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नोएडा साइबर क्राइम: फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को बैंक खाता देने वाला गिरफ्तार, ₹1.78 करोड़ का लेनदेन उजागर

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नोएडा साइबर क्राइम: फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को बैंक खाता देने वाला गिरफ्तार, ₹1.78 करोड़ का लेनदेन उजागर

सारांश

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को 10% कमीशन पर बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले अमलेश प्रसाद को गिरफ्तार किया। उसके खाते में ₹1.78 करोड़ की ठगी की रकम और देशभर में 26 मुकदमे — यह महज एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक बहुराज्यीय साइबर नेटवर्क की परत-दर-परत उघड़ रही है।

मुख्य बातें

3 जुलाई 2026 को नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने अमलेश प्रसाद (उम्र करीब 41 वर्ष, सूरजपुर, नोएडा) को गिरफ्तार किया।
आरोपी साइबर गिरोह को 10% कमीशन पर बैंक खाता उपलब्ध कराता था; खाते में कुल ₹1.78 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन।
इस विशेष मामले से संबंधित ₹15.50 लाख की राशि उसी खाते में ट्रांसफर हुई थी।
आरोपी के खिलाफ देशभर में 26 आपराधिक मुकदमे दर्ज — तेलंगाना (8), कर्नाटक (6), तमिलनाडु (3) सहित।
मामला बीएनएस धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट धारा 66डी के तहत दर्ज।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के स्रोत की जांच कर रही है।

नोएडा के थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर पुलिस ने 3 जुलाई 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सहयोगी अमलेश प्रसाद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के बैंक खाते में विभिन्न साइबर ठगी की घटनाओं से जुड़े कुल ₹1.78 करोड़ का लेनदेन सामने आया है।

मामले का घटनाक्रम

इस प्रकरण की शुरुआत 2 मई 2025 को हुई, जब एक पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर खुद को शेयर मार्केट विशेषज्ञ बताने वाले साइबर अपराधियों ने अधिक मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद आरोपियों ने एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करवाया और लाखों रुपये की ठगी कर ली। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, बैंक खातों के विश्लेषण और तकनीकी जांच से पुलिस अमलेश प्रसाद तक पहुंची, जो सूरजपुर क्षेत्र, नोएडा का निवासी है और जिसकी उम्र करीब 41 वर्ष बताई गई है। गिरफ्तारी के समय उसके कब्जे से घटना में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।

आरोपी की भूमिका और आपराधिक इतिहास

पुलिस जांच में सामने आया कि अमलेश प्रसाद साइबर ठगी करने वाले गिरोह को 10 प्रतिशत कमीशन के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध कराता था। इसी खाते में इस विशेष मामले से संबंधित ₹15.50 लाख की राशि भी ट्रांसफर हुई थी। कुल मिलाकर उसके खाते में विभिन्न साइबर ठगी की घटनाओं से ₹1.78 करोड़ जमा हुए।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में कुल 26 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं — तेलंगाना में 8, कर्नाटक में 6, तमिलनाडु में 3, केरल और महाराष्ट्र में 2-2, तथा हरियाणा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में एक-एक मुकदमा। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि आरोपी लंबे समय से एक सुव्यवस्थित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा था।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना साइबर क्राइम गौतमबुद्धनगर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज किया है। अब जांच का दायरा गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के स्रोत तक बढ़ाया जा रहा है।

साइबर पुलिस की जनता से अपील

साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है कि किसी भी व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से निवेश करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच-पड़ताल करें। अधिक मुनाफे का लालच देने वाले प्रस्तावों से सतर्क रहें और अपना ओटीपी, पिन, सीवीवी या कोई भी बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। आने वाले दिनों में पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बैंक खाते किराये पर देकर कमीशन कमाया जाता है। 26 राज्यों में दर्ज मुकदमे बताते हैं कि यह कोई स्थानीय मामला नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित अखिल भारतीय नेटवर्क है। असली सवाल यह है कि इतने मुकदमों के बावजूद आरोपी इतने वर्षों तक सक्रिय कैसे रहा — और क्या राज्यों के बीच साइबर अपराध की सूचना-साझेदारी वाकई उतनी प्रभावी है जितनी होनी चाहिए।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
पुलिस ने अमलेश प्रसाद को गिरफ्तार किया, जो फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चलाने वाले साइबर गिरोह को 10% कमीशन पर अपना बैंक खाता उपलब्ध कराता था। उसके खाते में विभिन्न साइबर ठगी की घटनाओं से ₹1.78 करोड़ का लेनदेन सामने आया है।
फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी कैसे होती थी?
साइबर अपराधी पहले पीड़ितों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते थे और खुद को शेयर मार्केट विशेषज्ञ बताकर अधिक मुनाफे का लालच देते थे। इसके बाद एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप या प्लेटफॉर्म पर निवेश करवाकर लाखों रुपये ठग लेते थे।
आरोपी के खिलाफ कितने और कहाँ-कहाँ मुकदमे दर्ज हैं?
पुलिस के अनुसार अमलेश प्रसाद के खिलाफ देशभर में कुल 26 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं — तेलंगाना में 8, कर्नाटक में 6, तमिलनाडु में 3, केरल और महाराष्ट्र में 2-2, तथा हरियाणा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में एक-एक।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत थाना साइबर क्राइम गौतमबुद्धनगर में मामला दर्ज किया गया है।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?
साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप के जरिए किसी भी निवेश प्रस्ताव की पहले अच्छी तरह जांच करें। अधिक मुनाफे के लालच से सतर्क रहें और अपना ओटीपी, पिन, सीवीवी या कोई भी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
राष्ट्र प्रेस
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