क्या दिल्ली में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
- बुजुर्गों को ठगने के लिए ठगों द्वारा नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
- पुलिस ने ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
- सुरक्षा के लिए लोगों को जागरूक करना आवश्यक है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने एक बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक निजी बैंक के दो कर्मचारियों समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
ये बैंक कर्मचारी फर्जी दस्तावेज पर बैंक खाते खोलकर साइबर अपराध से मिली रकम को अवैध रूप से इधर-उधर भेजने में मदद कर रहे थे।
80 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि साइबर ठगों ने उन्हें 7 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। ठगों ने व्हाट्सऐप कॉल के जरिए खुद को टीआरएआई, दिल्ली पुलिस और सीबीआई के अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर और आधार कार्ड गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ा है और उनके खिलाफ जांच चल रही है। इस झांसे में लेकर ठगों ने बुजुर्ग से 96 लाख रुपए की ठगी कर ली।
पीड़ित और उनकी पत्नी को 24 घंटे व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने को कहा गया। ठगों ने नकली सीबीआई कार्यालय जैसा माहौल बनाया और एक व्यक्ति को वकील बनाकर भेजा, ताकि पीड़ित पर और दबाव डाला जा सके।
डर के कारण पीड़ित को अपनी एफडी तुड़वानी पड़ी। पूरी जमा पूंजी ट्रांसफर करनी पड़ी और यहां तक कि गोल्ड लोन भी लेना पड़ा। उन्हें झूठा भरोसा दिया गया कि जांच के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे।
बुजुर्ग की शिकायत पर 4 नवंबर 2025 को आईएफएसओ थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। आईएफएसओ यूनिट की एक विशेष टीम ने बैंक खातों और डिजिटल सबूतों की जांच की। तकनीकी जांच और सर्विलांस के जरिए सबसे पहले हिसार, हरियाणा निवासी प्रदीप कुमार (40) को पकड़ा गया। इसके बाद हिसार निवासी नमनदीप मलिक (23) को गिरफ्तार किया गया।
आगे की जांच में 36 वर्षीय शशिकांत पटनायक (भुवनेश्वर, ओडिशा) को गिरफ्तार किया गया, जो फर्जी जीएसटी पंजीकरण और पैसों को कई खातों में घुमाने का काम करता था।
इसके बाद यह सामने आया कि यस बैंक, तिलक नगर शाखा के दो कर्मचारियों—सागरपुर, दिल्ली निवासी नीलेश कुमार (38) और उत्तम नगर, दिल्ली निवासी चंदन कुमार (38)—ने फर्जी दस्तावेज पर खाते खुलवाए, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम निकालने में किया गया। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
यह गिरोह खुद को सीबीआई, कस्टम्स और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर कॉल करता था और धमकी देकर पीड़ितों को डराता था। कुछ समय बाद उन्हें यह कहकर भरोसे में लिया जाता था कि यह मामला गलती से दर्ज हुआ है और जांच के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा। पीड़ितों से कहा जाता था कि वे जांच के लिए अपनी सारी रकम ‘आरबीआई द्वारा बताए गए सुरक्षित खातों’ में जमा कर दें। झूठा वादा किया जाता था कि जांच के बाद पैसा वापस मिल जाएगा।
पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि वे साइबर अपराधियों से सावधान रहें।