योगेंद्र साव के कांग्रेस से निष्कासन पर अंबा प्रसाद का तीखा हमला, गठबंधन सरकार पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
Key Takeaways
- योगेंद्र साव को कांग्रेस से निष्कासित किया गया है।
- अंबा प्रसाद ने इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोला है।
- उन्होंने प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- आवास ध्वस्त करने की कार्रवाई को ‘तुगलकी’ कहा गया।
- निष्कासन के निर्णय को दबाव में लिया गया है।
रांची, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में कांग्रेस के प्रमुख नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के पार्टी से निष्कासन के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। इस निर्णय के विरोध में उनकी पुत्री और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने सीधा मोर्चा संभाला है और प्रदेश नेतृत्व तथा राज्य की गठबंधन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अंबा प्रसाद ने रविवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि योगेंद्र साव के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा, दबाव में और बिना किसी उचित प्रक्रिया के की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो उन्हें कोई नोटिस दिया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। अंबा ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के उस दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि योगेंद्र साव को पहले चेतावनी दी गई थी। उनका कहना था कि उनके पिता ने पहले ही पूरे मामले से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समर्थन नहीं मिला।
ज्ञात हो कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 20 मार्च को योगेंद्र साव को अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्षों के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। पार्टी की अनुशासन समिति ने यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव पर की गई उनकी टिप्पणियों को संगठनात्मक नियमों का उल्लंघन मानते हुए की थी।
अंबा प्रसाद ने प्रेस वार्ता में बड़कागांव में एनटीपीसी द्वारा उनके आवास को बुलडोजर से ध्वस्त किए जाने के मामले को भी उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘तुगलकी’ करार देते हुए कहा कि बिना उचित मुआवजा दिए और न्यायालय में मामला लंबित रहने के बावजूद उनके घर को तोड़ा गया, जिससे उनके परिवार के सम्मान को ठेस पहुंची है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। अंबा प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व, गठबंधन सरकार, पुलिस-प्रशासन और एनटीपीसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से निशाने पर है और विस्थापन के मुद्दे पर आवाज उठाने की वजह से उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि योगेंद्र साव को धमकियां दी गईं और उनके राजनीतिक करियर को खत्म करने की बात कही गई। अंबा प्रसाद ने कहा कि वे इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के पास जाएंगी और न्याय की मांग करेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्कासन का निर्णय दबाव में लिया गया।