एलपीजी महंगाई पर विक्रमादित्य सिंह का बयान, सरकार की निष्क्रियता पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- महंगाई की बढ़ती संभावनाएं स्पष्ट थीं।
- सरकार ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया।
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
- सरकार को इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करनी चाहिए।
- महंगाई का संकट सभी नागरिकों को प्रभावित कर रहा है।
नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह ने एलपीजी आपूर्ति से संबंधित मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस महंगाई के बढ़ने की आशंकाएं पहले से ही स्पष्ट थीं, लेकिन सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
विक्रमादित्य सिंह ने दिल्ली में समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "यह एक गंभीर स्थिति है और यह स्पष्ट हो रहा था कि महंगाई की संभावनाएं बढ़ रही हैं। होर्मुज की जलडमरूमध्य में लंबे समय तक रुकावट के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें निरंतर बढ़ रही हैं, वहीं हमारे रुपए की कीमत में गिरावट आ रही है, जिससे डॉलर के मुकाबले प्रति बैरल कीमत बढ़ रही है। इसे एक 'दीवार पर लिखा इशारा' कहा जा सकता है।"
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "जब 28 फरवरी को मध्य पूर्व में नए सिरे से संघर्ष की शुरुआत हुई, तब से स्थिति स्पष्ट थी। फिर भी, कोई निर्णय नहीं लिया गया और न ही कोई निर्णायक कदम उठाया गया, जो कि बेहद दुखद है। पूरे देश को महंगाई के संकट में धकेला जा रहा है। चाहे वह औद्योगिक क्षेत्र हो, टाइल बनाने की उद्योग हो, होटल हों, या घरेलू एलपीजी का मामला हो, सभी जगह महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। इसे नियंत्रण में लाया जा सकता था।
तेल की कीमतों पर विक्रमादित्य ने कहा, "अगर भारत के संबंध रूस के साथ पहले की तरह मजबूत होते, तो हमें सस्ता तेल मिल सकता था। लेकिन पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को तेल बाजार की कीमत पर मिलेगा। यह चिंता का विषय है। इस पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए।"
मध्य पूर्व की स्थिति, बेरोजगारी और तेल की कीमतों पर कांग्रेस की ओर से संसद में चर्चा की मांग करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा, "सभी जानते हैं कि पूरे देश में अवस्था गंभीर है। यह केवल उद्योगों और होटलों का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के हर नागरिक से संबंधित है। अगर सरकार इस पर चर्चा नहीं करना चाहती, तो मेरा मानना है कि वह बचने की कोशिश कर रही है।"
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। विदेश मंत्री को एक प्रस्ताव लेकर आना चाहिए और विपक्ष की आवाज को भी सुना जाना चाहिए। इस विषय पर सरकार एक महत्वपूर्ण संकट में फंसी हुई है। इससे बाहर निकलने का तरीका सभी को मिलकर चर्चा करनी चाहिए।