20 जुलाई 2026
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वित्त मंत्री ने विधानसभा में बजट पर चर्चा में केंद्र पर लगाया झारखंड का वाजिब फंड रोकने का आरोप

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वित्त मंत्री ने विधानसभा में बजट पर चर्चा में केंद्र पर लगाया झारखंड का वाजिब फंड रोकने का आरोप

सारांश

झारखंड विधानसभा में वित्त मंत्री ने केंद्र पर राजनीतिक कारणों से राज्य के आर्थिक हिस्से को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण बजट प्रावधान किए गए हैं, लेकिन केंद्र से सहयोग में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य बातें

राजनीतिक कारणों से झारखंड का वाजिब आर्थिक हिस्सा रोका जा रहा है।
बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए 67,459 करोड़ रुपए का प्रावधान।
राज्य में अब तक 38 हजार लोगों को सरकारी नौकरी मिली।
कृषि क्षेत्र में उत्पादन में वृद्धि हुई है।
डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी की जांच की जाएगी।

रांची, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड विधानसभा में बुधवार को राज्य सरकार के बजट पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य की उपेक्षा की जा रही है और कहा कि राजनीतिक कारणों से झारखंड का वाजिब आर्थिक हिस्सा रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी और अनुदान में कमी आई है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि झारखंड में भाजपा की सरकार न होने के कारण सहयोग में भेदभाव किया जा रहा है। उनके वक्तव्य के विरोध में भाजपा के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। किशोर ने कहा कि सत्ता और विपक्ष दोनों का मुख्य उद्देश्य राज्य का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। यदि जनता के साथ धोखा होगा, तो अगली बार जनता मौका नहीं देगी।

वित्त मंत्री ने वर्ष २०२६-२७ के बजट का ब्योरा देते हुए बताया कि सामाजिक क्षेत्र के लिए ६७,४५९ करोड़ रुपए, आर्थिक क्षेत्र के लिए ५९,०४४ करोड़ रुपए और सामान्य क्षेत्र के लिए ३,२५५ करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों की मदद, बच्चों की शिक्षा, किसानों की आय और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दे रही है। वर्ष २००१ से अब तक इस सदन ने ८ लाख ५६ हजार ४०४ करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। उन्होंने बताया कि पहली बार स्थापना मद की राशि बढ़ाई गई है ताकि मानव संसाधन की कमी दूर की जा सके।

किशोर ने बताया कि अब तक ३८ हजार लोगों को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है। कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष ५० लाख मीट्रिक टन धान और १० लाख मीट्रिक टन दलहन का उत्पादन हुआ है। राज्य अब मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, जबकि दुग्ध उत्पादन और बागवानी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

राज्य में डीएमएफटी फंड की ऑडिट में सामने आए १० हजार करोड़ रुपए की गड़बड़ी के मामले पर उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की बिचौलियागिरी पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर उठाए गए सवालों पर वित्त मंत्री ने कहा कि पूंजी निवेश के बिना राज्य आगे नहीं बढ़ सकता। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रयासों का परिणाम अगले दो वर्षों में दिखेगा और अधिक निवेश आएगा।

उन्होंने ४५० रुपए में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने और अन्य घोषणाओं के अनुपालन का भी भरोसा दिलाया। सदन में की गई घोषणाओं के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की घोषणा की गई। यह समिति मुख्यमंत्री, राज्यपाल और वित्त मंत्री की घोषणाओं की समीक्षा करेगी और उसी वित्तीय वर्ष में क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड का वाजिब आर्थिक हिस्सा क्यों रोका जा रहा है?
वित्त मंत्री ने कहा कि राजनीतिक कारणों से केंद्र सरकार राज्य का वाजिब आर्थिक हिस्सा रोक रही है।
बजट में कितना धन सामाजिक क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया है?
बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए 67,459 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
राज्य में रोजगार सृजन की स्थिति क्या है?
अब तक 38 हजार लोगों को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है।
कृषि क्षेत्र की उपलब्धियां क्या हैं?
इस वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन धान और 10 लाख मीट्रिक टन दलहन का उत्पादन हुआ है।
डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी की जांच कैसे होगी?
इस मामले की पूरी जांच की जाएगी और बिचौलियागिरी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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