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क्या दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड के लिए खोली 20 कंपनियों का भंडाफोड़?

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क्या दिल्ली पुलिस ने साइबर फ्रॉड के लिए खोली 20 कंपनियों का भंडाफोड़?

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया है, जिसमें 20 कंपनियों का उपयोग कर ठगे गए पैसे को निकाला जा रहा था। इस घटना में कई आरोपी गिरफ्तार हुए हैं और जांच जारी है।

मुख्य बातें

साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन साइ-हॉक सफल रहा।
शेल कंपनियों का उपयोग धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस ने एक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो ठगे गए पैसे को निकालने के लिए 20 अलग-अलग कंपनियां स्थापित कर रहा था।

दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन साइ-हॉक शुरू किया, जिसका उद्देश्य संगठित साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क को समाप्त करना था। यह ऑपरेशन साइबर क्राइम सिंडिकेट की महत्वपूर्ण कड़ियों को निशाना बनाने के लिए संचालित किया गया, जिसमें म्यूल अकाउंट्स, कैश हैंडलर जैसे तत्व शामिल थे।

नई दिल्ली जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने शेल कंपनियों के माध्यम से कार्यरत एक सिंडिकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया, जिसमें आरोपी व्यक्तियों ने साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को निकालने के लिए 20 अलग-अलग कंपनियां खोली थीं।

नई दिल्ली में कई हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए थे, जो धोखाधड़ी के लेनदेन का संकेत दे रहे थे। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायतों की जांच के दौरान पता चला कि नई दिल्ली में एक बैंक खाता साइबर धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि यह खाता एम/एस कुद्रेमुख ट्रेडिंग (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिसका पता ए-1506, 15वीं मंजिल, ए विंग, स्टेट्समैन हाउस, 148, बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली है।

शिकायत के आधार पर नई दिल्ली जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू हुई। जांच में यह भी सामने आया कि यह खाता राजेश खन्ना के नाम पर रजिस्टर्ड था और इसके खिलाफ चार शिकायतें दर्ज थीं।

राजेश खन्ना ने खुलासा किया कि वह अपने दो परिचितों सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के निर्देश पर निदेशक बना और कंपनी का खाता खोला। फंड ट्रांसफर का नियंत्रण राजेश और सुशील दोनों के हाथों में था।

आगे की जांच में कुल 176 एनसीआरपी साइबर फ्रॉड शिकायतें मिलीं, जिनकी कुल राशि लगभग 180 करोड़ रुपए थी। इन शेल कंपनियों के खातों में कथित तौर पर धोखाधड़ी की रकम विभिन्न स्तरों पर ट्रांसफर की जा रही थी।

जांच के दौरान पता चला कि आरोपी राजेश खन्ना की नोएडा में मृत्यु हो गई है। आरोपी सुशील चावला और राजेश कुमार ने जांच में सहयोग नहीं किया और आवश्यक सवालों के जवाब देने से बचते रहे।

पुलिस ने 2 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप भी जब्त किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी आवश्यक है कि लोग स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक हों।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने कितनी कंपनियों का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली पुलिस ने 20 कंपनियों का भंडाफोड़ किया है।
साइबर धोखाधड़ी का मुख्य उद्देश्य क्या था?
साइबर धोखाधड़ी का मुख्य उद्देश्य ठगे गए पैसे को निकालना था।
क्या आरोपी सहयोग कर रहे थे?
नहीं, आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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