पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर विपक्ष का तीखा हमला, कहा— 'महंगाई रोकने में सरकार पूरी तरह विफल'

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पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि पर विपक्ष का तीखा हमला, कहा— 'महंगाई रोकने में सरकार पूरी तरह विफल'

सारांश

पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही विपक्ष सड़क पर आ गया। RJD के मनोज झा से लेकर SP के रामभुवल निषाद और कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह तक — सबने सरकार पर निशाना साधा। असली सवाल यह है कि क्या यह मूल्यवृद्धि वैश्विक मजबूरी है या चुनाव बाद की परंपरागत 'राहत वापसी'?

मुख्य बातें

16 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि निम्न व मध्यम वर्ग पर महंगाई की मार पड़ रही है और सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है।
कांग्रेस मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इसे भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विफलता बताया; कमर्शियल एलपीजी के दाम पहले ही दोगुने हो चुके हैं।
SP विधायक रविदास मेहरोत्रा ने ईरान-अमेरिका-इज़रायल संघर्ष को तेल मूल्यवृद्धि का कारण बताया।
SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने 2014 के बाद से लगातार बढ़ते टैक्स बोझ का हवाला दिया और चुनाव-केंद्रित मूल्य नीति पर सवाल उठाए।

देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद 16 मई 2026 को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में आम जनता की जगह नहीं है और महंगाई पर काबू पाने की कोई ठोस रणनीति मौजूद नहीं है।

राजद और सपा का सीधा आरोप

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि परिस्थितियाँ भयावह हैं और सरकार की प्राथमिकताओं में आम जनता बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा, 'सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि तेल की कीमत कहाँ जाकर रुकेगी और कितनी मार निम्न व मध्यम वर्ग पर पड़ेगी।' झा ने यह भी जोड़ा कि देश में लगातार चुनाव होते रहने चाहिए, क्योंकि चुनावों के समय ही जनता को राहत मिलती है।

समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद रामभुवल निषाद ने आरोप लगाया कि सरकार शुरू से ही महंगाई कम करने को लेकर सक्रिय नहीं रही। उनके अनुसार, 'डीजल-पेट्रोल हो या अन्य आवश्यक वस्तुएँ, सब कुछ महंगाई की भेंट चढ़ चुका है। सरकार के पास कोई योजना नहीं है।'

कांग्रेस ने बताई कूटनीतिक विफलता

हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह ने तेल मूल्यवृद्धि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक विफलता करार दिया। उन्होंने कहा, 'यह बिल्कुल स्पष्ट था कि चुनावों के कारण तेल के दाम नहीं बढ़ाए गए थे। कुछ दिन पहले कमर्शियल एलपीजी के दाम दोगुने कर दिए गए, जिससे कारोबारियों को नुकसान हुआ। अब शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल महंगा किया गया, जो वाहन चालकों पर सीधा असर डालेगा।'

पश्चिम एशिया तनाव का हवाला

SP विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर भारत में तेल कीमतों के रूप में दिखाई पड़ रहा है। उनके अनुसार, पहले गैस के दाम बढ़े, अब पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ — इससे लगातार महंगाई बढ़ रही है। उन्होंने माँग की कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को पश्चिम एशिया के तनाव को कम कराने की कूटनीतिक कोशिश करनी चाहिए।

टैक्स नीति पर सपा प्रवक्ता का कटाक्ष

SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने पेट्रोलियम निर्यात शुल्क वृद्धि पर कहा कि 2014 के बाद से जनता पेट्रोल से लेकर जमीन और पानी तक हर चीज़ पर टैक्स देने की आदी हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल कुछ उद्योगपतियों के हित में काम करती है और चुनाव आते ही कीमतें स्थिर हो जाती हैं — यह तथ्य अब जनता भली-भाँति समझ चुकी है।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें पश्चिम एशियाई अनिश्चितता के बीच अस्थिर बनी हुई हैं। गौरतलब है कि चुनावी राज्यों में मूल्यवृद्धि रोकने और चुनाव समाप्त होते ही दाम बढ़ाने का यह पैटर्न पहले भी देखा गया है। विपक्ष की माँग है कि सरकार तेल मूल्य निर्धारण पर श्वेत पत्र जारी करे और निम्न-मध्यम वर्ग को राहत देने का रोडमैप सार्वजनिक करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार का संदर्भ अलग है — चुनावी मौसम बीतते ही कमर्शियल एलपीजी और फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना उस पैटर्न की पुनरावृत्ति है जो मतदाता अब पहचानने लगे हैं। असली कमी सरकार की ओर से किसी स्पष्ट मूल्य-स्थिरीकरण रोडमैप का न होना है — न कोई श्वेत पत्र, न कोई सब्सिडी समीक्षा, न कोई वैश्विक बाज़ार से इन्सुलेशन की नीति। विपक्ष की आलोचना भावनात्मक रूप से प्रभावी है, पर वैकल्पिक नीति-प्रस्ताव का अभाव उसे भी कमज़ोर करता है। जनता के लिए असली प्रश्न यह है कि क्या अगले चुनाव तक फिर राहत मिलेगी — और उसके बाद फिर वही चक्र।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब और क्यों बढ़ाई गईं?
16 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए। विपक्षी नेताओं के अनुसार, चुनावों के दौरान जानबूझकर कीमतें रोकी गई थीं और चुनाव समाप्त होते ही बढ़ोतरी की गई। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया के तनाव को भी एक कारण बताया जा रहा है।
विपक्ष ने सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए?
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के पास महंगाई नियंत्रण की कोई ठोस योजना नहीं है और चुनाव बाद कीमतें बढ़ाना एक स्थापित पैटर्न बन चुका है। RJD के मनोज झा ने निम्न-मध्यम वर्ग पर बढ़ते बोझ की बात की, जबकि SP और कांग्रेस ने सरकार की कूटनीतिक और आर्थिक नीति को विफल बताया।
कमर्शियल एलपीजी के दाम कब बढ़े और इसका क्या असर हुआ?
कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि से कुछ दिन पहले ही कमर्शियल एलपीजी के दाम दोगुने कर दिए गए थे। इससे छोटे कारोबारियों और रेस्तरां संचालकों को सीधा नुकसान उठाना पड़ा।
पश्चिम एशिया के तनाव का भारत में तेल कीमतों पर क्या असर है?
SP विधायक रविदास मेहरोत्रा के अनुसार, ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे संघर्ष से वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत में ईंधन कीमतों पर दिख रहा है। उन्होंने सरकार से इस तनाव को कम कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास करने की माँग की।
2014 के बाद से तेल पर टैक्स नीति को लेकर क्या विवाद है?
SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा का कहना है कि 2014 के बाद से पेट्रोल, जमीन और पानी समेत हर चीज़ पर टैक्स का बोझ लगातार बढ़ा है। उनके अनुसार, सरकार की नीति कुछ उद्योगपतियों के हित में है और जनता को राहत केवल चुनावी मौसम में मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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