16 जुलाई 2026
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नोएडा में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: ₹1.29 करोड़ मामले में 5वाँ आरोपी गिरफ्तार, 12 बैंक खाते किराये पर देता था

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नोएडा में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: ₹1.29 करोड़ मामले में 5वाँ आरोपी गिरफ्तार, 12 बैंक खाते किराये पर देता था

सारांश

नोएडा में ₹1.29 करोड़ की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी का पाँचवाँ आरोपी गिरफ्तार — यह 21 वर्षीय युवक मजदूरों के बैंक खाते ₹50 हजार प्रति खाते की दर पर साइबर ठगों को किराये पर देता था। 12 खाते, 6 राज्यों में शिकायतें — यह मामला देशव्यापी साइबर नेटवर्क की एक कड़ी है।

मुख्य बातें

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 29 मई 2026 को पश्चिमी दिल्ली के निहाल विहार निवासी 21 वर्षीय आकाश को गिरफ्तार किया।
आरोपी प्रत्येक बैंक खाते के बदले ₹50 हजार लेता था; अब तक 12 बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध करा चुका है।
इस मामले में पीड़ित से ₹1 करोड़ 29 लाख 61 हजार 962 रुपए की ठगी की गई थी।
आरोपी के खाते के विरुद्ध 6 राज्यों — कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना, हरियाणा और गुजरात — से शिकायतें दर्ज हैं।
इस प्रकरण में अब तक कुल 5 आरोपी गिरफ्तार; मामला BNS और IT Act धारा 66D के तहत दर्ज।
पुलिस ने स्पष्ट किया: कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं कर सकती।

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 29 मई 2026 को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1 करोड़ 29 लाख 61 हजार 962 रुपए की ठगी से जुड़े मामले में पाँचवाँ आरोपी गिरफ्तार किया है। पश्चिमी दिल्ली के निहाल विहार निवासी 21 वर्षीय आकाश पुत्र नरेश को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी जाँच के आधार पर पकड़ा गया। आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते किराये पर उपलब्ध कराने के नेटवर्क का हिस्सा था।

ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने पीड़ित को फोन कर स्वयं को ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताया। ठगों ने दावा किया कि पीड़ित के मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो भेजे गए हैं और इस मामले की जाँच मुंबई क्राइम ब्रांच तथा सीबीआई द्वारा की जा रही है। कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और जाँच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹1.29 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर करा ली गई।

आरोपी की भूमिका

जाँच में सामने आया कि आरोपी आकाश मजदूरों और अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को प्रत्येक खाते के बदले ₹50 हजार लेता था। अब तक वह करीब 12 बैंक खाते ठगों को उपलब्ध करा चुका है। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजकर जाँच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए किया जाता था।

आरोपी के स्वयं के बैंक खाते के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं — कर्नाटक से चार, महाराष्ट्र से तीन, केरल से दो, तथा तेलंगाना, हरियाणा और गुजरात से एक-एक शिकायत। आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

कानूनी कार्रवाई

पीड़ित की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में पुलिस पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।

आम जनता के लिए चेतावनी

साइबर क्राइम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी — चाहे वह पुलिस हो, सीबीआई हो, ईडी हो या कोई अन्य — फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। पुलिस ने अपील की है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी किसी भी बात पर विश्वास न करें और यदि कोई अधिकारी बनकर डराने का प्रयास करे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर या निकटतम पुलिस थाने में सूचना दें।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने के प्रयास में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क है। सवाल यह है कि ₹50 हजार प्रति खाते की दर पर चल रहे इस धंधे को रोकने के लिए बैंकों की KYC प्रक्रिया कहाँ विफल हो रही है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर ठगी का तरीका है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या TRAI जैसी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर 'गिरफ्तार' होने का भय दिखाते हैं। वास्तव में कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती।
नोएडा डिजिटल अरेस्ट मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
इस मामले में अब तक कुल 5 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। पहले चार आरोपियों को पहले ही जेल भेजा जा चुका था, और 29 मई 2026 को पाँचवाँ आरोपी आकाश गिरफ्तार किया गया।
आरोपी आकाश ने साइबर ठगी में क्या भूमिका निभाई?
आरोपी आकाश मजदूरों और अन्य लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को ₹50 हजार प्रति खाते की दर पर किराये पर देता था। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को ट्रांसफर कर जाँच एजेंसियों को गुमराह करने में किया जाता था।
डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी से कैसे बचें?
यदि कोई फोन या वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर डराए तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएँ। कभी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर किसी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर न करें।
इस मामले में क्या कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा IT Act की धारा 66D के तहत दर्ज किया गया है। धारा 66D कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से धोखाधड़ी से व्यक्तित्व का प्रतिरूपण करने से संबंधित है।
राष्ट्र प्रेस
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