झारखंड: योगेंद्र साव के आवास पर प्रशासन की कठोर कार्रवाई, बुलडोजर से ढहाया गया मकान

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झारखंड: योगेंद्र साव के आवास पर प्रशासन की कठोर कार्रवाई, बुलडोजर से ढहाया गया मकान

सारांश

झारखंड के हजारीबाग जिले में योगेंद्र साव के आवास को प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त किया। इस कार्रवाई के पीछे खनन क्षेत्र की जमीन खाली कराने का कारण बताया गया है। क्या यह कदम सही था? जानें पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का आवास बुलडोजर से गिराया गया।
  • यह भूमि खनन क्षेत्र के लिए अधिग्रहित थी।
  • प्रशासन ने पहले नोटिस भेजे थे लेकिन अनुपालन नहीं हुआ।
  • योगेंद्र साव की पुत्री ने विरोध किया और कानूनी चुनौती देने का इरादा जताया।
  • इस घटना ने क्षेत्र में राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है।

हजारीबाग, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र में गुरुवार को जिला प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन ने मिलकर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता योगेंद्र साव के आवास को बुलडोजर द्वारा ध्वस्त कर दिया।

यह मकान जोरदाग झुमरी टांड़ में चट्टी बरियातू कोल माइंस के सामने स्थित था, जहाँ दंडाधिकारियों और बड़ी संख्या में पुलिस बल की उपस्थिति में इसे गिराया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर यह आवास था, वह खनन क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की गई भूमि है। कोयला उत्पादन कार्य में बाधा न आए, इसके लिए इस भूभाग को खाली करना आवश्यक था।

प्रशासन ने बताया कि संबंधित पक्ष को पहले से ही कई बार नोटिस दिए गए थे, लेकिन अनुपालन न होने पर यह कठोर कदम उठाया गया। अधिकारियों ने इसे पूरी तरह से कानूनी बताते हुए कहा कि खनन कार्य को सुचारु बनाए रखने के लिए यह जरूरी था।

इस कार्रवाई की सूचना मिलते ही योगेंद्र साव की पुत्री और बड़कागांव की पूर्व कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद मौके पर पहुंचीं और प्रशासन एवं एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता के आवास को बिना किसी मुआवजे के ध्वस्त किया गया।

अंबा प्रसाद के अनुसार, मुआवजे से संबंधित मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, फिर भी प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई की। उन्होंने यह भी कहा कि जब बुलडोजर चलाया गया, तब उनकी मां और पूर्व विधायक निर्मला देवी घर के अंदर मौजूद थीं, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया। पूर्व विधायक ने इस कदम को ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013’ का उल्लंघन मानते हुए इसे कानूनी चुनौती देने का इरादा जताया है।

यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में योगेंद्र साव और एनटीपीसी प्रबंधन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। हाल ही में कंपनी के कर्मचारियों और वाहनों पर हमले की घटनाओं के बाद से माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया था। ऐसी स्थिति में प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए गुरुवार को इस कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन की सतर्कता के बीच पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया और किसी भी बड़े टकराव की सूचना नहीं है।

वर्तमान में, आवास ध्वस्तीकरण के बाद इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।

Point of View

दोनों ही इस विषय को अधिक संवेदनशील बनाती हैं। ऐसे समय में जब राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कैसे संभालता है।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

योगेंद्र साव के आवास को क्यों ध्वस्त किया गया?
जिला प्रशासन ने बताया कि यह आवास खनन क्षेत्र की अधिग्रहित भूमि पर बना था, जिसे खाली कराना आवश्यक था।
क्या कार्रवाई के दौरान कोई विरोध हुआ?
हाँ, योगेंद्र साव की पुत्री अंबा प्रसाद ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
क्या इस कार्रवाई के खिलाफ कानूनी उपाय किए जाएंगे?
अंबा प्रसाद ने कहा है कि वे इस कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती देने की योजना बना रही हैं।
क्या प्रशासन ने पहले कोई नोटिस भेजा था?
जी हाँ, प्रशासन ने संबंधित पक्ष को कई बार नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था।
क्या इलाके में स्थिति सामान्य है?
हालांकि आवास ध्वस्तीकरण के बाद स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
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