ऊर्जा संकट पर सदन में चर्चा हो, प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हैं: मल्लिकार्जुन खड़गे
सारांश
Key Takeaways
- ऊर्जा संकट की गंभीरता को समझना आवश्यक है।
- कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट उत्तर की मांग की है।
- किसानों और आम जनता पर संकट का गहरा असर है।
- सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
- संसद में इस मुद्दे पर बहस आवश्यक है।
नई दिल्ली, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के चलते भारत में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने की संभावना का उल्लेख किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने और प्रधानमंत्री से जवाब देने की अपील की है।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार को पश्चिम एशिया में संभावित युद्ध का पूर्वाभास था। फिर भी, उसने भारत की ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। देशवासियों को सच्चाई जानने का अधिकार है। हम यह मांग करते हैं कि इस संकट पर संसद में विस्तृत चर्चा हो और प्रधानमंत्री देश को स्पष्ट जवाब दें।
उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार के झूठे 'स्रोत आधारित' आश्वासन ने इसकी अक्षमता को उजागर कर दिया है। वर्तमान में ऊर्जा संकट गहरा रहा है, जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि किसानों पर सबसे पहले असर पड़ा है। ईंधन की कमी से कृषि और उर्वरक की आपूर्ति बाधित हो गई है। एलपीजी सिलेंडर की राशनिंग शुरू हो गई है, और रिफिल के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। घरेलू सिलेंडर के लिए 25 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि रेस्टोरेंट और छोटे खाने-पीने के ठेले बंद हैं। जमाखोरी और काला बाजारी में वृद्धि हो रही है। चावल और गेहूं का निर्यात प्रभावित हुआ है– 60,000 टन बासमती निर्यात रुका हुआ है। दवाइयों की कीमतें बढ़ने की संभावना है, क्योंकि कच्चे माल की लागत में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है। टेक्सटाइल सेक्टर दबाव में है, क्योंकि लागत लगातार बढ़ रही है। एविएशन ईंधन महंगा हो गया है, जिससे हवाई यात्रा की लागत भी बढ़ गई है। स्टील उद्योग गंभीर संकट में है, क्योंकि कच्चे माल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ गई हैं। सिरेमिक, ग्लास, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल जैसे सभी सेक्टर प्रभावित हो रहे हैं, हर उत्पाद की कीमत बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इनकार करने का यह पैटर्न नया नहीं है। नोटबंदी के दौरान कहा गया कि 50 दिन में नकदी संकट समाप्त हो जाएगा। कोविड महामारी में कहा गया कि यह गंभीर आपातकाल नहीं है। देश ने गंगा में शवों और भयंकर प्रबंधन की त्रासदी देखी है। पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में कहा जा रहा है कि भारत के पास 74 दिन का तेल और ऊर्जा स्टॉक है, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर है। देशवासियों को सच्चाई जानने का अधिकार है।
खड़गे ने फिर से संसद में इस संकट पर पूरी चर्चा की मांग की और प्रधानमंत्री से स्पष्ट उत्तर देने का अनुरोध किया।