शाहदरा साइबर पुलिस ने ₹1.56 करोड़ के ऑनलाइन निवेश ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया, दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
शाहदरा जिले की साइबर पुलिस ने 15 जून 2026 को ₹1.56 करोड़ के ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में घुमाने में सहायता कर रहे थे। पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन, आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट और बैंक दस्तावेज़ सहित अनेक डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
पुलिस के अनुसार, यह प्रकरण दिल्ली के जीटीबी एन्क्लेव निवासी एक महिला की शिकायत से उजागर हुआ। महिला ने साइबर थाना शाहदरा में ई-एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, अप्रैल 2026 में उसे टेलीग्राम पर शेयर बाज़ार में निवेश से संबंधित एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन के लिंक पर क्लिक करते ही उसे एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ लिया गया।
उस ग्रुप में खुद को निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोगों ने महिला को भारी मुनाफे और सुरक्षित रिटर्न का लालच दिया। जालसाज़ों के झाँसे में आकर महिला ने अलग-अलग चरणों में कुल ₹21 लाख निवेश कर दिए।
ठगी का अहसास कब हुआ
जब महिला ने अपनी निवेश राशि और कथित मुनाफा वापस माँगा, तो आरोपियों ने न कोई भुगतान किया और न ही संपर्क में रहे। इसके बाद महिला को उस टेलीग्राम ग्रुप से भी हटा दिया गया, जिससे उसे ठगी का अहसास हुआ। यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति की एक और कड़ी है जिसमें ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके निवेशकों को फँसाते हैं।
विशेष टीम का गठन और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में इंस्पेक्टर अश्वनी कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जाँच दल गठित किया गया। टीम में एचसी धनेश, एचसी अनुज, एचसी विकास और एचसी महिपाल शामिल थे। तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग ट्रेल और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा और मुरादाबाद में एक साथ छापेमारी कर दोनों आरोपियों को दबोचा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 32 वर्षीय मोहम्मद सादिक, निवासी मुरादाबाद, और 34 वर्षीय जावेद अंसारी, निवासी अमरोहा, के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे जान-बूझकर साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।
रैकेट कैसे काम करता था
जाँच में सामने आया कि इन खातों का उपयोग ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने और उसके मूल स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। आरोपी व्हाट्सएप के ज़रिये अपने नेटवर्क के अन्य सदस्यों के संपर्क में रहते थे और विभिन्न राज्यों में फैले साइबर ठगी के जाल के लिए काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, बरामद साक्ष्यों में दो मोबाइल फोन, आपत्तिजनक चैट रिकॉर्ड, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज़ और वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं।
आगे की जाँच
पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी रखे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि म्यूल खातों की पूरी श्रृंखला को उजागर करने के लिए बैंकिंग चैनलों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जाँच की जा रही है।