दिल्ली पुलिस ने 10 लाख की ऑनलाइन ठगी का किया पर्दाफाश, तीन आरोपी गिरफ्तार
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नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा ने एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी मामले का खुलासा करते हुए तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने एक व्यक्ति को हाई रिटर्न का झांसा देकर 10 लाख रुपए की ठगी की थी। साइबर पुलिस थाना शाहदरा की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले का खुलासा किया और कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए।
यह मामला ई-एफआईआर नंबर 24/26 दिनांक 2 फरवरी 2026 के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता अमित कुमार जैन, जो सुभाष पार्क, शाहदरा के निवासी हैं, ने बताया कि दिसंबर 2025 में वह एक व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े, जहाँ अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें शेयर बाजार में निवेश पर गारंटीड और उच्च रिटर्न का लालच दिया। आरोपियों की बातों पर विश्वास कर उन्होंने कुल 10 लाख रुपए का निवेश किया। लेकिन पैसे जमा करने के बाद न तो कोई रिटर्न मिला और न ही रकम वापस की गई। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें सभी माध्यमों से ब्लॉक कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उन्हें धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें एसआई सचिन कुमार, एचसी अजीत, एचसी पुनीत तेवतिया, एचसी राजेश और एचसी प्रवीण शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में टीम ने तकनीकी और डिजिटल विश्लेषण कर आरोपियों की पहचान की। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते में ट्रांसफर किया गया था, जिसे रोहिणी क्षेत्र से संचालित किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस टीम ने गोपाल विहार, विजय विहार फेज-2, रोहिणी में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुमित (26), संदीप (42) और कमल कुमार (41) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी दिल्ली के रोहिणी के निवासी हैं। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से तीनों की संलिप्तता की पुष्टि हुई। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी सीधे लोगों को ठगने के बजाय म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर असली अपराधियों की पहचान छुपाई जाती थी। यह गिरोह साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा बनकर काम कर रहा था।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन, 6 डेबिट कार्ड, व्हाट्सऐप चैट, बैंक विवरण सहित डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जो इस पूरे रैकेट के महत्वपूर्ण सबूत माने जा रहे हैं। पुलिस अब इस साइबर ठगी गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने, पूरी मनी ट्रेल को ट्रेस करने और पीड़ित की रकम बरामद करने के प्रयास में जुटी है। साथ ही, ऐसे ऑनलाइन निवेश घोटालों के बड़े नेटवर्क का भी खुलासा करने की कोशिश की जा रही है।