मजीठा में कांग्रेस को झटका: परमजीत पम्मा समेत 5 वरिष्ठ नेता आम आदमी पार्टी में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मजीठा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है, जब 16 मई 2025 को पार्टी के पाँच वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी (AAP) में शामिल हो गए। इन नेताओं ने AAP सरकार की नीतियों और कार्यशैली को अपने दलबदल का कारण बताया।
कौन-कौन हुए शामिल
मजीठा से परमजीत सिंह पम्मा, पलविंदर सिंह पाली, जगदीप सिंह गोगा, अपरमदीप दीप सिंह अप्पू और अमनदीप सिंह अपने-अपने समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस कार्यक्रम में मजीठा क्षेत्र के पार्टी इंचार्ज और AAP के वरिष्ठ नेता तलबीर सिंह गिल भी उपस्थित रहे।
भगवंत मान का स्वागत और बयान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी नए सदस्यों का औपचारिक रूप से पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि पंजाब में आम लोगों के लिए किए जा रहे कार्यों से जनता लगातार प्रभावित हो रही है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में पंजाब सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की 'शिक्षा क्रांति' अब देशभर में मिसाल बन रही है और नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर पहुँच गया है।
मान ने शिक्षकों को फिनलैंड भेजने, 99 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध कराने और अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से सामान्य परिवारों के बच्चे भी बेहतरीन परिणाम ला रहे हैं।
पंजाब के अधिकारों पर मान का रुख
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार पंजाब के अधिकारों की पूरी मजबूती से रक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा को अतिरिक्त पानी नहीं दिया जाएगा और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा तथा बलि-विरोधी कानून को सख्ती से लागू किया जाएगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना बताया गया।
AAP का राजनीतिक दावा
आम आदमी पार्टी पंजाब ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका करार दिया। पार्टी ने कहा कि मजीठा के पूर्व वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भगवंत मान के नेतृत्व में AAP की सदस्यता ली है। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं।
आगे क्या
मजीठा विधानसभा सीट पारंपरिक रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रही है। इन नेताओं के दलबदल से क्षेत्र में कांग्रेस के संगठनात्मक ढाँचे पर दबाव बढ़ेगा, जबकि AAP अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने का दावा करेगी। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।