नोएडा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लाखों की साइबर ठगी करने वाले अपराधी पकड़े गए

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नोएडा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लाखों की साइबर ठगी करने वाले अपराधी पकड़े गए

सारांश

नोएडा में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। दो आरोपियों ने खुद को ट्राई अधिकारी बताकर लोगों से पैसे ठगे। जानें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने साइबर ठगी के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी खुद को ट्राई अधिकारी बताकर लोगों को ठगते थे।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
साइबर ठगी से संबंधित 10.95 लाख रुपये इनके खातों में प्राप्त हुए हैं।
सार्वजनिक सतर्कता आवश्यक है, अनजान कॉल पर भरोसा न करें।

नोएडा, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गौतमबुद्धनगर पुलिस ने साइबर ठगी के एक गंभीर मामले का खुलासा करते हुए दो कुशल अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये संदिग्ध स्वयं को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का अधिकारी बताकर लोगों में भय उत्पन्न करते थे और "डिजिटल अरेस्ट" के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करते थे।

पुलिस ने इनके पास से घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई थी कि 13 मार्च 2026 को अज्ञात व्यक्तियों ने उसे कॉल कर बताया कि वे ट्राई के अधिकारी हैं। आरोपियों ने पीड़ित को यह कहकर डरा दिया कि उसके मोबाइल नंबर से अश्लील वीडियो भेजे जा रहे हैं और इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई द्वारा की जा रही है।

इसके बाद आरोपियों ने "डिजिटल अरेस्ट" का भय दिखाकर जांच के नाम पर उससे लाखों रुपये ठग लिए। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और एक टीम का गठन किया। तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 19 मार्च 2026 को पुलिस ने सेक्टर-63 क्षेत्र से दो आरोपियों- रिषभ तिवारी (21 वर्ष) और कुवंर शुक्ला (20 वर्ष), दोनों निवासी अमेठी को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में पता चला कि आरोपी एक संगठित साइबर गिरोह से जुड़े हुए हैं और ठगी करने वाले अन्य अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इनके खातों में साइबर ठगी से संबंधित लगभग 10.95 लाख रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं, इनके संयुक्त खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार और जम्मू-कश्मीर में कुल 6 शिकायतें दर्ज हैं।

इन मामलों में अब तक करीब 4.17 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें। "डिजिटल अरेस्ट" जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती है और कोई भी एजेंसी फोन पर गिरफ्तारी नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति इस तरह से डराकर पैसे मांगता है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डिजिटल अरेस्ट क्या है?
डिजिटल अरेस्ट एक फर्जी प्रक्रिया है, जिसका अस्तित्व नहीं है। किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन पर गिरफ्तारी नहीं की जाती।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर विश्वास न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
क्या मुझे साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करना चाहिए?
यदि आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं और साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
क्या पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया?
हाँ, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो संगठित साइबर गिरोह से जुड़े हुए हैं।
क्या ठगी की राशि का पता चला है?
जांच में अब तक करीब 4.17 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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