नोएडा में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: ₹1.29 करोड़ मामले में 5वाँ आरोपी गिरफ्तार, 12 बैंक खाते किराये पर देता था
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 29 मई 2026 को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1 करोड़ 29 लाख 61 हजार 962 रुपए की ठगी से जुड़े मामले में पाँचवाँ आरोपी गिरफ्तार किया है। पश्चिमी दिल्ली के निहाल विहार निवासी 21 वर्षीय आकाश पुत्र नरेश को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी जाँच के आधार पर पकड़ा गया। आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराने के नेटवर्क का हिस्सा था।
ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने पीड़ित को फोन कर स्वयं को ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि पीड़ित के मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो भेजे गए हैं और इस मामले की जाँच मुंबई क्राइम ब्रांच तथा सीबीआई द्वारा की जा रही है। कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और जाँच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹1.29 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर करा ली गई।
आरोपी की भूमिका
जाँच में सामने आया कि आरोपी आकाश मजदूरों और अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को प्रत्येक खाते के बदले ₹50 हजार लेता था। अब तक वह करीब 12 बैंक खाते ठगों को उपलब्ध करा चुका है। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजकर जाँच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए किया जाता था।
आरोपी के स्वयं के बैंक खाते के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं — कर्नाटक से चार, महाराष्ट्र से तीन, केरल से दो, तथा तेलंगाना, हरियाणा और गुजरात से एक-एक शिकायत। आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
कानूनी कार्रवाई
पीड़ित की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।
आम जनता के लिए चेतावनी
साइबर क्राइम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी — चाहे वह पुलिस हो, सीबीआई हो, ईडी हो या कोई अन्य — फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। पुलिस ने अपील की है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी किसी भी बात पर विश्वास न करें और यदि कोई अधिकारी बनकर डराने का प्रयास करे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या निकटतम पुलिस थाने में सूचना दें।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने के प्रयास में हैं।