झारखंड विधानसभा में विपक्ष का हंगामा: भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
सारांश
Key Takeaways
- विपक्ष का हंगामा: कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठाए गए।
- सदन की कार्यवाही: हंगामे के कारण बाधित हुई।
- सरकार की प्रतिक्रिया: जीरो टॉलरेंस नीति का दावा किया गया।
- विपक्ष की मांग: सदन में विस्तृत चर्चा की आवश्यकता।
- राजनीतिक असंतोष: यह घटना लोकतंत्र में आवाज उठाने का एक तरीका है।
रांची, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन मंगलवार को विपक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक पोस्टर लेकर वेल में पहुंचे और राज्य में बढ़ते भ्रष्टाचार तथा बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चर्चा की मांग करने लगे।
हंगामे के दौरान सदन में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो को स्पीकर ने मार्शल आउट करा दिया। हालांकि, बाद में सदन में बनी सहमति के तहत उन्हें वापस बुला लिया गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और बिना पैसे के कोई काम नहीं हो रहा है।
उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दुमका में मजदूर यूनियन नेताओं पर हुई गोलीबारी, रजरप्पा मंदिर में श्रद्धालु के साथ पुलिसकर्मियों की मारपीट और गिरिडीह में महिला दिवस के कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी की घटनाओं का जिक्र किया।
मरांडी ने कहा कि यह 'अबुआ सरकार' (जनता की सरकार) नहीं, बल्कि पूरी तरह 'बबुआ सरकार' (अफसरों की सरकार) बन गई है, जहां अपराधी बेखौफ हैं और अधिकारी बेलगाम। उन्होंने इन मुद्दों पर सदन के अन्य कार्यों को रोककर विस्तृत चर्चा की मांग की। विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि यदि उनके पास कोई विशेष मामला है तो उसे सदन के पटल पर रखें, सरकार कार्रवाई के लिए तैयार है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सदन नियमों से चलता है और कार्यमंत्रणा समिति में तय विषयों पर ही चर्चा संभव है। बहस के दौरान सदन में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब सत्ता पक्ष के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और विधायक निर्मल महतो के बीच सीधी नोकझोंक शुरू हो गई।
विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताते हुए तिवारी महतो को मार्शल आउट करने का निर्देश दे दिया, जिसके बाद उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया। हालांकि, सदन की गरिमा को देखते हुए बाद में वित्त मंत्री के हस्तक्षेप और विपक्षी सदस्यों के अनुरोध पर उन्हें वापस सदन में बुला लिया गया। इस दौरान काफी देर तक पक्ष और विपक्ष के विधायक एक-दूसरे के आमने-सामने डटे रहे।