क्या राहुल गांधी के खिलाफ पत्र लिखने वाले पूर्व जज और ब्यूरोक्रेट्स ने सही समय पर आवाज़ उठाई?
सारांश
Key Takeaways
- राजेश ठाकुर ने पूर्व जजों और ब्यूरोक्रेट्स पर सवाल उठाए हैं।
- इन 272 लोगों की चुप्पी पर चर्चा हो रही है।
- कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के पक्ष में बात की है।
- राजनीतिक आरोपों की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- जनता को राजनीतिक स्थिति की जानकारी रखने का अधिकार है।
रांची, 20 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'वोट चोरी' जैसे आरोपों की निंदा करने वाले पूर्व नौकरशाहों और जजों पर कांग्रेस पार्टी के नेता राजेश ठाकुर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ये वही लोग हैं जो देश में होने वाली कई महत्वपूर्ण घटनाओं पर चुप्पी साधे रहते हैं।
कांग्रेस की झारखंड इकाई के नेता राजेश ठाकुर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "ये 272 लोग अभी तक कहां थे? यही हम जानना चाहते हैं। जब देश में अनेक घटनाएं होती हैं, तब ये चुप रहते हैं। आज ये ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त) के कहने पर ज्ञान देने आए हैं।"
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों में उन अधिकारियों को शामिल नहीं होना चाहिए जो कहीं न कहीं राजनीति से प्रभावित हो रहे हैं। राजेश ठाकुर ने कहा, "झारखंड के कुछ लोगों का जिक्र किया गया है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कितना किया है, यह राज्य की जनता से छिपा नहीं है। मैं समझता हूं कि ऐसे लोग राहुल गांधी के दावों के बाद चीजों को बिखरने की कोशिश कर रहे हैं।"
झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, "राहुल गांधी की बातें लोगों को समझ आ रही हैं। इन पूर्व नौकरशाहों और जजों को कहीं न कहीं डर है कि चुनाव आयोग को विद्रोह का सामना नहीं करना पड़े, इसलिए इस तरह की चिट्टियां लिखी जा रही हैं।"
इस बीच, कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने सपा के महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख अबू आजमी की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "अबू आजमी हमेशा अनर्गल बातें करते हैं। उनकी बातों का जवाब देना मैं आवश्यक नहीं समझता। बातें 'इंडिया' गठबंधन के प्लेटफॉर्म पर होनी चाहिए, लेकिन कोई बाहर आकर बात कर रहा है तो उनकी पार्टी के अध्यक्ष को यह देखना चाहिए।"