक योजनाएँ लाई जा सकेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब नई चुनी गई सतीसन सरकार और केंद्र के बीच कार्यशील संबंधों पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की कड़ी नज़र है।

रिपोर्टर टीवी छापेमारी पर रुख

गोपी ने 'रिपोर्टर टीवी' के दफ्तर पर हाल ही में हुई छापेमारी में पुलिस की कार्रवाई का भी समर्थन किया। यह छापेमारी कथित वित्तीय धोखाधड़ी की जाँच के सिलसिले में की गई थी। उन्होंने कहा कि छापेमारी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और यह कभी भी हो सकती है।

गोपी ने पुलिस तलाशी पर भिन्न भिन्न प्रतिक्रियाओं पर सवाल उठाया — कि यह इस बात पर निर्भर क्यों होना चाहिए कि तलाशी लेने वाला व्यक्ति पत्रकार है या आम नागरिक। उन्होंने कहा, "जब पुलिस किसी आम आदमी के घर में घुसती है, तो आमतौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती।" उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकार भी आम नागरिक ही होते हैं और उनके साथ अलग व्यवहार की माँग उचित नहीं है।

मीडिया स्वतंत्रता पर तीखी प्रतिक्रिया

जब एक सवाल में छापेमारी के संदर्भ में मीडिया की आज़ादी के बारे में विशेष रूप से पूछा गया, तो केंद्रीय मंत्री गोपी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल पूछने वाले से पलटवार किया — "आप कौन हैं?" यह प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई है।

गौरतलब है कि 'रिपोर्टर टीवी' और उसके मैनेजिंग एडिटर एंटो ऑगस्टीन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दलों और मीडिया संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह कदम प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।

सरकार का पक्ष और विपक्ष की आपत्तियाँ

केरल सरकार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई कथित गंभीर अपराधों की जाँच से जुड़ी थी और इसका मीडिया संस्थान के कामकाज या उसकी समाचार कवरेज से कोई संबंध नहीं है। वहीं, विपक्षी दलों ने पत्रकारों के साथ हुए व्यवहार पर आपत्ति जताई है।

गोपी का पुलिस कार्रवाई का समर्थन उस बहस में एक नया पहलू जोड़ता है जो मीडिया संस्थानों के मामले में पुलिस शक्तियों की सीमाओं को लेकर जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव और अदालती प्रतिक्रिया से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं रिपोर्टर टीवी छापेमारी के समर्थन और मीडिया स्वतंत्रता पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया प्रेस की स्वायत्तता को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। एक केंद्रीय मंत्री का यह कहना कि पत्रकार 'आम नागरिक' ही हैं, पत्रकारिता को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा की अनदेखी करता है। मुख्यधारा की कवरेज 'सहयोग की राजनीति' पर केंद्रित है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सहयोग किसी खास राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरेश गोपी ने सतीसन सरकार की तारीफ क्यों की?
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में केंद्र को वी.डी. सतीसन सरकार से पिछले 10 वर्षों में पहली बार अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है। उनके अनुसार, केंद्र की योजनाओं पर कभी भी मुख्यमंत्री से सीधे संपर्क किया जा सकता है।
रिपोर्टर टीवी पर छापेमारी का मामला क्या है?
केरल पुलिस ने कथित वित्तीय धोखाधड़ी की जाँच के सिलसिले में 'रिपोर्टर टीवी' के दफ्तर पर छापेमारी की और मैनेजिंग एडिटर एंटो ऑगस्टीन से जुड़ी जाँच की। केरल सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई गंभीर आपराधिक मामले की जाँच का हिस्सा है, न कि मीडिया पर दबाव।
गोपी ने मीडिया की आज़ादी पर क्या कहा?
गोपी ने इस धारणा को खारिज किया कि छापेमारी के दौरान पत्रकारों के साथ अलग व्यवहार किया जाना चाहिए। जब मीडिया स्वतंत्रता पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल पूछने वाले से कहा — 'आप कौन हैं?'
क्या BJP और कांग्रेस केरल में मिलकर काम कर रहे हैं?
गोपी के बयान से यह स्पष्ट नहीं होता कि दोनों दलों में राजनीतिक गठजोड़ हुआ है, लेकिन वे यह ज़रूर कह रहे हैं कि विकास परियोजनाओं पर राजनीतिक मतभेद बाधा नहीं बनने चाहिए। केरल में BJP और कांग्रेस मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बने हुए हैं।
विपक्ष की रिपोर्टर टीवी छापेमारी पर क्या आपत्तियाँ हैं?
विपक्षी दलों और मीडिया संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या यह कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है। उनका कहना है कि मीडिया संस्थान से जुड़े मामलों में पुलिस शक्तियों की सीमाओं पर बहस होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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