28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली पुलिस ने ₹70 करोड़ के म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, बैंक मैनेजर समेत 10 गिरफ्तार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली पुलिस ने ₹70 करोड़ के म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, बैंक मैनेजर समेत 10 गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते बनाकर दुबई और UK के साइबर ठगों को बेचता था। ₹70 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन, एक बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी और 19 राज्यों में फैला नेटवर्क — यह मामला बैंकिंग तंत्र के भीतर संगठित साइबर अपराध की खतरनाक गहराई उजागर करता है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने ₹70 करोड़ से अधिक के म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
कथित मास्टरमाइंड दिशांत खन्ना और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के ब्रांच मैनेजर कुंदन कुमार समेत 6 मुख्य आरोपी गिरफ्तार; इंडसइंड बैंक से जुड़े 4 अन्य से मुचलका।
बरामद 248 बैंक खाते देश के 19 राज्यों में दर्ज 156 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े।
तैयार बैंक अकाउंट किट दुबई और यूनाइटेड किंगडम में सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों को बेची जाती थीं।
पुलिस ने करीब ₹56 लाख फ्रीज किए; विवादित रकम लगभग ₹37 करोड़ ; दो आरोपी अभी भी फरार , LOC जारी।

दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने 28 जुलाई 2026 को एक बड़े म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, जो देश और विदेश में सक्रिय साइबर ठगों को फर्जी कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराता था। जांच के अनुसार, इस रैकेट के ज़रिए पिछले तीन से चार वर्षों में ₹70 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन किए गए। इस कार्रवाई में 6 मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए गए और इंडसइंड बैंक से जुड़े 4 अन्य से मुचलका भरवाया गया।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

बलजीत नगर, दिल्ली के एक निवासी की शिकायत के बाद यह जांच शुरू हुई। शिकायतकर्ता को ऑनलाइन 'वर्क फ्रॉम होम' का प्रलोभन देकर रजिस्ट्रेशन और अकाउंट प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ₹10,000 ट्रांसफर करवाए गए। रकम मिलते ही आरोपियों ने संपर्क तोड़ लिया और बातचीत के सभी डिजिटल रिकॉर्ड मिटा दिए। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।

नेटवर्क का खुलासा और गिरफ्तारियाँ

साइबर विशेषज्ञों ने तकनीकी जांच में पाया कि ठगी की रकम 'डैमियन ट्रेडर्स' नामक एक फर्जी कंपनी के एक्सिस बैंक करंट अकाउंट में पहुँची थी। वित्तीय रिकॉर्ड और ईमेल की जांच से कथित रिक्रूटर मोहित सोनी (26) का सुराग मिला, जिसे 8 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। उसकी पूछताछ से एक बड़े नेटवर्क का पता चला।

इसके बाद शालीमार बाग में किराए की एक जगह पर छापेमारी कर 14 जुलाई को कथित मास्टरमाइंड दिशांत खन्ना (36) और उसके साथी मृदुल (22) को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार छह आरोपियों में दिशांत खन्ना, कुंदन कुमार (35) — जो सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के ब्रांच मैनेजर हैं — मोहित सोनी, योगेश कुमार (35), रंजीत डेमियन एक्का (41) और मृदुल शामिल हैं।

गिरोह का तरीकाकार

जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य आसानी से बहकाए जा सकने वाले लोगों को निशाना बनाते थे, उनके पहचान दस्तावेज जुटाते थे और उनसे फर्जी प्रोप्राइटरशिप फर्म व शेल कंपनियाँ बनवाते थे। इसके बाद बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इन कंपनियों के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे। पुलिस का आरोप है कि कुंदन कुमार ने खाते खुलवाने के बदले अवैध रूप से पैसे लिए, जिनमें से कुछ रकम सीधे उनके निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कराई गई।

शालीमार बाग के ठिकाने पर इंटरनेट बैंकिंग विवरण, चेकबुक, पासबुक, डेबिट कार्ड, रजिस्टर्ड सिम कार्ड और फर्जी कंपनियों की मुहरों सहित पूरी बैंक खाता किट रखी गई थीं। पुलिस के अनुसार, ये तैयार कॉर्पोरेट बैंक अकाउंट किट दुबई और यूनाइटेड किंगडम में सक्रिय साइबर ठगी के गिरोहों को बेची जाती थीं।

बरामदगी और वित्तीय नुकसान

पुलिस ने इस कार्रवाई में 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी कंपनियों की रबर स्टैंप, 55 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, ₹1 लाख नकद और एक कार बरामद की। वित्तीय जांच में पता चला कि बरामद 248 बैंक खाते देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 156 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े थे। इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।

शिकायतों में कुल ₹20 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी का आरोप है, जबकि इन खातों से ₹70 करोड़ से ज़्यादा का लेन-देन हुआ। अधिकारियों ने अब तक करीब ₹56 लाख फ्रीज किए हैं और विवादित कुल रकम लगभग ₹37 करोड़ आंकी गई है।

आगे की जांच

जांच एजेंसियाँ अब भारत में मौजूद एक मुख्य आरोपी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से गिरोह को संचालित करने वाले कथित मास्टरमाइंड की तलाश कर रही हैं — दोनों फिलहाल फरार हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है। यह मामला बैंकिंग तंत्र के भीतर संगठित साइबर अपराध की बढ़ती जड़ों को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्थागत है — एक बैंक ब्रांच मैनेजर और कई बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत यह सवाल उठाती है कि KYC और आंतरिक ऑडिट तंत्र इतने वर्षों तक इसे क्यों नहीं पकड़ सके। यह पहली बार नहीं है जब म्यूल अकाउंट नेटवर्क में बैंक इनसाइडर की भूमिका सामने आई हो — फिर भी बैंकिंग नियामक ढाँचे में इसके लिए जवाबदेही तंत्र अपर्याप्त दिखता है। दुबई और UK तक फैले इस नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियाँ यह भी दर्शाती हैं कि घरेलू साइबर अपराध अब वैश्विक संगठित अपराध का हिस्सा बन चुका है, जिसके लिए केवल गिरफ्तारियाँ नहीं, द्विपक्षीय कानूनी सहयोग और बैंकिंग निगरानी में सुधार ज़रूरी है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यूल अकाउंट सिंडिकेट क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जो साइबर ठगी से प्राप्त रकम को छुपाने और ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इस मामले में गिरोह फर्जी पहचान और शेल कंपनियों के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाता था और फिर उन्हें साइबर ठगों को बेचता था।
दिल्ली पुलिस ने इस सिंडिकेट का पर्दाफाश कैसे किया?
बलजीत नगर के एक निवासी की ऑनलाइन 'वर्क फ्रॉम होम' ठगी की शिकायत से जांच शुरू हुई। साइबर विशेषज्ञों ने वित्तीय रिकॉर्ड और ईमेल की तकनीकी जांच से पहले मोहित सोनी और फिर मास्टरमाइंड दिशांत खन्ना तक पहुँचे।
इस मामले में कितने राज्य और कितनी शिकायतें जुड़ी हैं?
बरामद 248 बैंक खाते देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 156 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हैं। इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं।
क्या इस मामले में बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं?
हाँ, पुलिस के अनुसार सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के ब्रांच मैनेजर कुंदन कुमार ने खाते खुलवाने के बदले अवैध रूप से पैसे लिए। इंडसइंड बैंक के एक मैनेजर, डिप्टी मैनेजर, टेलर और एक इंश्योरेंस एजेंट से भी मुचलका भरवाया गया।
क्या इस सिंडिकेट के अंतरराष्ट्रीय संबंध थे?
पुलिस के अनुसार, तैयार कॉर्पोरेट बैंक अकाउंट किट दुबई और यूनाइटेड किंगडम में सक्रिय साइबर ठगी के गिरोहों को बेची जाती थीं। UAE से गिरोह को संचालित करने वाला एक कथित मास्टरमाइंड अभी भी फरार है और उसके खिलाफ LOC जारी किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले