मायावती की माँग: UP आंधी-तूफान पीड़ितों को राहत दे सरकार, पेट्रोल-डीजल ₹3 वृद्धि वापस हो
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 16 मई 2025 को केंद्र और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला — एक तरफ प्रदेश के कई हिस्सों में आए भीषण आंधी-तूफान से हुई जान-माल की तबाही, और दूसरी तरफ पेट्रोल व डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की हालिया बढ़ोतरी को लेकर। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल और उदार सहायता देने तथा महंगाई पर ठोस नियंत्रण की माँग की।
आंधी-तूफान की तबाही और राहत की माँग
मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हाल ही में आए ज़बरदस्त आंधी-तूफान ने जान-माल का भारी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह 'पूरी उदारता बरतते हुए' प्रभावित लोगों और परिवारों की हर प्रकार से मदद के लिए आगे आए, ताकि वे अपने उजड़े-बिखरे पारिवारिक जीवन को दोबारा पटरी पर ला सकें।
गौरतलब है कि मई के मध्य में उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य जिलों में आंधी-तूफान से कई मकान क्षतिग्रस्त हुए और फसलों को नुकसान पहुँचा। प्रभावित परिवारों को अभी भी सरकारी सहायता का इंतजार है।
पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर कड़ा विरोध
BSP प्रमुख ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल की कीमतों में की गई ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को 'करोड़ों गरीबों, मेहनतकश परिवारों, खेती-किसानी और मध्यम वर्ग के जीवन पर सीधी चोट' बताया। उनके अनुसार, पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में यह वृद्धि परिवारों के पालन-पोषण पर सीधा असर डालेगी और पहले से बढ़ी महंगाई को और गहरा करेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य पदार्थों की कीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं और ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति पर दबाव है। आलोचकों का कहना है कि ईंधन मूल्यवृद्धि का असर परिवहन लागत के जरिए आम आदमी की थाली तक पहुँचता है।
मायावती की सरकार से माँग
मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को महंगाई और जीवन को दुष्कर बनाने वाली इस प्रकार की 'नियमित वृद्धि' को कम करने के लिए 'ज़रूरी सार्थक कदम' उठाने चाहिए। उन्होंने इसे 'समय की माँग' करार दिया।
BSP की यह प्रतिक्रिया दोहरे मुद्दों — प्राकृतिक आपदा राहत और आर्थिक दबाव — को एकसाथ उठाती है, जो उत्तर प्रदेश के मतदाताओं, विशेषकर दलित, पिछड़े और ग्रामीण वर्ग के लिए सीधे प्रासंगिक हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विभिन्न विपक्षी दल सरकार की आर्थिक नीतियों और आपदा प्रबंधन को लेकर सक्रिय हैं। मायावती का यह कदम BSP की जमीनी राजनीति को पुनः स्थापित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकार इन माँगों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।