गुजरात में 77 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा, 16 गिरफ्तार

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गुजरात में 77 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा, 16 गिरफ्तार

सारांश

गुजरात की सीआईडी क्राइम ने 77 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी के मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह मामला एक अंतरराज्यीय म्यूल बैंक खाता नेटवर्क से जुड़ा है। जानें इस धोखाधड़ी के पीछे का सच।

Key Takeaways

  • गुजरात में 77 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
  • 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
  • यह गिरोह म्यूल बैंक खाते का उपयोग कर रहा था।
  • पुलिस ने बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
  • साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।

गांधीनगर, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात सीआईडी क्राइम के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने एक अंतरराज्यीय म्यूल बैंक खाता नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो कि राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 375 मामलों में 77 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी से संबंधित है।

इस कार्रवाई में वडोदरा, पालनपुर और गोवा से 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह एक संगठित अपराध तंत्र था, जो साइबर धोखाधड़ी और गेमिंग से जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक खातों को खोलने और उनका उपयोग करने में संलग्न था।

यह कार्रवाई सीआईडी क्राइम और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई, ताकि साइबर अपराध के खिलाफ अभियान को मजबूत किया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में की गई।

आरोपियों ने अपने और अन्य व्यक्तियों के नाम पर बचत और चालू बैंक खाते खोले, तथा इन खातों के किट और सिम कार्ड साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों को प्रदान किए।

पुलिस के अनुसार, वडोदरा से 5, पालनपुर से 2 और गोवा से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वडोदरा से किरण जोशी, सिद्धराज शिरवाडिया, महेश जोशी, जिगर सोलंकी और प्रकाश जोशी के रूप में हुई है, जबकि पालनपुर से मित्रा श्रीमाली और मेहुल सोलंकी को गिरफ्तार किया गया।

गोवा से गिरफ्तार अन्य 9 आरोपियों में जीतू ठक्कर, साहिल प्रजापति, जैमिन प्रजापति, विजय नाई, हितेश ठाकोर, ध्रुव चौधरी, अनिलकुमार चौधरी, आशीष कुमार चौधरी और नरेशकुमार खरशन शामिल हैं।

कुछ आरोपी फर्जी कंपनियों जैसे 'शिवम एजेंसी', 'शिवधारा मसाला बिजनेस' और 'एम आर वाटर' बनाने में भी शामिल थे, जिनके माध्यम से लेनदेन को वैध दिखाने का प्रयास किया जाता था।

अधिकारियों ने बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना किरण जोशी और जीतू ठक्कर हैं, जबकि अन्य आरोपी उनके साथ मिलकर म्यूल बैंक खाते तैयार करने और वित्तीय लेनदेन करने में मदद करते थे।

इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य भी बरामद किए गए। वडोदरा से 13 मोबाइल फोन, 13 चेक बुक, 2 पासबुक और 4 खाली चेक मिले।

गोवा से 15 लैपटॉप, 72 मोबाइल फोन, 126 सिम कार्ड, 115 डेबिट कार्ड, 80 पासबुक, 15 चेक बुक, 7 क्यूआर कोड, 2 पेन ड्राइव और 1 रेंट एग्रीमेंट बरामद किए गए।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों से 260 से अधिक बैंक खातों की जानकारी भी मिली है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, जब्त किए गए उपकरणों के विश्लेषण से बैंक स्टेटमेंट, लेनदेन रिकॉर्ड, लॉगिन जानकारी और साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों के दस्तावेज प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए बैंक खातों की जानकारी दुबई और अन्य विदेशी स्थानों पर मौजूद व्यक्तियों के साथ साझा की जा रही थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की संभावना प्रकट होती है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह डिजिटल गिरफ्तारी ठगी, निवेश ठगी, यूपीआई धोखाधड़ी, जमा धोखाधड़ी, लोन धोखाधड़ी, पार्ट-टाइम नौकरी ठगी और गेमिंग धोखाधड़ी जैसे कई साइबर अपराधों में संलग्न था।

आरोपी कथित तौर पर कमीशन के आधार पर काम करते थे और अपराध से प्राप्त धन को लेने, ट्रांसफर करने और छिपाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था उपलब्ध कराते थे।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपी असली खाताधारकों से बैंक खाते और सिम कार्ड लेकर उन्हें नेटवर्क में अवैध उपयोग के लिए बांटते थे।

प्रशासन ने दोहराया कि बैंक खाते के धारक अपने खाते से होने वाले सभी लेनदेन के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार होते हैं।

Point of View

और इस प्रकार के संगठित अपराधों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। सरकार और पुलिस को मिलकर इस प्रकार के नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

साइबर धोखाधड़ी क्या है?
साइबर धोखाधड़ी वह गतिविधि है जिसमें डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की जाती है, जैसे कि फर्जी बैंक खाते खोलना या ऑनलाइन ठगी करना।
गुजरात में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
गुजरात में इस मामले में कुल 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने किस प्रकार की सामग्री जब्त की है?
पुलिस ने मोबाइल फोन, चेक बुक, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
यह गिरोह किस प्रकार के अपराधों में शामिल था?
यह गिरोह डिजिटल गिरफ्तारी ठगी, निवेश ठगी, यूपीआई धोखाधड़ी, और अन्य साइबर अपराधों में शामिल था।
क्या बैंक खाते के धारक ज़िम्मेदार होते हैं?
हाँ, बैंक खाते के धारक अपने खाते से होने वाले सभी लेनदेन के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार होते हैं।
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