11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली पुलिस ने ₹15.71 करोड़ के साइबर निवेश घोटाले का भंडाफोड़ किया, 4 राज्यों से 9 गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली पुलिस ने ₹15.71 करोड़ के साइबर निवेश घोटाले का भंडाफोड़ किया, 4 राज्यों से 9 गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक संगठित साइबर निवेश सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है जो वॉट्सऐप ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप के ज़रिए लोगों को ठगता था। ₹15.71 करोड़ के इस घोटाले में 4 राज्यों से 9 आरोपी गिरफ्तार हुए और 34 मामले उजागर हुए।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने ने ₹15.71 करोड़ के साइबर निवेश घोटाले का भंडाफोड़ किया।
केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब से कुल 9 आरोपी गिरफ्तार; 8 मोबाइल फोन बरामद।
जाँच में 34 मामले उजागर, जिनमें दिल्ली के 7 मामलों में करीब ₹2.70 करोड़ की ठगी शामिल।
गिरोह वॉट्सऐप ग्रुप और नकली ट्रेडिंग ऐप के ज़रिए पीड़ितों को फँसाता था; रकम शेल फर्मों के करंट अकाउंट से घुमाई जाती थी।
विदेशी कनेक्शन और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जाँच जारी है।

दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने 11 अगस्त 2026 को एक बड़े साइबर निवेश घोटाले और 'म्यूल अकाउंट' सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, जिसमें केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब से 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े 34 मामलों में कुल ₹15.71 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के लेन-देन सामने आए हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

पालम कॉलोनी, नई दिल्ली के एक निवासी की शिकायत से इस पूरे मामले की जाँच शुरू हुई। पीड़ित को कथित तौर पर निवेश सीखने के बहाने एक वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जहाँ आरोपियों ने खुद को मार्केट एनालिस्ट और निवेश विशेषज्ञ बताकर नकली ट्रेडिंग सेशन, फर्जी सफलता की कहानियाँ और मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाए। भरोसा जीतने के बाद पीड़ित को एक नकली ट्रेडिंग एप्लीकेशन के ज़रिए निवेश के लिए राजी किया गया।

पीड़ित ने अलग-अलग बैंकिंग चैनलों के ज़रिए ₹4.82 लाख जमा किए। शुरुआत में कुछ रकम निकालने की अनुमति दी गई, लेकिन बाद में ₹7.81 लाख के आईपीओ अलॉटमेंट के नाम पर और पैसे माँगे गए। शक होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

जाँच में कैसे सुलझी गुत्थी

जाँच दल ने बैंक खातों के ज़रिए मनी ट्रेल और आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण किया। इससे खाताधारकों, फैसिलिटेटर्स और 'म्यूल अकाउंट' उपलब्ध कराने वालों का एक संगठित नेटवर्क सामने आया।

मनी ट्रेल के आधार पर पुलिस नंदुरबार, महाराष्ट्र पहुँची और शोएब दिलावर सैयद को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल से कथित आपत्तिजनक चैट और डिजिटल सबूत मिले। जाँच में सामने आया कि वह अन्य आरोपियों के साथ केरल गया था, जहाँ व्यावसायिक इकाइयाँ बनाकर उनके नाम पर करंट अकाउंट खोले गए।

गिरफ्तारियाँ और आरोपियों की भूमिका

गुजरात पुलिस की सहायता से सूरत और आसपास के इलाकों से शेख रियाज़ुद्दीन इम्तियाज, कमलशा कादरशाह, सिद्दीकी मोहम्मदसिद्दीक मुफिदभाई और हमजा हुमायूं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों ने अपने करंट अकाउंट नेटवर्क को उपलब्ध कराया और अकाउंट किट व बैंकिंग जानकारी पैसे के बदले नेटवर्क के अन्य सदस्यों को दी।

केरल के मंजेश्वर से मुजम्मिल तैब को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, वह खाताधारकों के साथ तालमेल, उनके ठहरने की व्यवस्था और वॉट्सऐप के ज़रिए बैंक खाते की जानकारी व OTP साझा करने में शामिल था। मुख्य आरोपी बताए जा रहे जमालुद्दीन फैसल को भी गिरफ्तार किया गया, जिसकी भूमिका फर्जी बिजनेस एंटिटी और बैंक खाते खुलवाने में सामने आई।

पंजाब से सरबजीत सिंह और सोनिया शर्मा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि दोनों बैंक खातों और साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े लेन-देन में शामिल थे।

घोटाले का तरीका और बरामदगी

पुलिस के अनुसार, गिरोह वॉट्सऐप निवेश समूहों के ज़रिए लोगों को निशाना बनाता था। नकली ट्रेडिंग ऐप पर फर्जी मुनाफा दिखाकर निवेश बढ़वाया जाता था और रकम निकालने पर टैक्स, ब्रोकरेज, आईपीओ अलॉटमेंट, वेरिफिकेशन, प्रोसेसिंग फीस और मार्जिन जैसे बहाने बनाकर अतिरिक्त रकम माँगी जाती थी। ठगी की रकम को कथित शेल फर्मों के नाम पर खोले गए कई करंट अकाउंट्स के ज़रिए घुमाया जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्ज़े से 8 मोबाइल फोन बरामद किए, जिनमें वॉट्सऐप चैट, बैंकिंग रिकॉर्ड, अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, डिजिटल क्रेडेंशियल और ट्रांजैक्शन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं।

आगे क्या होगा

जाँच में सामने आए दिल्ली के 7 मामलों में कुल करीब ₹2.70 करोड़ की धोखाधड़ी शामिल है। इसके अलावा 27 अन्य NCRP शिकायतों से भी नेटवर्क के संबंध का पता चला है। पुलिस के अनुसार, विदेशी कनेक्शन और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की जाँच अभी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कई राज्यों में फैले संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे हैं — जिसमें 'म्यूल अकाउंट' की आपूर्ति एक अलग व्यवसाय बन चुकी है। गौरतलब है कि NCRP पर दर्ज 27 अतिरिक्त शिकायतें बताती हैं कि इस सिंडिकेट की पहुँच दिल्ली से कहीं आगे थी, फिर भी कार्रवाई एक स्थानीय शिकायत के बाद ही हुई। असली सवाल यह है कि क्या मौजूदा बैंकिंग KYC प्रक्रियाएँ इतनी कमज़ोर हैं कि शेल फर्मों के नाम पर बड़े पैमाने पर करंट अकाउंट खुल सकें — और इसकी ज़िम्मेदारी केवल पुलिस पर नहीं, वित्तीय नियामकों पर भी बनती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस साइबर घोटाले का भंडाफोड़ किया है?
दिल्ली पुलिस के साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने ने एक साइबर निवेश फ्रॉड और 'म्यूल अकाउंट' सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें ₹15.71 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के लेन-देन सामने आए हैं। इस नेटवर्क से जुड़े कुल 34 मामले उजागर हुए हैं।
इस साइबर घोटाले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कहाँ से?
कुल 9 आरोपियों को केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में शोएब दिलावर सैयद (महाराष्ट्र), शेख रियाज़ुद्दीन इम्तियाज, कमलशा कादरशाह, सिद्दीकी मोहम्मदसिद्दीक मुफिदभाई और हमजा हुमायूं (गुजरात), मुजम्मिल तैब और जमालुद्दीन फैसल (केरल), तथा सरबजीत सिंह और सोनिया शर्मा (पंजाब) शामिल हैं।
'म्यूल अकाउंट' सिंडिकेट कैसे काम करता था?
आरोपी वॉट्सऐप ग्रुप के ज़रिए लोगों को निवेश का लालच देते थे और नकली ट्रेडिंग ऐप पर फर्जी मुनाफा दिखाकर पैसे जमा करवाते थे। ठगी की रकम को शेल फर्मों के नाम पर खोले गए 'म्यूल' करंट अकाउंट्स के ज़रिए घुमाया जाता था, और रकम निकालने पर टैक्स व प्रोसेसिंग फीस जैसे बहाने बनाकर और पैसे माँगे जाते थे।
पीड़ित ने शिकायत कहाँ दर्ज कराई और जाँच कैसे हुई?
पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद साइबर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। जाँच दल ने बैंक खातों के मनी ट्रेल और डिजिटल फुटप्रिंट के विश्लेषण के आधार पर एक-एक आरोपी तक पहुँचा।
क्या इस मामले में विदेशी कनेक्शन की भी जाँच हो रही है?
हाँ, पुलिस के अनुसार विदेशी कनेक्शन और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की जाँच अभी जारी है। इसके अलावा NCRP पर दर्ज 27 अतिरिक्त शिकायतों से भी इस नेटवर्क के संबंध की पड़ताल की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले