हैदराबाद में ₹1.22 करोड़ की निवेश ठगी उजागर, साइबर क्राइम पुलिस ने 6 आरोपी दबोचे
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने ₹1.22 करोड़ की ऑनलाइन निवेश ट्रेडिंग धोखाधड़ी का भंडाफोड़ करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 24 जून 2026 को की गई इस कार्रवाई में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के नेटवर्क के ज़रिए साइबर अपराध से अर्जित धन को ठिकाने लगा रहे थे। पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी साइबर धोखाधड़ी को पोषित करने वाले वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में अहम कदम है।
कैसे फँसाया पीड़ित को
जनवरी 2026 में हैदराबाद के एक व्यक्ति को व्हाट्सएप पर एक तथाकथित ट्रेडिंग ग्रुप में जोड़ा गया। आरोपियों ने उसे अधिक मुनाफे और आईपीओ आवंटन का प्रलोभन देकर फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए राजी किया।
शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए पीड़ित को ₹1.05 लाख निकालने की सुविधा दी गई। इसके बाद उसने 19 अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹1,22,18,029.50 निवेश कर दिए। आरोपियों ने उसके फर्जी खाते में ₹15.69 करोड़ का काल्पनिक मुनाफा दर्शाया और आईपीओ जारी करने के नाम पर अतिरिक्त ₹35 लाख की माँग की — तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
म्यूल अकाउंट्स का जाल
साइबर क्राइम के डीसीपी ने बताया कि एक मुख्य आरोपी ने बड़े मूल्य वाले चालू बैंक खाते खोलने के लिए एक कंपनी बनाई थी। इन खातों की इंटरनेट बैंकिंग जानकारी बाद में अन्य लोगों को सौंप दी जाती थी।
जाँच में यह भी उजागर हुआ कि कुछ खातों को रिमोट एक्सेस और ओटीपी में हेरफेर कर सक्रिय किया जाता था। आरोपी इन खातों की व्यवस्था करने के बदले कमीशन लेते थे। एक आरोपी द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंक खाता देशभर के 26 मामलों से जुड़ा पाया गया — जिनमें तेलंगाना के 4 मामले शामिल हैं — और इसके ज़रिए ₹1.10 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ।
इसी तरह, दो अन्य आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराया गया सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का खाता देशभर के 18 मामलों से जुड़ा था — जिनमें तेलंगाना के 2 मामले हैं — और इस खाते से करीब ₹3.37 करोड़ का लेनदेन दर्ज किया गया।
आरोपियों का भौगोलिक फैलाव
गिरफ्तार छह आरोपियों में तीन महाराष्ट्र के, दो राजस्थान के और एक आंध्र प्रदेश का निवासी है। यह बहु-राज्यीय नेटवर्क दर्शाता है कि साइबर अपराध की यह श्रृंखला किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी।
पुलिस की प्रतिक्रिया और आगे की जाँच
पुलिस ने बुधवार को स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई साइबर धोखाधड़ी को आर्थिक रूप से सहारा देने वाले नेटवर्क को तोड़ने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। आरोपियों पर साइबर अपराध और अवैध ऑनलाइन गतिविधियों से प्राप्त धन को छिपाने और स्थानांतरित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप है। आगे की जाँच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।