क्या टीएमसी के प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक मंशा है?
सारांश
Key Takeaways
- टीएमसी का प्रदर्शन ईडी की छापेमारी के खिलाफ है।
- अधीर रंजन चौधरी ने राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए हैं।
- प्रदर्शन में सभी टीएमसी सांसद शामिल हैं।
- ममता बनर्जी के खिलाफ आरोप लग रहे हैं।
- कांग्रेस और आरजेडी ने भी टीएमसी का समर्थन किया है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के खिलाफ टीएमसी सांसदों द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर किए गए विरोध प्रदर्शन ने सियासी बयानबाजी को और तेज कर दिया है।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रदर्शन पार्टी के हितों से प्रेरित है, न कि जनहित से।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि सभी टीएमसी सांसद इस समय दिल्ली में उपस्थित हैं, इसलिए उन्होंने इस मुद्दे पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। लेकिन बंगाल से बाहर काम कर रहे प्रवासी मजदूरों पर हुए हमलों और लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ न तो कोलकाता में और न ही दिल्ली में कभी कोई विरोध किया गया। अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि जब ईडी की कार्रवाई से टीएमसी को नुकसान होने की आशंका होती है, तभी पार्टी सड़क पर उतरती है।
ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के कार्यालय से फाइलें ले जाए जाने के मामले पर भी अधीर रंजन चौधरी ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी स्वयं फाइलें लेकर बाहर आईं और उनके साथ पार्टी के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनके साथ आए पुलिसकर्मी कागजात और फाइलें उठाकर बाहर लाए और उन्हें मुख्यमंत्री की गाड़ी में लोड किया। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम समझ से परे है और इस तरह की प्रक्रिया कैसे संभव हुई, यह एक बड़ा सवाल है।
इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि देशभर में हालात लगभग एक जैसे हैं। उन्होंने कहा कि जनता जांच एजेंसियों के रवैये को बारीकी से देख रही है और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन परिस्थितियों में मजबूती से लड़ते हुए मुंहतोड़ जवाब दे रही हैं।
कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने भी केंद्र सरकार पर विपक्ष को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का मकसद विपक्षी नेताओं पर दबाव डालना, उनके खिलाफ मामले दर्ज करना और उन्हें लगातार परेशान करना है। लल्लू ने दावा किया कि ईडी द्वारा पेश किए गए मामलों में आने वाले समय में विपक्षी नेता बरी साबित होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल ईडी की चार्जशीट को भी अदालत ने खारिज कर दिया था।
इस बीच, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ईडी की भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि एजेंसी सरकार के ‘तोते’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी को एक स्वतंत्र जांच संस्था के बजाय सरकार के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का उदाहरण है।