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क्या दिल्ली में अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ? 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपी गिरफ्तार

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क्या दिल्ली में अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ? 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपी गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो चीन में स्थित ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित था। इस ऑपरेशन में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 15 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। क्या यह मामला साइबर सुरक्षा के लिए एक नया खतरा है?

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।
8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
सिंडिकेट चीनी ऑपरेटरों द्वारा संचालित था।
पुलिस ने ₹15 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया है।
जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा रही है।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिले ने एक विशाल अंतरराज्यीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली-एनसीआर से मुरादाबाद और बरेली (उत्तर प्रदेश) तक फैला हुआ था। यह सिंडिकेट चीन में स्थित ऑपरेटरों द्वारा संचालित था और साइबर धोखाधड़ी से अर्जित धन को म्यूल बैंक अकाउंट्स के माध्यम से लॉन्डर कर रहा था। ऑपरेशन 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने आरोपियों से ₹4,70,000 नकद, 7 बैंक डेबिट कार्ड, 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड बरामद किए। जांच में कुल 85 म्यूल बैंक अकाउंट्स (जैसे कि इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आरबीएल बैंक, फेडरल बैंक, एक्सिस बैंक आदि) का पता चला, जिनसे पैन-इंडिया स्तर पर लगभग ₹15 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन हुए। समन्वय पोर्टल के माध्यम से 600 से अधिक एनसीआरपी शिकायतें इन अकाउंट्स से जुड़ी पाई गईं। जांच जारी है और पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

मामला 20 नवंबर 2025 को पांडव नगर थाने में एफआईआर नंबर 489/2025 धारा 318(4)/112 बीएनएस के तहत दर्ज किया गया। शुरुआत एक तमिलनाडु निवासी सोरना सुंदरी की शिकायत से हुई, जिनके यस बैंक खाते से 26 सितंबर 2025 को ₹6,000 धोखाधड़ी से ट्रांसफर हुए। जांच में यह म्यूल अकाउंट मोहम्मद वसीम (शालीमार गार्डन, साहिबाबाद, गाजियाबाद) के नाम पर पाया गया। वसीम के नाम पर अन्य एक्सिस, फेडरल और आरबीएल बैंक में भी अन्य अकाउंट्स मिले, जिनसे 39 एनसीआरपी शिकायतें जुड़ी थीं।

पूछताछ में पता चला कि आरोपी एक संगठित गैंग का हिस्सा हैं। स्पेशल स्टाफ ईस्ट की टीम (इंस्पेक्टर स्पेशल स्टाफ के नेतृत्व में एसआई अमन, एचसी विनीत, विशाल, हिमांशु आदि) ने अकाउंट स्टेटमेंट, इंटरनेट बैंकिंग आईपी लॉग और ट्रांजैक्शन का गहन विश्लेषण किया। आरोपियों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर सिंडिकेट ग्रुप्स में म्यूल अकाउंट्स, लॉगिन आईडी-पासवर्ड, एपीके फाइल्स और क्रिप्टो वॉलेट आईडी का आदान-प्रदान किया।

चीन के ऑपरेटरों ने टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए म्यूल अकाउंट्स का नियंत्रण किया। उन्होंने एसएमएस फॉरवर्डर एपीके भेजीं, जिन्हें आरोपी पीड़ित अकाउंट्स के रजिस्टर्ड मोबाइल पर इंस्टॉल करते थे। इससे ओटीपी बाईपास होता था और लाभार्थी जोड़कर पैसे तुरंत निकाले जाते थे। फंड्स कई लेयर्स में ट्रांसफर होकर यूएसडीटी, मेटा मास्क, बीटगेट, बाइनेंस आदि प्लेटफॉर्म्स पर क्रिप्टो में बदल दिए जाते थे। आरोपियों को यूएसडीटी में कमीशन मिलता था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद वसीम (25, शालीमार गार्डन, गाजियाबाद), तोसीन मलिक (29, गाजियाबाद), साबिर (36, सीमापुरी, दिल्ली), फुरकान उर्फ डॉ. शिनू (24, बदायूं, यूपी), साहिबे आलम (25, मुरादाबाद), मो. जावेद (30, रामपुर, यूपी), मो. राजा कादरी (35, बरेली), नूर मोहम्मद (24, ठाणे, महाराष्ट्र) के रूप में हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि साइबर सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह साइबर क्राइम सिंडिकेट कितना बड़ा था?
यह सिंडिकेट दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बरेली तक फैला हुआ था और इसमें 85 म्यूल बैंक अकाउंट्स शामिल थे।
गिरफ्तार आरोपियों की संख्या कितनी है?
ऑपरेशन 'साइबर हॉक' के तहत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने ₹4,70,000 नकद, 7 बैंक डेबिट कार्ड, 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड बरामद किए।
इस मामले की शुरुआत कैसे हुई?
यह मामला एक तमिलनाडु निवासी सोरना सुंदरी की शिकायत से शुरू हुआ, जिनके खाते से ₹6,000 धोखाधड़ी से ट्रांसफर हुए थे।
क्या इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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