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₹2.10 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी: म्यूल अकाउंट धारक अमन कुमार गिरफ्तार, 6 राज्यों में मामले दर्ज

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₹2.10 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी: म्यूल अकाउंट धारक अमन कुमार गिरफ्तार, 6 राज्यों में मामले दर्ज

सारांश

नोएडा में ₹2.10 करोड़ की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी का नेटवर्क और उजागर हुआ — पुलिस ने म्यूल अकाउंट धारक अमन कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपियों के खाते 6 राज्यों के साइबर ठगी मामलों से जुड़े हैं, जो एक सुनियोजित बहु-राज्यीय गिरोह की ओर इशारा करते हैं।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 26 मई को ₹2.10 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी में तीसरा आरोपी अमन कुमार (चरखी दादरी, हरियाणा) गिरफ्तार किया।
आरोपी का बैंक खाता म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल हुआ; इसमें ठगी से जुड़े करीब ₹2.20 लाख ट्रांसफर हुए थे।
ठगी 10 अप्रैल को हुई — अपराधियों ने खुद को NIA पुणे का अधिकारी बताकर फर्जी RBI पत्र और नकली वारंट भेजे।
आरोपियों के खाते उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, केरल और कर्नाटक में दर्ज मामलों से जुड़े हैं।
इससे पहले इस मामले में दो अन्य आरोपी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं।
पुलिस ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने 26 मई को ₹2.10 करोड़ की 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान हरियाणा के चरखी दादरी निवासी अमन कुमार पुत्र संजय कुमार (26 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसके बैंक खाते का उपयोग साइबर अपराधियों ने म्यूल अकाउंट के रूप में ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया था। इससे पहले पुलिस इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई ठगी

पुलिस के अनुसार, 10 अप्रैल को साइबर अपराधियों ने पीड़ित से संपर्क कर खुद को एनआईए (NIA), पुणे का अधिकारी बताया। आरोपियों ने पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसके आधार कार्ड से जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल टेरर फंडिंग में हुआ है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप के ज़रिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नाम से फर्जी पत्र और नकली वारंट भेजकर पीड़ित को मानसिक रूप से भयभीत किया। 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर पीड़ित से अलग-अलग माध्यमों से कुल ₹2 करोड़ 10 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई।

जाँच और गिरफ्तारी

मुकदमा दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के विश्लेषण के आधार पर जाँच आगे बढ़ाई। जाँच में सामने आया कि अमन कुमार के बैंक खाते में साइबर ठगी से संबंधित करीब ₹2.20 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। पुलिस ने 26 मई को उसे गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिन्हें साइबर अपराधी ठगी की रकम को विभिन्न खातों में बाँटकर जाँच एजेंसियों की नज़र से बचाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह मामला इस बात की पुष्टि करता है कि संगठित साइबर गिरोह किस तरह निर्दोष लोगों के खातों का दुरुपयोग करते हैं।

बहु-राज्यीय नेटवर्क का खुलासा

जाँच में यह भी उजागर हुआ है कि आरोपियों के खातों से जुड़े मामले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, केरल और कर्नाटक समेत कई राज्यों में दर्ज हैं। यह इस बात का संकेत है कि यह ठगी गिरोह एक सुनियोजित और बहु-राज्यीय नेटवर्क के ज़रिए काम कर रहा था।

पुलिस की जनता से अपील

साइबर क्राइम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी — चाहे वह पुलिस हो, सीबीआई, ईडी या कोई अन्य — फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। पुलिस ने अपील की है कि ऐसे किसी भी प्रयास की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ या साइबर पोर्टल पर जानकारी दें। साथ ही अपने बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम कार्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

इस मामले में जाँच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस सक्रिय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ठगी के मुख्य सूत्रधार — जिन्होंने NIA और RBI की आड़ में पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ा — अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं। म्यूल अकाउंट धारकों की गिरफ्तारी ज़रूरी है, पर यह गिरोह के निचले पायदान तक ही पहुँचती है। 6 राज्यों में फैला नेटवर्क यह भी बताता है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर उद्योग है जिसे तोड़ने के लिए राज्य पुलिस बलों के बीच समन्वित जाँच अनिवार्य है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी क्या होती है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी खुद को CBI, NIA, ED या पुलिस का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को 'गिरफ्तारी' का डर दिखाते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। वास्तव में कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती।
नोएडा की इस ठगी में क्या हुआ था?
10 अप्रैल को साइबर अपराधियों ने पीड़ित को NIA पुणे का अधिकारी बनकर संपर्क किया और आधार कार्ड से टेरर फंडिंग का आरोप लगाया। व्हाट्सएप पर RBI के नाम से फर्जी पत्र और नकली वारंट भेजकर पीड़ित से ₹2.10 करोड़ अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
म्यूल अकाउंट क्या होता है और इसमें अमन कुमार की क्या भूमिका थी?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर जाँच एजेंसियों से बचने के लिए करते हैं। अमन कुमार के खाते में ठगी से जुड़े करीब ₹2.20 लाख ट्रांसफर हुए थे।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक इस मामले में कुल तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। पहले दो आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, और 26 मई को अमन कुमार को तीसरे आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया।
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर भरोसा न करें और कभी भी बैंक खाता, OTP या ATM जानकारी साझा न करें। ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएँ।
राष्ट्र प्रेस
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