14 अगस्त 2026
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लोन धोखाधड़ी में दिल्ली पुलिस ने 2 साइबर अपराधी गिरफ्तार, ₹1.10 लाख की ठगी का पर्दाफाश

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लोन धोखाधड़ी में दिल्ली पुलिस ने 2 साइबर अपराधी गिरफ्तार, ₹1.10 लाख की ठगी का पर्दाफाश

सारांश

बैंक अधिकारी बनकर लोन आवेदकों को ठगने वाले दो साइबर अपराधियों को दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद से दबोचा। ₹1.10 लाख की ठगी के इस मामले में फर्जी एम्प्लॉई आईडी और ग्राहकों की सूची बरामद होना बताती है कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर सक्रिय था।

मुख्य बातें

शाहदरा साइबर पुलिस ने 14 अगस्त 2026 को लोन धोखाधड़ी में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपी रवि कुमार (26) और अरुण सिंह (लगभग 23) दोनों इटावा, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।
पीड़ित कृष्ण अवतार सहगल से ₹1,10,000 की ठगी की गई; अरुण के खाते में ₹70,000 जमा मिले।
अरुण सिंह ने यस बैंक कर्मचारी शिवम ठाकुर की फर्जी पहचान अपनाई; फर्जी एम्प्लॉई आईडी कार्ड बरामद।
आरोपी के मोबाइल से ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी की सूची मिली, जिससे व्यापक साजिश की आशंका।
बरामदगी में 2 मोबाइल फोन, 2 सिम कार्ड और 1 एटीएम कार्ड शामिल।

शाहदरा साइबर पुलिस स्टेशन ने 14 अगस्त 2026 को लोन धोखाधड़ी के एक संगठित मामले में दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने बैंक अधिकारी बनकर एक पीड़ित से ₹1 लाख 10 हजार की ठगी की थी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रवि कुमार (26) और अरुण सिंह (लगभग 23) के रूप में हुई है, दोनों इटावा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और गाजियाबाद के वैशाली इलाके में किराए के मकानों में रह रहे थे।

मामले का मूल घटनाक्रम

शाहदरा निवासी कृष्ण अवतार सहगल ने पुलिस को बताया कि वे बैंक लोन की प्रक्रिया में थे, तभी एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को लोन-प्रोसेसिंग अधिकारी बताया और फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस तथा लोन अप्रूवल के नाम पर बार-बार भुगतान करवाया। पीड़ित को बाद में पता चला कि कॉलर का किसी बैंक से कोई संबंध नहीं था और उनके साथ ₹1,10,000 की धोखाधड़ी हो चुकी है। इस शिकायत पर साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा में एफआईआर दर्ज की गई और आरोपियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम गठित की गई।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

जांच में सामने आया कि धोखाधड़ी वाली कॉल के लिए इस्तेमाल मोबाइल नंबर रवि कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड थे। वह दिल्ली में साइबर अपराध के एक अन्य मामले में भी संदिग्ध पाया गया। पूछताछ में रवि ने बताया कि ठगी के बाद सिम कार्ड नष्ट कर दिए गए थे। उसने ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक खातों का इंतजाम किया और पैसे अपने साथी को ट्रांसफर किए। सीसीटीवी फुटेज में रवि को एटीएम से धोखाधड़ी की रकम निकालते हुए स्पष्ट देखा गया।

दूसरे आरोपी अरुण सिंह ने यस बैंक के कर्मचारी शिवम ठाकुर की फर्जी पहचान अपनाकर पीड़ित से बात की थी। उसके मोबाइल फोन से शिवम ठाकुर के नाम का एक फर्जी एम्प्लॉई आईडी कार्ड भी बरामद हुआ। अरुण के पास मिले एटीएम कार्ड से जुड़े खाते में ठगी की रकम का लगभग ₹70,000 जमा पाया गया।

बरामदगी और तकनीकी साक्ष्य

दोनों आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और एक एटीएम कार्ड बरामद किए गए। अरुण सिंह के मोबाइल फोन की जांच में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी और फोन नंबरों की एक सूची मिली, जिससे संकेत मिलता है कि लोन के लिए आवेदन करने वाले अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया हो सकता है या बनाने की योजना थी। इस सूची की जांच जारी है।

ठगी का तरीका

आरोपियों का मोडस ऑपरेंडी सुनियोजित था। वे लोन के लिए आवेदन करने वाले संभावित पीड़ितों को चिन्हित करते थे और बैंक अधिकारी या लोन-प्रोसेसिंग एग्जीक्यूटिव बनकर उनसे संपर्क करते थे। प्रोसेसिंग, डॉक्यूमेंटेशन और अप्रूवल के नाम पर झूठे चार्ज बताकर पीड़ितों को अपने खातों में रकम ट्रांसफर करवाते थे। पैसे मिलने के बाद वे या तो संपर्क तोड़ लेते थे या और अधिक रकम ऐंठने के लिए नई बहानेबाजी करते रहते थे।

आगे की जांच

पुलिस अब फर्जी पहचान सामग्री — विशेषकर शिवम ठाकुर के नाम के एम्प्लॉई आईडी कार्ड — के स्रोत, उद्देश्य और उपयोग के दायरे की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद ग्राहक सूची का उपयोग अन्य साइबर अपराधों में हुआ है या नहीं। मामले में आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है — जिसकी जांच अभी पूरी नहीं हुई है। चिंताजनक यह है कि फर्जी एम्प्लॉई आईडी कार्ड की उपलब्धता बताती है कि बैंकिंग संस्थाओं की आंतरिक जानकारी तक इन गिरोहों की पहुँच हो सकती है। जब तक लोन-आवेदन डेटाबेस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल नहीं उठाए जाते, ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाहदरा साइबर पुलिस ने किस मामले में गिरफ्तारी की?
शाहदरा साइबर पुलिस ने लोन-प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ₹1,10,000 की ठगी करने वाले दो आरोपियों — रवि कुमार और अरुण सिंह — को गिरफ्तार किया। दोनों बैंक अधिकारी बनकर लोन आवेदकों से संपर्क करते थे।
आरोपियों ने ठगी का तरीका कैसे अपनाया?
आरोपी लोन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को चिन्हित कर उन्हें बैंक अधिकारी बनकर फोन करते थे और प्रोसेसिंग, डॉक्यूमेंटेशन व अप्रूवल चार्ज के नाम पर रकम ट्रांसफर करवाते थे। पैसे मिलते ही संपर्क तोड़ लेते थे या और पैसे ऐंठने की कोशिश करते थे।
क्या इस गिरोह के और पीड़ित हो सकते हैं?
अरुण सिंह के मोबाइल फोन से ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी और फोन नंबरों की एक सूची बरामद हुई है। पुलिस जांच कर रही है कि क्या अन्य लोन आवेदकों को भी निशाना बनाया गया था या बनाने की योजना थी।
अरुण सिंह ने किसकी फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया?
अरुण सिंह ने यस बैंक के कर्मचारी शिवम ठाकुर की पहचान अपनाकर पीड़ित से बात की। उसके मोबाइल फोन में शिवम ठाकुर के नाम का एक फर्जी एम्प्लॉई आईडी कार्ड भी मिला।
गिरफ्तारी में क्या सबूत अहम रहे?
सीसीटीवी फुटेज में रवि कुमार को एटीएम से ठगी की रकम निकालते देखा गया। इसके अलावा धोखाधड़ी वाले मोबाइल नंबर उसके नाम पर रजिस्टर्ड थे और वह दिल्ली के एक अन्य साइबर अपराध मामले से भी जुड़ा पाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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