धनबाद में भू-धंसान से तबाही, कई लोग मलबे में फंसे; स्थानीय लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन
सारांश
Key Takeaways
- भू-धंसान की घटना ने कई घरों को जमींदोज किया।
- स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों की मदद की मांग कर रहे हैं।
- आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़कें जाम कीं।
- यह घटना अवैध खनन से जुड़ी बताई जा रही है।
- प्रशासन को तत्काल राहत कार्य शुरू करने की आवश्यकता है।
धनबाद, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के धनबाद जिले के कतरास क्षेत्र में मंगलवार को भू-धंसान की एक गंभीर घटना ने हड़कंप मचा दिया। सोनारडीह ओपी क्षेत्र के टंडाबारी इलाके में शाम लगभग पांच बजे अचानक जमीन धंस गई, जिससे तीन घर पूरी तरह से जमींदोज हो गए और तीन से चार लोग मलबे में फंस गए।
घटना के चार घंटे बाद भी मलबे में दबे लोगों का रेस्क्यू नहीं हो सका है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। स्थानीय निवासियों ने अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़ने का निर्णय लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में सोनारडीह ओपी का घेराव किया और एनएच-32 कतरास-महुदा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया।
घटना की शिकार रिंकी कुमारी ने बताया कि अचानक हुए भू-धंसान में उनका घर समा गया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन गीता कुमारी, चाची सरिता देवी और पिता मोनू उरांव मलबे में दब गए हैं। इसके अलावा, अन्य कुछ व्यक्ति भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि यह हादसा अवैध खनन के कारण हुआ है।
घटना की जानकारी मिलते ही बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि कतरास और आसपास के इलाकों में इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। सोनारडीह के अलावा रामकनाली, तेतुलमारी, जोगता, तेतुलिया और बाघमारा क्षेत्रों में भी भू-धंसान की घटनाएं आम हो गई हैं।
उन्होंने अवैध खनन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और प्रशासन से जल्द राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने की मांग की। विधायक ने बताया कि उन्होंने धनबाद उपायुक्त, बीसीसीएल प्रबंधन और अन्य अधिकारियों से बात कर रेस्क्यू टीम भेजने का आग्रह किया है।
धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो ने भी फोन पर घटना की जानकारी लेकर चिंता जताई है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और दर्जनों परिवार अपने जरूरी सामान और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ रहना अब खतरनाक हो गया है। समाचार लिखे जाने तक राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका था।