क्या कांग्रेस अंबरनाथ के 12 पार्षदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी?

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क्या कांग्रेस अंबरनाथ के 12 पार्षदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी?

सारांश

अंबरनाथ नगर परिषद के 12 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस ने कानूनी कार्रवाई की घोषणा की है। क्या यह कदम राजनीतिक विवादों को और बढ़ाएगा? जानिए इस घटनाक्रम के सभी पहलुओं को।

Key Takeaways

  • कांग्रेस ने 12 पार्षदों को अयोग्य ठहराने का निर्णय लिया है।
  • पार्षदों का भाजपा में शामिल होना विवादित है।
  • यह दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन माना जा रहा है।
  • कांग्रेस कानूनी कार्रवाई करेगी।
  • इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर हो सकता है।

मुंबई, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार को यह घोषणा की कि वह अंबरनाथ नगर परिषद के 12 पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी, जो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं।

हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में कांग्रेस के सिंबल पर चुने गए पार्षदों ने औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन कर लिया। कांग्रेस ने इस कदम को पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया। इसके साथ ही आरोप लगाया कि यह दल-बदल विरोधी कानून और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

पार्टी ने कहा कि 12 पार्षदों को बुधवार को ही सस्पेंड कर दिया गया था, जब यह सामने आया कि उन्होंने अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया है और अपनी पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं।

कांग्रेस के सीनियर प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि किसी खास पार्टी के टिकट पर चुने जाने के बाद अलग ग्रुप बनाना या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होना संवैधानिक नियमों का उल्लंघन है।

सावंत ने कहा, "अलग ग्रुप बनाना या बाद में किसी दूसरी पार्टी में शामिल होना अनैतिक और असंवैधानिक है। जल्द ही सभी बारह लोगों को कानूनी नोटिस भेजे जाएंगे।"

कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि पार्षदों को कांग्रेस के बैनर तले चुनावी जनादेश मिला था, इसलिए पाला बदलने पर वे अपने आप ही चुने हुए प्रतिनिधि के रूप में बने रहने का अधिकार खो देते हैं। पार्टी ने कहा कि वह आने वाले दिनों में नगर परिषद से उन्हें औपचारिक रूप से हटाने के लिए कानून का सहारा लेने वाली है।

कांग्रेस के सिंबल पर जीतने वाले सभी 12 पार्षदों ने राज्य बीजेपी प्रमुख रविंद्र चव्हाण और महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक की मौजूदगी में औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन कर ली।

इसकी जड़ें पिछले साल 20 दिसंबर को हुए नगर निगम चुनावों में जुड़ी हुई हैं। नतीजों के बाद बीजेपी, कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी की स्थानीय इकाइयां अंबरनाथ विकास अघाड़ी (गठबंधन) बनाने के लिए एक साथ आईं। इस गठबंधन का मकसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को सत्ता से बाहर रखना था, भले ही पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी थी, जो बहुमत के आंकड़े 31 से कम था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पहले इस गठबंधन को अस्वीकार्य और पार्टी की विचारधारा के विपरीत बताया था।

दल-बदल के बाद, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने कहा कि पार्षदों ने विकास के हित में बीजेपी जॉइन की है। उन्होंने कहा, "वे सत्ता के लिए नहीं, बल्कि अंबरनाथ के विकास के लिए हमारे साथ जुड़े हैं। उन्हें बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पर लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का भरोसा है।"

दूसरी ओर, पूर्व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष और दलबदल करने वालों में से एक प्रदीप पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्य कांग्रेस नेतृत्व ने उनका पक्ष सुने बिना उन्हें सस्पेंड कर दिया। उन्होंने कहा, "हमने अंबरनाथ को सालों के भ्रष्टाचार और धमकियों से आजाद कराने के लिए विकास अघाड़ी बनाई थी। क्योंकि हमारी अपनी पार्टी ने हमारे लोकल विजन का साथ नहीं दिया, इसलिए हमने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।"

इस घटना के बाद सत्ताधारी महायुति गठबंधन में भी असंतोष फैल गया है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेताओं ने इस कदम को "गठबंधन धर्म का धोखा" बताया और भाजपा पर कांग्रेस के दलबदलुओं को शामिल करके अपने सहयोगी को कमजोर करने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन और समझौते पर कड़ी नाराजगी जताई थी, हालांकि कांग्रेस पार्षदों का भाजपा में शामिल होना भाजपा की लोकल रणनीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

Point of View

बल्कि महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर भी असर डालती है। कांग्रेस का यह कदम एक बड़ा संदेश है कि पार्टी अपनी विचारधारा और जनादेश की रक्षा के लिए तत्पर है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

कांग्रेस ने पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
कांग्रेस ने कानूनी कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की है।
पार्षदों का भाजपा में शामिल होना क्यों विवादास्पद है?
यह दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन माना जा रहा है।
क्या कांग्रेस पार्षदों को हटाने में सफल होगी?
कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाने की योजना बना रही है।
इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर क्या होगा?
यह अंबरनाथ और महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।
भाजपा ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
भाजपा ने पार्षदों के विकास के हित में पार्टी में शामिल होने की बात कही है।
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