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राज्यसभा सांसदों की 'वापसी' पर भगवंत मान ने मांगा राष्ट्रपति से मिलने का समय

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राज्यसभा सांसदों की 'वापसी' पर भगवंत मान ने मांगा राष्ट्रपति से मिलने का समय

सारांश

AAP में बड़ी टूट के बाद CM भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में जाने पर वे रिकॉल की मांग रखेंगे। मान ने इन्हें 'पंजाबियों का गद्दार' बताया।

मुख्य बातें

पंजाब के CM भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है।
AAP के 7 राज्यसभा सांसद — राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह समेत — भाजपा में शामिल हो गए।
मान इन सांसदों को रिकॉल कराने का पक्ष राष्ट्रपति के समक्ष रखेंगे, हालांकि इसका कोई सीधा संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 25 अप्रैल को इन नेताओं को भाजपा में शामिल किया।
मुख्यमंत्री मान ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को 'पंजाबियों का गद्दार' बताया।
यह AAP के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका है, विशेषकर 2024 लोकसभा चुनाव में दिल्ली में हार के बाद।

चंडीगढ़, 25 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (AAP) में ऐतिहासिक टूट के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री मान पंजाब के उन राज्यसभा सदस्यों को रिकॉल कराने का पक्ष राष्ट्रपति के समक्ष रखना चाहते हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है।

राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब के पार्टी विधायकों के साथ मिलकर राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं। इस मुलाकात में वे भाजपा में शामिल हुए पंजाब के राज्यसभा सदस्यों को वापस बुलाने यानी रिकॉल करने संबंधी संवैधानिक और नैतिक पक्ष प्रस्तुत करेंगे।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में राज्यसभा सांसदों को मध्यकाल में वापस बुलाने का कोई स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है, फिर भी दल-बदल और जनादेश के विश्वासघात के आधार पर यह मांग राजनीतिक दबाव के रूप में उठाई जाती रही है।

AAP में टूट — कैसे सामने आया पूरा घटनाक्रम

आम आदमी पार्टी में यह दरार सार्वजनिक रूप से तब उजागर हुई जब राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी से इस्तीफे और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने 4 अन्य सांसदों के नाम भी सार्वजनिक किए जो AAP छोड़ रहे थे। इसके बाद तीनों नेता सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन नेताओं को पार्टी में शामिल किया। इसके साथ ही हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता का भी भाजपा में स्वागत किया गया। इस प्रकार कुल 7 राज्यसभा सांसद AAP छोड़कर भाजपा में चले गए।

भगवंत मान की कड़ी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सभी सांसदों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, "हम पार्टी छोड़ने वालों और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करने वालों, दोनों की ही घोर निंदा करते हैं।"

मान ने यह भी स्पष्ट किया कि "पार्टी किसी भी व्यक्ति से बड़ी होती है।" उन्होंने कहा कि जो सांसद पार्टी छोड़ गए हैं, वे पंजाब का वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं करते। उनके अनुसार, "जब उन्हें भगवंत मान के खिलाफ कुछ नहीं मिला, तो उन्होंने AAP को तोड़ने की कोशिश की।"

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि "पंजाबी दिल से सभी से प्यार करते हैं, लेकिन विश्वासघात को कभी नहीं भूलते।" उन्होंने भाजपा में गए सांसदों को "पंजाबियों के गद्दार" करार देते हुए कहा कि इन्हें न कभी वोट मांगना पड़ा, न सड़कों पर जनता के मुद्दे उठाने पड़े — ये केवल अपने स्वार्थ के लिए गए हैं।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव

गौरतलब है कि AAP पहले ही 2024 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली में करारी हार झेल चुकी है और अरविंद केजरीवाल की जमानत से जुड़े विवादों के बाद पार्टी की राष्ट्रीय छवि कमजोर हुई है। ऐसे में 7 राज्यसभा सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़ना AAP के लिए संगठनात्मक रूप से बड़ा झटका है।

विश्लेषकों का मानना है कि भगवंत मान का राष्ट्रपति से मिलने का कदम मुख्यतः राजनीतिक संदेश देने के लिए है — यह दर्शाने के लिए कि वे संवैधानिक रास्ते से लड़ेंगे। हालांकि राज्यसभा सांसदों को रिकॉल करने का कोई सीधा कानूनी तंत्र भारत में मौजूद नहीं है, जिससे यह मांग व्यावहारिक से अधिक प्रतीकात्मक मानी जा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राष्ट्रपति भवन इस मुलाकात के अनुरोध पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या AAP इस मुद्दे को संसदीय या न्यायिक मंच पर भी ले जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस राजनीतिक परियोजना के क्षरण का संकेत है जो 'वैकल्पिक राजनीति' के नाम पर खड़ी हुई थी। विडंबना यह है कि जिन सांसदों ने कभी भ्रष्टाचार-विरोध की शपथ ली थी, वे अब उसी पार्टी में हैं जिसे वे 'व्यवस्था का प्रतीक' कहते थे। भगवंत मान का रिकॉल की मांग लेकर राष्ट्रपति के पास जाना राजनीतिक रूप से प्रभावशाली कदम है, लेकिन संवैधानिक दृष्टि से यह मांग निराधार है — भारत में राज्यसभा सांसदों को रिकॉल करने का कोई प्रावधान नहीं। असली सवाल यह है कि क्या AAP 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव तक इस संगठनात्मक बिखराव को संभाल पाएगी?
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवंत मान राष्ट्रपति से क्यों मिलना चाहते हैं?
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान उन 7 राज्यसभा सांसदों को रिकॉल कराने का पक्ष राष्ट्रपति के समक्ष रखना चाहते हैं जिन्होंने AAP छोड़कर भाजपा ज्वाइन की। यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने और जनादेश के विश्वासघात को उजागर करने के लिए उठाया जा रहा है।
AAP छोड़कर भाजपा में कौन-कौन से सांसद शामिल हुए?
राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता ने AAP छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन्हें पार्टी में शामिल किया।
क्या राज्यसभा सांसदों को रिकॉल किया जा सकता है?
भारतीय संविधान में राज्यसभा सांसदों को रिकॉल करने का कोई सीधा प्रावधान नहीं है। भगवंत मान की यह मांग कानूनी से अधिक राजनीतिक और प्रतीकात्मक है।
भगवंत मान ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री मान ने इन्हें 'पंजाबियों का गद्दार' करार दिया और कहा कि इन्हें न वोट मांगना पड़ा, न जनता के बीच जाना पड़ा — ये केवल अपने स्वार्थ के लिए भाजपा में गए। उन्होंने पार्टी छोड़ने और पार्टी में शामिल कराने वाले दोनों की निंदा की।
AAP में यह टूट कब और कैसे सामने आई?
शुक्रवार, 25 अप्रैल को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP छोड़ने और भाजपा में जाने की घोषणा की। इसके बाद वे सीधे भाजपा मुख्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
राष्ट्र प्रेस
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