क्या महाराष्ट्र कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष को अनुशासनहीनता के चलते सस्पेंड किया?
सारांश
Key Takeaways
- प्रदीप पाटिल को भाजपा के साथ गठबंधन के आरोप में सस्पेंड किया गया।
- अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने बहुमत प्राप्त किया है।
- इस घटना से पार्टी अनुशासन के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
मुंबई, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने पार्टी के खिलाफ गतिविधियों के कारण अंबरनाथ कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को सस्पेंड कर दिया है। यह निर्णय एमपीसीसी के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल की ओर से लिया गया है।
कांग्रेस नेता गणेश पाटिल ने प्रदीप पाटिल को एक पत्र भेजा है जिसमें उन्होंने लिखा है, "हमने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर नगर निगम चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं, लेकिन बिना राज्य नेतृत्व या राज्य कार्यालय को सूचित किए, आपने भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। यह स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए राज्याध्यक्ष हर्षवर्धन के निर्देशानुसार, आपको पार्टी से निलंबित किया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि यह पार्टी के प्रति वफादारी का उल्लंघन है। इसके साथ ही हमारी ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारी समिति को भी भंग किया जा रहा है। इसी तरह, पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने वाले सभी पार्षदों को भी निलंबित किया जा रहा है। नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत के बावजूद भाजपा के साथ कथित गठजोड़ की खबरों के बाद यह कार्रवाई की गई।
यह कार्रवाई अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवारों के बावजूद भाजपा के साथ कथित गठबंधन के आरोपों के बाद की गई है।
वास्तव में, भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से अंबरनाथ नगर परिषद में बहुमत प्राप्त किया है।
अंबरनाथ ठाणे जिले में स्थित है, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह जिला भी माना जाता है।
हाल की नगर परिषद चुनावों में भाजपा ने अंबरनाथ में शिवसेना को हराकर वहां का शासन खत्म कर दिया।
हालांकि शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन भाजपा ने एक अप्रत्याशित गठबंधन बनाकर नगर परिषद अध्यक्ष पद हासिल कर लिया और बहुमत भी बना लिया।
59 सदस्यीय अंबरनाथ नगर परिषद में शिवसेना को 23 सीटें मिलीं, भाजपा को 16, कांग्रेस को 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) को 4 सीटें मिलीं।
भाजपा (16), कांग्रेस (12), और एनसीपी (4) ने मिलकर कुल 32 सीटें हासिल कीं, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार हो गया। इसके साथ ही शिंदे गुट की शिवसेना (23 सीटें) विपक्ष में चली गई।