अरुणाचल प्रदेश: पूर्वी सियांग में गांजे की फसल नष्ट, SP पंकज लांबा ने दोहराई जीरो टॉलरेंस नीति
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने शनिवार, 16 मई को गांजे की खेती के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए पूरी फसल नष्ट कर दी। इस कार्रवाई के ज़रिये प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि जिले में किसी भी सूरत में अवैध नशीले पदार्थों की खेती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अभियान का नेतृत्व और रूपरेखा
यह पूरा अभियान नगर मजिस्ट्रेट संजय ताराम और नशा-विरोधी दस्ते के प्रभारी अयूप बोको के नेतृत्व में संचालित किया गया। टीम में पुलिस कर्मी, वन अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल थे। कार्रवाई की पूरी रूपरेखा पहले से तय की गई थी और उसी के अनुसार इसे अंजाम दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, अभियान शुरू करने से पहले सभी आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी की गईं। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि इसे भविष्य में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
युवाओं पर असर और सामाजिक चिंता
प्रशासन का कहना है कि गांजे की अवैध खेती से जिले के युवाओं पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। गांजे के सेवन के कारण युवा पीढ़ी के पथभ्रष्ट होने की आशंका जताई जा रही है, जो स्थानीय समाज के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई जिलों में नशे की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है।
पुलिस अधीक्षक की जीरो टॉलरेंस नीति
पूर्वी सियांग के पुलिस अधीक्षक पंकज लांबा ने इस कार्रवाई के बाद नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ की खेती या बिक्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासन की ओर से ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
लांबा ने जिलेवासियों से अपील की कि यदि उन्हें गांजे की खेती या उसकी तस्करी से संबंधित कोई भी जानकारी मिले, तो वे तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह अभियान एकबारगी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और निरंतर अभियान का हिस्सा है। प्रशासन के संकेतों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में पूर्वी सियांग के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग के बीच इस समन्वित अभियान को नशा-मुक्त अरुणाचल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।