झारखंड में कांग्रेस मंत्री राधाकृष्ण किशोर का पार्टी नेतृत्व पर हमला, JTET और SC आयोग पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राधाकृष्ण किशोर ने 5 मई 2026 को पार्टी के प्रदेश प्रभारी के. राजू को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें संगठन की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करने के साथ-साथ झारखंड सरकार के कई अहम फैसलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रांची से जारी इस पत्र को झारखंड कांग्रेस में बड़े राजनीतिक विवाद के रूप में देखा जा रहा है।
खुले पत्र में क्या कहा किशोर ने
किशोर ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पार्टी राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर चुप्पी साधे रखेगी तो संगठन का विस्तार बेमानी हो जाएगा। उन्होंने हाल ही में घोषित 300 से अधिक पदाधिकारियों वाली प्रदेश कांग्रेस कमेटी पर तंज कसते हुए कहा कि इसे 314 से बढ़ाकर 628 भी कर दिया जाए, तब भी जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आएगा, जब तक पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों पर मुखर नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल कांग्रेस भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से महिलाओं तक संदेश नहीं पहुँचता। राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए महिला आरक्षण विधेयक के सवालों को राज्य स्तर पर प्रभावी तरीके से मुद्दा न बनाए जाने पर भी उन्होंने नाराज़गी जताई।
सरकारी फैसलों पर भी उठाए सवाल
किशोर ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से मगही और भोजपुरी भाषाओं को हटाने के सरकारी निर्णय को गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि इस पर प्रदेश कांग्रेस की चुप्पी समझ से परे है। गौरतलब है कि यह निर्णय उस सरकार का है जिसमें किशोर स्वयं मंत्री हैं, जो इस विरोध को और अधिक उल्लेखनीय बनाता है।
उन्होंने अनुसूचित जाति से जुड़े मुद्दों का भी ज़िक्र किया। उनके अनुसार, राज्य में लगभग 50 लाख एससी आबादी होने के बावजूद अनुसूचित जाति आयोग और परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करने की माँग पर सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हुई है।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर चिंता
मंत्री ने हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि इन मामलों में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की सक्रियता क्यों नहीं दिखी। उन्होंने संगठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी पारदर्शिता की माँग की।
किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने को कहा कि नई कमेटी में दलित, पिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के नेताओं को कितनी भागीदारी दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कांग्रेस अपनी संगठनात्मक पुनर्संरचना के दौर से गुज़र रही है।
पार्टी विरोधी नहीं, पार्टी हित में: किशोर
किशोर ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी हित में उठाए गए सवालों को पार्टी विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि नेतृत्व को उनके सवाल अनुचित लगते हैं तो जो भी निर्णय लिया जाएगा, उन्हें स्वीकार होगा।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले भी किशोर ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। उनके लगातार बयानों से झारखंड कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है और अब सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।