मुजफ्फरपुर में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का भंडाफोड़: ₹17 लाख की ठगी में तीन गिरफ्तार

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मुजफ्फरपुर में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का भंडाफोड़: ₹17 लाख की ठगी में तीन गिरफ्तार

सारांश

मुजफ्फरपुर में 73 वर्षीय बुजुर्ग से ₹17 लाख की 'डिजिटल अरेस्ट' ठगी — CBI और पुलिस का नकली रूप धरने वाले तीन जालसाज़ गिरफ्तार। SIT जांच में खुलासा: इन्हीं खातों से देशभर में कई साइबर फ्रॉड के तार जुड़े हैं, अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका।

Key Takeaways

मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस ने 1 मई 2026 को 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम गिरोह का भंडाफोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पीड़ित भोला प्रसाद महतो (73) से 10 अप्रैल 2026 को RTGS के ज़रिए ₹17 लाख की ठगी हुई। जालसाजों ने 5 अप्रैल 2026 से पुलिस व CBI अधिकारी बनकर वीडियो कॉल कर पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दी। पुलिस ने मामला संख्या 58/26 दर्ज कर SIT गठित की; आरोपियों से मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड बरामद। प्रारंभिक जांच में आरोपियों के बैंक खाते देशभर के कई साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़े पाए गए; अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका। फरार सदस्यों की तलाश में छापेमारी जारी ; नागरिकों से 1930 पर संदिग्ध कॉल की सूचना देने की अपील।

मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस स्टेशन ने 1 मई 2026 को एक संगठित 'डिजिटल अरेस्ट' गिरोह का पर्दाफाश किया, जो पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अधिकारी बनकर बुजुर्गों को धमकी देकर लाखों रुपए ऐंठ रहा था। मुशहरी निवासी 73 वर्षीय भोला प्रसाद महतो की शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में पुलिस ने ब्रजेश कुमार, कृष्ण कुमार और विक्रम कुमार को गिरफ्तार किया है।

कैसे हुई ठगी

पीड़ित भोला प्रसाद महतो ने बताया कि 5 अप्रैल 2026 से उन्हें पुलिस और CBI अधिकारी बताने वाले अज्ञात व्यक्तियों के कई वीडियो कॉल आने लगे। जालसाजों ने कथित तौर पर उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देकर मानसिक रूप से भयभीत किया। दबाव में आकर महतो ने 10 अप्रैल 2026 को RTGS के ज़रिए भगवानपुर स्थित फेडरल बैंक शाखा में ब्रजेश कुमार के खाते में ₹17 लाख स्थानांतरित कर दिए।

13 अप्रैल 2026 को जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने तत्काल अपने बैंक और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) पर सूचना दी। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है।

पुलिस की कार्रवाई

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस ने मामला संख्या 58/26 दर्ज किया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने तकनीकी निगरानी, कॉल विवरण विश्लेषण और बैंक लेनदेन की गहन जांच के ज़रिए तीनों आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड बरामद किए। गौरतलब है कि यह गिरोह कोई एकाकी अपराध नहीं कर रहा था — प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इन बैंक खातों का संबंध देशभर में कई अन्य साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं से है।

व्यापक नेटवर्क का संदेह

पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल करके विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहा है। फरार सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।

नागरिकों के लिए सतर्कता की अपील

अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। पुलिस की सलाह है कि पुलिस, CBI या अन्य सरकारी अधिकारी बताने वाले किसी भी अनचाहे फोन या वीडियो कॉल पर भरोसा न करें और संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत 1930 पर सूचित करें। यह मामला बिहार में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और डिजिटल जागरूकता की ज़रूरत को एक बार फिर रेखांकित करता है।

Point of View

और मुजफ्फरपुर का यह मामला उस बड़े संकट की एक छोटी-सी झलक है। चिंताजनक बात यह है कि जांच में इन्हीं बैंक खातों का देशभर के कई फ्रॉड से जुड़ाव सामने आया — यानी यह कोई अकेला गिरोह नहीं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क की कड़ी हो सकती है। वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाना इस गिरोह की सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है, क्योंकि वे डिजिटल धमकियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। असली सवाल यह है कि क्या तीन गिरफ्तारियों से यह नेटवर्क टूटेगा, या मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं — और जब तक वे पकड़े नहीं जाते, यह ठगी जारी रह सकती है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में जालसाज़ पुलिस, CBI या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को झूठे मामलों में 'डिजिटल रूप से गिरफ्तार' होने की धमकी देते हैं। भयभीत होकर पीड़ित उनके निर्देश पर बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देता है।
मुजफ्फरपुर 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए और कौन हैं?
मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस ने तीन आरोपियों — ब्रजेश कुमार, कृष्ण कुमार और विक्रम कुमार — को गिरफ्तार किया है। ये तीनों ₹17 लाख की ठगी में संलिप्त पाए गए हैं।
पीड़ित भोला प्रसाद महतो से कैसे और कितने रुपए की ठगी हुई?
73 वर्षीय भोला प्रसाद महतो को 5 अप्रैल 2026 से पुलिस और CBI अधिकारी बनकर वीडियो कॉल किए गए और 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी दी गई। दबाव में आकर उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को RTGS के ज़रिए ₹17 लाख ब्रजेश कुमार के खाते में ट्रांसफर कर दिए।
साइबर ठगी होने पर क्या करें और कहाँ शिकायत करें?
साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और अपने बैंक को सूचित करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी।
क्या यह गिरोह सिर्फ बिहार में सक्रिय था?
प्रारंभिक जांच के अनुसार इस मामले में इस्तेमाल बैंक खाते देशभर की कई साइबर धोखाधड़ी घटनाओं से जुड़े पाए गए हैं। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर काम करता था और फरार सदस्यों की तलाश जारी है।
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