एलपीजी संकट: खड़गे ने पश्चिम एशिया के संघर्ष को बताया जिम्मेदार
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम एशिया के संघर्ष ने एलपीजी की आपूर्ति को प्रभावित किया।
- भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत आयात करता है।
- सरकार को तत्काल राहत उपाय लागू करने की जरूरत है।
- अधिकांश प्रभावित लोग गरीब और छोटे व्यवसायी हैं।
- एलपीजी के दाम में 60 रुपये की वृद्धि हुई है।
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देश में एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया है। सोमवार को राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और संघर्ष ने पूरे देश में एलपीजी की आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
खड़गे के अनुसार, आज की स्थिति यह है कि कई क्षेत्रों में एलपीजी की कमी के कारण हाहाकार
उन्होंने बताया कि भारत अपनी कुल एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से लगभग 90 प्रतिशत का आयात स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के रास्ते होता है। ऐसे में मौजूदा हालात घरेलू उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता, दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।
खड़गे ने कहा कि देश के लगभग हर हिस्से में इसका प्रभाव देखा जा रहा है। लोगों के घरों में परेशानी है, छोटे ढाबे, रेस्तरां, हॉस्टल और सामुदायिक रसोई तक प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर सामुदायिक किचन और सामान्य रसोई बंद होने की स्थिति में हैं। इसके साथ ही एमएसएमई और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी एलपीजी की आपूर्ति में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह चिंता का विषय है कि कई प्रतिष्ठानों को अपने संचालन सीमित करने पड़े हैं, जबकि कुछ लोग 5,000 रुपये से अधिक प्रति सिलेंडर की ऊंची कीमत पर एलपीजी खरीदने को मजबूर हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया था कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है और लोगों को अफवाहों से सावधान रहना चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से भिन्न है। जब सरकार ने भारतीय नागरिकों को ईरान में स्थिति बिगड़ने की आशंका के बारे में सलाह दी, उसी समय यह स्पष्ट हो गया था कि पश्चिम एशिया में तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ेगा।
खड़गे ने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार से मेरा आग्रह है कि वह तुरंत देश में एलपीजी की आपूर्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे। आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के लिए वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों पर काम करे, और आम नागरिकों तथा छोटे व्यवसायों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस क्षेत्रीय तनाव और संभावित व्यवधान के संकेत मिल चुके होंगे। इसका अर्थ यह है कि सरकार को यह बात अच्छी तरह मालूम थी कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के रास्ते आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यदि एलपीजी आयात को लेकर समय रहते अग्रिम योजना बनाई जाती, वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जातीं और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित किया जाता, तो आज देश को इतनी कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ता।
खड़गे ने कहा कि संकट को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया और इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों तथा व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वह इस पूरे मामले पर स्पष्ट बयान दे। एलपीजी आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए त्वरित कदम उठाए और भविष्य में ऐसे संकट से बचने के लिए ठोस एवं दीर्घकालिक रणनीति तैयार करे। उन्होंने बताया कि सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए हैं। वहीं, सिलेंडर बुक करने के बाद वेटिंग पीरियड शहरों में 21 से बढ़ाकर 25 दिन और गांवों में 25 से लेकर 35 दिन तक कर दिया गया है।